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एक ही भवन पर दो बार लगा दिया टैक्स
बरेली
Updated Thu, 22 Jan 2015 01:26 AM IST
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नगर निगम में टैक्स वसूली बिलों की गड़बड़ियां कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। पांच साल पहले एक ही भवन पर करदाता पर दो बार टैक्स लगा दिया गया। करदाता के लघु वाद दायर करने पर चार साल पहले न्यायालय ने मामला निपटा दिया। मगर अब तक नगर निगम ने संशोधित बिल नहीं जारी किया।
जनकपुरी में वर्षा मिगलानी के भवन नंबर 1158 पर नगर निगम ने 70335 रुपये का वार्षिक टैक्स लगाया। कर अधीक्षक ने राजेश मिगलानी के नाम से भवन नंबर 1160 के नाम से टैक्स बकाया का दूसरा बिल जारी कर इसी पते पर भेज दिया। करदाता ने यह बिल वापस कर कर अधीक्षक को बताया कि भवन नंबर 1160 उसका नहीं है। फिर भी कुछ नहीं हुआ तो करदाता ने आरटीआई के तहत अपने बिल की जानकारी मांगी। सूचना में कर अधीक्षक ने बताया कि भवन नंबर 1158 और 1160 एक ही भवन हैं। मगर इसके बाद भी कर अधीक्षक ने भवन नंबर 1160 पर लगे टैक्स को समाप्त नहीं किया। इसके बजाय भवन नंबर 1158 पर लगे टैक्स जो कि असली था, उसे समाप्त कर दिया। करदाता ने दोहरे बिल जारी कर ज्यादा टैक्स लगाने के विरुद्ध लघुवाद न्यायालय में अपील की। न्यायालय ने 31 जनवरी 2010 को 70335 रुपये के टैक्स को गलत मानते हुए असली बिल में 31300 रुपये टैक्स निर्धारित किया। मगर न्यायालय के निर्णय के बाद भी त्रुटिपूर्ण बिल ठीक नहीं किया गया। मेयर डा. आईएस तोमर ने भी करदाता का त्रुटिपूर्ण बिल संशोधित कर सही बिल जारी करने के लिए कई पत्र लिखे। मगर अफसरों ने संशोधित बिल जारी नहीं किया।
टैक्स अफसरों ने भवनों पर दोहरे कर लगाकर समस्या पैदा की जिसका खामियाजा करदाता भुगत रहे हैं। पांच साल से त्रुटिपूर्ण बिल की समस्या हल नहीं हुई। संशोधित बिल जारी करने के लिए नगर आयुक्त को दोबारा पत्र भेजा है। -डॉ. आईएस तोमर, मेयर
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जनकपुरी में वर्षा मिगलानी के भवन नंबर 1158 पर नगर निगम ने 70335 रुपये का वार्षिक टैक्स लगाया। कर अधीक्षक ने राजेश मिगलानी के नाम से भवन नंबर 1160 के नाम से टैक्स बकाया का दूसरा बिल जारी कर इसी पते पर भेज दिया। करदाता ने यह बिल वापस कर कर अधीक्षक को बताया कि भवन नंबर 1160 उसका नहीं है। फिर भी कुछ नहीं हुआ तो करदाता ने आरटीआई के तहत अपने बिल की जानकारी मांगी। सूचना में कर अधीक्षक ने बताया कि भवन नंबर 1158 और 1160 एक ही भवन हैं। मगर इसके बाद भी कर अधीक्षक ने भवन नंबर 1160 पर लगे टैक्स को समाप्त नहीं किया। इसके बजाय भवन नंबर 1158 पर लगे टैक्स जो कि असली था, उसे समाप्त कर दिया। करदाता ने दोहरे बिल जारी कर ज्यादा टैक्स लगाने के विरुद्ध लघुवाद न्यायालय में अपील की। न्यायालय ने 31 जनवरी 2010 को 70335 रुपये के टैक्स को गलत मानते हुए असली बिल में 31300 रुपये टैक्स निर्धारित किया। मगर न्यायालय के निर्णय के बाद भी त्रुटिपूर्ण बिल ठीक नहीं किया गया। मेयर डा. आईएस तोमर ने भी करदाता का त्रुटिपूर्ण बिल संशोधित कर सही बिल जारी करने के लिए कई पत्र लिखे। मगर अफसरों ने संशोधित बिल जारी नहीं किया।
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टैक्स अफसरों ने भवनों पर दोहरे कर लगाकर समस्या पैदा की जिसका खामियाजा करदाता भुगत रहे हैं। पांच साल से त्रुटिपूर्ण बिल की समस्या हल नहीं हुई। संशोधित बिल जारी करने के लिए नगर आयुक्त को दोबारा पत्र भेजा है। -डॉ. आईएस तोमर, मेयर
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