करोड़ों की मालकिन अपने घर में हो गई कैद
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
चार बहनों में तीसरे नंबर की कमलेश कुमारी जुनेजा ही जिंदा बची है। सभी बहनें शिक्षिकाएं रही हैं, लेकिन किसी ने शादी नहीं की। सावित्री और रमेश कुमारी दो बहनों की ऑन ड्यूटी मौत हुई थी। मार्च के तीसरे सप्ताह में राजकुमारी ने भी दम तोड़ दिया। कमलेश के भाई सुरेंद्र कुमार जुनेजा अहमदाबाद में अपने परिवार के साथ रहते थे। वही अकेले बचे थे। बहन की मौत की खबर पर सुरेंद्र जुनेजा अपने पत्नी के साथ बरेली आए थे। 24 मार्च को वह टंकी के पानी भर रहे थे, इस दौरान अचानक गिर पड़े और उनकी मौत हो गई। बहन के एक सप्ताह बाद भाई की मौत से कमलेश बुरी तरह से टूट गईं। सुरेंद्र जुनेजा की पत्नी का तो बुरा हाल था। प्रेमनगर के तत्कालीन वरिष्ठ उप निरीक्षक(वर्तमान में इंस्पेक्टर दातागंज,बदायूं) जेके तोमर की मदद से किसी तरह सुरेंद्र के शव को उनकी पत्नी अहमदाबाद ले गईं। उसके बाद से सुरेंद्र की पत्नी नहीं आई हैं। बहन की मौत के बाद अकेली पड़ी कमलेश की देखभाल के लिए उनके रिश्तेदारों ने जिन लोगों को रखा था। उसे कॉलोनाइजर ने अपने पक्ष में कर लिया। इसके बाद उन्होंने कमलेश को खाना भी समय से नहीं दिया। कमलेश प्रहलाद पुर गांव में लंबे समय तक शिक्षिका रहीं हैं। वहां की रहने वाली शिक्षिका प्रवेश यादव का उनके घर आना-जाना था। पंद्रह दिन पहले वह कमलेश से मिलने आई तो उन्होंने प्रवेश को अपना दर्द सुनाया। कमलेश ने बताया कि उसके साथ मारपीट की जाती है। उसकी देखभाल के लिए रखे गए लोग ही उसे मारना चाहते हैं। प्रवेश यादव ने मामले की शिकायत प्रेमनगर थाने में की। इसके बाद पुलिस ने मौके पर पहुंचकर उसकी देखभाल के लिए कोठी में रहने वाले सभी लोगों को भगाकर फिलहाल यह जिम्मेदारी प्रवेश को दे रखी है। डीएम के पास भी कमलेश के कोठी में कैद होने की शिकायत पहुंच गई है। उन्होंने इस पर एडीएम के जांच कराने के आदेश दिए हैं।
एक वर्दी वाले ने दिया साथ
वर्ष 2012 में शहर के एक कॉलोनाइजर ने कमलेश और उसके भाई बहन को 15 लाख रुपये देकर उनकी इसी 500 गज की कोठी का एग्रीमेंट करा लिया था, जिसमें वह रह रही हैं। उसमें डेढ़ करीब डेढ़ करोड़ की कीमत रखी गई थी, लेकिन बैनामा नहीं कराया था। कमलेश और राजकुमारी बैनामा कराने के लिए कॉलोनाइजर के चक्कर लगाती रहीं। थक हारकर वह घर बैठ गईं, बाद में उन्होंने भी बैनामा कराने के मना कर दिया। इस पर दो फरवरी को कॉलोनाइजर ने कमलेश उसकी बहन राजकुमारी और भाई सुरेंद्र जुनेजा के खिलाफ मुकदमा दर्ज करा दिया था। इस मामले की विवेचना तत्कालीन एसएसआई जेके तोमर को मिली तो उन्होंने पूरे मामले को समझकर इंसानियत का साथ दिया। कमलेश के परिवार के दो मकान और थे। इनमें से एक में उनके भाई का परिवार रह रहा था। जबकि जनकपुरी वाले 200 गज के मकान में कॉलोनाइजर के लोग रहने लगे थे। उन्होंने कमलेश जुनेजा का मकान खाली करा दिया। इतना ही नहीं राजकुमारी की अंतिम संस्कार भी एक परिवार के सदस्य ही तरह उन्हीं ने कराया। भाई सुरेंद्र जुनेजा की मौत होने पर एम्बुलेंस किराए पर कराकर उनका शव अहमदाबाद तक भिजवाया। कमलेश कुमारी ने जेके तोमर को मकान भी देना चाहती थीं लेकिन उन्होंने इनकार कर दिया।
मुखाग्नि देने वाला बोला, अब मेरा काम दो
-इंस्पेक्टर जेके तोमर उस समय अवाक रह गए जब राजकुमारी को मुखाग्नि देने के बाद शमशान भूमि में ही उनका भतीजा बोला, मैने आपका काम कर दिया। तुम मेरा काम कर दो। कुछ देर तो वह चुप होकर सोचते रहे। बाद में उन्हें किसी ने बताया कि यह समझ रहा कि मकान आपका होने वाला है। इसी बीच कुछ और लोगों में भी यह चर्चा होने लगी कि इंस्पेक्टर साहब इस मामले में इतनी दिलचस्पी क्यों ले रहे हैं।