फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Bareilly News ›   crime

क्लेमेंट ब्राउन का लुक ऑफ वारंट जारी

Thu, 05 Mar 2015 01:45 AM IST
बरेली
बरेली Updated Thu, 05 Mar 2015 01:45 AM IST
विज्ञापन
इंटरनेट पर लॉटरी का झांसा देकर ठगी करने वाले नाइजीरियन ठगों के इंटरनेशनल गैंग के सरगना क्लेमेंट ब्राउन का लुक ऑफ वारंट जारी हो गया है। क्राइम ब्रांच ने इसके आधार पर उसकी तलाश शुरू कर दी है। दूतावास की मदद से भारत में रहने वाले नाइजीरियन नागरिकों का सजरा भी जुटाया जा रहा है। पुलिस छानबीन में बदायूं के पप गांव के ही इस गैंग के एक और खास मोहरे सद्दीक हुसैन का भी नाम सामने आया है।
विज्ञापन

हशमत के पकड़े जाने के बाद इंटरनेशनल ठगी की परतें खुलतीं जा रही हैं। होली बाद हशमत के खातों की डिटेल आने के बाद पता लग पाएगा कि उसके खातों से अब तक कितना लेनदेन हुआ है। क्राइम ब्रांच हशमत और उसके फर्जी नाम अख्तर हुसैन के खातों को भी सर्च करा रही है। इस बीच तफ्तीश में इसी गैंग के एक और सदस्य पप गांव के सद्दीक का नाम आया है। बताया जा रहा है कि सद्दीक कई साल से गैंग से जुड़ा है और उसने ही यूपी में इस गैंग का नेटवर्क तैयार किया है। हशमत को भी उसी ने गैंग से जोड़ा था। पुलिस के मुताबिक पप गांव में सद्दीक का न सिर्फ आलीशान घर है बल्कि वह करीब सौ बीघा जमीन का भी मालिक है। उसके पकड़े जाने के बाद क्राइम ब्रांच को ठगों के अहम सुराग मिलने की उम्मीद है।
विज्ञापन


ये है लुक ऑफ वारंट
इस वारंट के जरिए क्राइम ब्रांच क्लेमेंट को देश भर में कहीं भी तलाश कर सकती है। एसपी क्राइम डॉ. एसपी सिंह ने बताया कि लुक ऑफ वांरट ऐसे लोगों का जारी होता है जिनका पता तस्दीक नहीं हो पाता। इस वारंट के जरिए भारतीय दूतावास से हम पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि भारत में नाइजीरियन कौन-कौन नागरिक रहते हैं। उनके  पते तस्दीक करने से ठगों के सरगना हाथ लग सकता है। बदायूं, आगरा और उत्तराखंड एसटीएफ भी ठगों की तलाश में लगी है। उनके यहां भी तमाम लोगों से ऑनलाइन ठगी की गई है।      
विज्ञापन
विज्ञापन


पहले छोड़ दिया था हशमत को
डेढ़ साल पहले क्राइम ब्रांच के दरोगा रजी अहमद ने बदायूं के संजीव और आनंद नाम के दो ठगों को पीलीभीत रोड पर मॉल के पास एटीएम से रकम निकालते हुए गिरफ्तार कर जेल भेजा था। बताया जाता है उसी समय पप गांव के हशमत को भी पकड़ा गया था लेकिन बाद में उसे मुखबिर बताकर छोड़ दिया गया। इस मामले की विवेचना जब डीसीआरबी के इंस्पेक्टर केपी सिंह ने पास आई तो उन्होंने न सिर्फ हशमत का नाम खोल दिया बल्कि उसे रंगे हाथ दबोच लिया। इससे उसका राज खुल गया।

उसी ने हशमत को ठगों के गैंग से जोड़ा था।  

विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें हर राज्य और शहर से जुड़ी क्राइम समाचार की
ब्रेकिंग अपडेट।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed