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सिपाही के लिए वसूली करता था संजय कालिया

Sun, 11 Dec 2016 01:25 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बरेली
ब्यूरो/अमर उजाला, बरेली Updated Sun, 11 Dec 2016 01:25 AM IST
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Cops used for recovery Sanjay Kalia
Cops used for recovery Sanjay Kalia - फोटो : बरेली, अमर उजाला
गोली लगने से घायल सिपाही रवींद्र सिंह के बारे में नई जानकारी यह मिली है कि उसने जीआरपी में तैनाती के दौरान अवैध वेंडरों और अन्य धंधा करने वालों से वसूली की जिम्मेदारी संजय कालिया को दे रखी थी। रवींद्र की शह पर ही वह दबंगई करता था। पुलिस ने संजय के दोस्त गौरव पाठक और कंतिया की तलाश शुरू कर रही है।
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पुलिस सूत्रों के मुताबिक क्राइम ब्रांच का सिपाही से दोस्ती का फायदा उठा कर संजय अपने साथी गौरव और कंतिया के साथ मिलकर अपने घर से ही सट्टे का कोराबार करता था।  संजय की दबंगई की कई कहानियां मोहल्ले में सुनने में आ रही हैं। वह ब्याज पर कमजोर लोगों को ही रकम बांटता है। वसूली करते समय उनसे अपनी इच्छा से ब्याज लेता है। संजय के भाई विकास की पत्नी  कुसुमा का कहना है कि संजय से उनकी बोलचाल तक नहीं है। घटना के दिन सिपाही और संजय में गाली-गलौज हुई तो वह कमरे से निकलकर बाहर आई थी। इसके बाद फायर हो गया और उसने कमरा अंदर से बंद कर लिया।  संजय और सिपाही के संबंध बहुत पुराने हैं। वह अक्सर संजय के घर आ जाता था। जीआरपी में तैनाती के दौरान संजय को उसने अवैध वसूली की जिम्मेदारी दे रखी थी। इसलिए संजय सिपाही का बेहद मुंह लगा था।
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कप्तान के आते ही भंग हो सकती है क्राइम ब्रांच
12 दिसंबर को एसएसपी जोगेंद्र कुमार के पुलिस वीक से लौटते ही क्राइम ब्रांच भंग हो सकती है। यह मैसेज टीम को मिल भी चुका है। एसएसपी को क्राइम ब्रांच के सिपाही रवींद्र सिंह के गोली लगने के मामले की जानकारी मिल चुकी है। संजय कालिया और उसके भाई राम कश्यप के खिलाफ मुकदमा लिखाने को अफसरों ने नई कहानी बनाई हो, लेकिन एसएसपी को असली कहानी का पता लग चुका है। इसलिए क्राइम ब्रांच की करतूतों से एसएसपी बेहद नाराज हैं। उन्होंने सभी सिपाहियों के असलहा जमा कराने को कहा है। साथ ही यह भी इशारा कर दिया है कि कोई भी दागी अब क्राइम ब्रांच में नहीं रहेगा।  सपा नेताओं के मेहरबानी से सर्विलांस सेल में अटैचमेट कराकर नौकरी करने वाले सिपाहियों की भी छुट्टी हो सकती है।   
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...तो सिपाही को अपनी ही गोली लगी थी
 
फोरेंसिक लैब जांच को जाएगी सिपाही की पिस्टल
बरेली। सिपाही के पेट में लगकर पार हुई गोली कहीं उसी की पिस्टल की तो नहीं है। इसका भी पता लगाने की कोशिश की जा रही है। मेडिकल रिपोर्ट में गोली किस बोर की है इसका पता नहीं लग पाने की वजह से यह सवाल खड़ा हो रहा है। उधर, सिपाही की पिस्टल को पुलिस ने कब्जे में ले लिया है। उसे जांच के लिए फोरेंसिक लैब भेजा जाएगा। 
सूत्रों के मुताबिक संजय कालिया के घर क्राइम ब्रांच के सिपाही रवींद्र सिंह दारू पीकर ही पहुंचा था। नशे में धुत सिपाही और संजय में लेनदेन को लेकर विवाद होने लगा। इसी बीच सिपाही ने अपनी सरकारी पिस्टल निकाल ली। यह भी हो सकता है कि छीनाझपटी में ही रवींद्र सिंह की पिस्टल से उसे ही गोली लग गई। गोली पेट में लगने के बाद मलद्वार के पास से बाहर निकल गई। सूत्रों के अनुसार बरामद होने पर उसकी पिस्टल की नाल से बारुद की बदबू आ रही थी।

क्राइम ब्रांच प्रभारी से डीआईजी ने पूछा, क्या देखते हो   
बरेली। डीआईजी आशुतोष कुमार ने एसपी क्राइम राजेश्वर सिंह के माध्यम से क्राइम ब्रांच के प्रभारी विकास सक्सेना से पूछा कि सिपाही सरकारी पिस्टल और गाड़ी लेकर घूम रहे हैं। तुम क्या देखते हो। हालांकि इसका जवाब उनके पास नहीं है। इसलिए विकास सक्सेना के खिलाफ कार्रवाई तय मानी जा रही है।
 सियासी तौर पर मजबूत सिपाही और दरोगा से संबंध बनाकर रखने में भी उन्हें महारत हासिल है। यही वजह है कि क्राइम ब्रांच में उन्होंने लंबी पारी खेली है, लेकिन सिपाही पर जानलेवा हमला होने के बाद  यह बात भी साफ हो गई है कि टीम पर उनकी पकड़ नहीं है।  रामपुर बाग और नकटिया की करोड़ों की डकैती में भी विकास की टीम ने तमाम लोगों को उठाकर छोड़ा। यही हाल आईवीआरआई के दीपक शर्मा मर्डर केस में रहा। खुलासे के नाम पर रामपुर बाग की डकैती का ही जैसे तैसे खुलासा हो पाया। ऐसा खुलासा कि करोड़ों की डकैती में सिर्फ छह हजार रुपये ही बरामद किए गए।  

मेरा पति को बेगुनाह है
-विकास की पत्नी कुसुमा ने बताया कि उसके पति का संजय कालिया से कोई लेना-देना नहीं है। वह  ऑटो रिक्शा चलाकर परिवार चलाते हैं।  घटना के समय विकास तो सेटेलाइट बस अड्डे के पास पीलीभीत बाईपास स्थित सीएनजी पंप पर गैस लेने गए थे। कुुसुमा के मुताबिक संजय सट्टे के अलावा सुलफा बेचने का धंधा भी करते हैं। 
 
वीडियो गेम में नौकरी करता है राम
-संजय के भाई राम तो वीडियो गेम के बहाने हो रहे सट्टे के कारोबार के लिए काम करता है। उसकी पैरवी के लिए दिन भर सेंटर चलाने वाला थाने में जमा रहा। राम ने बताया कि वह घटना के समय जंक्शन पर होटल में खाना खा रहा था। उसका संजय और विकास के घर आना-जाना भी नहीं है। 


छोटे साहब की टीम में भी दागी
बड़े साहब यानी एसएसपी की क्राइम ब्रांच ही नहीं छोटे साहब या एसपी सिटी कथित एसओजी में भी कई दागी हैं।  सिपाही मुबीन के खिलाफ शाहजहांपुर के अल्लाहपुर थाने में कार्रवाई हुई। इसके अलावा अरुण यादव पर पशु तस्करों की मदद करने का आरोप लग चुका है। हालांकि तत्कालीन एसपी सिटी ने उन्हें क्लीनचिट देकर तबादला करने की सिफारिश कर दी थी। उनका तबादला किला हो गया था।  
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