फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Bareilly News ›   crime

कच्ची उमर में हुए प्यार का बेरहमी से कर दिया कत्ल

Tue, 10 Mar 2015 01:39 AM IST
बरेली
बरेली Updated Tue, 10 Mar 2015 01:39 AM IST
विज्ञापन
 किशोर वय में सात साल पहले रेवती स्टेशन पर मुलाकात के बाद प्रभु की अपने से कम उम्र की जिस लड़की से दोस्ती और फिर प्यार हुआ, वह किशोरी भी प्रभु के लिए कुछ भी कर गुजरने को तैयार थी। मजहब की दीवार भी उनके प्यार को कम नहीं कर सकी। घर से भागे, मंदिर में शादी की लेकिन सोमवार तड़के हत्यारों ने लड़की को मारकर एक झटके में इस प्रेम कहानी का कत्ल कर दिया।
विज्ञापन

बिशारतगंज कसबे के  प्रभु गोस्वामी ने बताया कि सात साल पहले जब वह करीब 12 साल का था और रेवती स्टेशन पर खाने-पीने का सामान बेच रहा था तब अपने पिता के साथ ट्रेन से कहीं जा रही किशोरी से उसकी पहली मुलाकात हुई थी। इसके बाद मुलाकातों का सिलसिला चला जो उम्र  के साथ बढ़ता गया। समुदाय अलग होने की वजह से वह तो डरता भी था लेकिन लड़की जरा भी नहीं डरती थी। वह उसके घर भी आया करती थी। 18 फरवरी की रात को उसकी प्रेमिका चुपचाप उसके घर आ गई तो उसने उसे रजाई में छिपा दिया। वह घर से साथ ले जाकर शादी करने की जिद करने लगी। ऐसा न होने पर उसने खुदकुशी की धमकी भी दी। वह उसे घर से ले चला। बिशारतगंज स्टेशन पर उसने एक बार फिर उसे शादी की जिद न करने के लिए मनाने की कोशिश की तो उसने सद्भावना एक्सप्रेस के आगे कूद गई। हालांकि उसने उसे खींचकर बचा लिया। इसके बाद ऊ ना हिमाचल एक्सप्रेस से वह उसे हिमाचल ले गया। वहां एक दिन जंगल में गुजारा और अगले दिन मंदिर में शादी कर ली। अगले ही दिन प्रेमिका के पिता ने उसके  खिलाफ मुकदमा लिखा दिया। पुलिस ने दबाव बनाने के लिए उसके चाचा को उठाया तो वह खुद थाने आने की जिद करने लगी। पांच मार्च को वह थाना बिशारतगंज पहुंच गई। पुलिस ने उसे परिवार वालों के सुपुर्द कर दिया था। कोर्ट में बयान कराए जाने थे, लेकिन इससे पहले ही उसकी हत्या कर दी गई। वह उसे बेहद चाहती थी। उसकी हत्या के बाद उसकी भी जान को खतरा बना हुआ है।
विज्ञापन



कोई अपना ही है खूनी!
क्राइम सीन देखकर कोई भी यह बता सकता है कि किशोरी को मारने वाला कोई अपना ही है। एक कमरे के मकान में आठ लोग सो रहे थे। कोई बाहर का व्यक्ति गोली मारकर निकल गया फिर भी किसी को पता नहीं लग पाना संदेह पैदा कर रहा है। कोई उसे क्यों मारेगा, इसका जवाब उसके पिता के पास भी नहीं है। प्रभु से प्यार करनेे की जानकारी होने के बाद से ही अपने उससे दूर होते चले गए। पुलिस का संदेह भी उसके अपनों पर ही है। हत्या के बाद किशोरी का भाई गायब है तो परिवार वालों की आंखों से आंसू न टपकना भी लड़की से उनकी दूरी को बयान कर रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन


तो हो सकती थी प्रभु की हत्या
किशोरी को भगा ले जाने के आरोप में प्रभु गोस्वामी जेल भेज दिया गया है। पुलिस के मुताबिक मेडिकल कराने के बाद लड़की का बयान कोर्ट में कराया जाता। लड़की के नाबालिग होने पर उसके बयानों के आधार पर परिवार के हक में ही फैसला हो सकता था।  प्रभु अगर बाहर होता तो उसके खिलाफ किशोरी की हत्या का मुकदमा लिखा जाना तय था, क्योंकि उसकी वजह से ही लड़की के परिवार वालों की फजीहत हो रही थी। यही वजह थी कि समाज का एक सभासद भी लड़की के परिवार वालों के साथ खड़ा था। पुलिस अधिकारी भी इस बात को मान रहे हैं कि प्रभु पकड़ा नहीं जाता तो उसकी भी हत्या हो सक ती थी।

रुपये खत्म होने पर लौट आए
दस हजार रुपये लेकर प्रभु अपनी प्रेमिका के साथ हिमाचल गया था। रुपये खत्म होने पर वहां से आने बाद वह पुल भट्टा में अपनी बहन के घर भी रहा। अपनी साथी वेंडर की मदद से वहीं से उसने नेता जी से तार मिलाए और पहले लड़की को थाने भेज दिया। बाद में वह खुद भी थाने पहुंच गया।



यह सवाल खोलेंगे हत्या का राज

हत्या चार बजे होने के बाद लड़की के पिता ने सूचना सोमवार की सुबह सात बजे के बाद क्यों दी।
बहन की हत्या के बाद भाई पुलिस के पास जाने के बाद कहां चला गया। जबकि वह सुबह कुछ देर तक घर में देखा गया।
परिवार वाले बयान क्यों बदल रहे हैं, कभी बड़े भाई के घर में होने की बात कही जा रही है, कभी छोटे की मौजूूूूूूूूूूूूूूूूूूूूूूूूूूूूूूूूूूूूूूूूूूूूूूूूूूूूूूूूूूूूूूूूूूूूूूूूूूूूूूूूूूूूूूूूूूूूूूूूूूूूदगी बताई जा रही है
किशोरी को कहीं धोखे से नशीली गोली खिलाकर सुला तो नहीं दिया था, ताकि वह मारते वक्त वह विरोध ही नहीं कर पाए।
लड़की की हत्या का समय भी सुबह चार बजे बताया जा रहा है। उसी वक्त उसकी मां छत पर बाथरूम के लिए गई थी, इसमें कितनी सच्चाई है।


पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल
प्रभु पर पहले रामलीला मेले में भी चाकू से हमला हो चुका है, पुलिस ने यह जानने की कोशिश क्यों नहीं की हमलावर कौन था।
पुलिस लड़की को महिला थाने में भी तो रख सकती थी, उसे परिवार वालों के सुपुर्द क्यों कर दिया गया।
होली के बाद भी पुलिस ने लड़की का मेडिकल कराने की प्रक्रिया शुरू क्यों नहीं कराई, जबकि  सोमवार को कोर्ट में बयान कराने की बात की जा रही थी।
प्रभु के परिवार वालों ने लड़की के परिवार वालों से उसकी जान को खतरा होने की शिकायत की थी, पुलिस ने उस पर कार्रवाई क्यों नहीं की।


  

विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें हर राज्य और शहर से जुड़ी क्राइम समाचार की
ब्रेकिंग अपडेट।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed