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हंगामे के बाद बरेली कॉलेज में पीएसी लगाई

Thu, 23 Mar 2017 01:49 AM IST
बरेली
बरेली Updated Thu, 23 Mar 2017 01:49 AM IST
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After the ruckus, PAC was set up at Barely College
college
बरेली कॉलेज में परीक्षा कराने के लिए  पुलिस के साथ पीएसी भी लगा दी गई है। एसएसपी ने एसपी सिटी के छुट्टी पर होने की वजह से एसपी ट्रैफिक ओपी यादव उनके स्थान पर बरेली कॉलेज की सुरक्षा की जिम्मेदारी दी। उनके साथ यूपी 100 का रिजर्व पुलिस बल, चुनाव कार्यालय में नियुक्त पुलिस बल के अलावा बिथरी चैनपुर, कैंट और इज्जतनगर के थाना प्रभारी लगाए गए। इनके अलावा उनकी टीम में सात दरोगा, तीस पुरुष सिपाही और नौ महिला सिपाहियों की ड्यूटी लगाई गई। बरेली कॉलेज के बाहर की सुरक्षा की जिम्मेदारी एसपी क्राइम मार्तण्य प्रकाश सिंह को दी गई। उनके साथ कोतवाली, सुभाषनगर के प्रभारी निरीक्षक और पुलिस कार्यालय के दो निरीक्षक, 10 दरोगा तीस पुरुष सिपाही और नौ महिला सिपाहियों को लगाया गया। इसके अलावा एक प्लाटून पीएसी भी बरेली कॉलेज के गेटों पर सुबह सात बजे ही पहुंच गई। सीओ तृतीय आईपीएस आकाश तोमर भी सुरक्षा पर निगरानी रखे रहे। सीओ एलआईयू और उनकी टीम भी दोनों गेटों के आसपास लगी रही। फायर टेंडर भी कॉलेज गेट पर खड़ा करा दिया गया। वीडियो कैमरा भी पुलिस की टीम के पास था। परीक्षार्थियों को कड़े पहरे से होकर कॉलेज में प्रवेश करना पड़ा। पुलिस को डर यह था कि रवि गोला और आकाश की गिरफ्तारी के विरोध में छात्र बवाल कर सकते हैं, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ।
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गुंडई करने वाले जेल गए
बरेली। बरेली कॉलेज कैंपस में घुसकर गुंडई करने वाले रवि गोला और आकाश का चालान करके पुलिस ने जेल भिजवा दिया। मंगलवार को देर शाम दोनों के खिलाफ प्रोक्टर एसपी मौर्या की तहरीर पर थाना बारादरी में संगीन धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया था। दोनों ने पुलिस कर्मियों से धक्का-मुक्की भी की। देर रात तक रवि और आकाश को बताया ही नहीं गया कि उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ है। बुधवार की सुबह दोनों को मुकदमा लिखे जाने की जानकारी हुई।    
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कोट
बरेली कॉलेज में गुंडई क रने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। रवि गोला और आकाश के खिलाफ गुंडा एक्ट की कार्रवाई भी होगी। इसके अलावा जिसने भी कॉलेज का माहौल बिगाड़ने की कोशिश की, वह जेल जाने के लिए तैयार रहें।
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- जोगेंद्र कुमार, एसएसपी
यहां छात्र नेता बनने का रास्ता है गुंडई
बरेली। ये बरेली कॉलेज हैं। यहां छात्र संगठनों के कंधे पर बैठकर छात्र नेता खुलकर गुंडई करते हैं। वे अपनी पहचान ही गुंर्डई के दम पर बनाते हैं। मंगलवार को कॉलेज में बवाल करने वाले रवि गोला और आकाश कुमार हों या फिर अन्य संगठन के छात्र नेता, कैंपस में अपना दबदबा कायम रखने के लिए शिक्षकों और छात्रों को धमकाना, कर्मचारियों से मारपीट करना इनका आए दिन का काम है। इनकी गुंडई का कॉलेज प्रशासन और प्रबंधन भी आंख बंद करके तमाशा देखते हैं शिक्षक और छात्र सहम जाते हैं और इनकी दुकान चल पड़ती है। किसी को अपनी राजनीति करने के लिे इनका सपोर्ट चाहिए।  पुलिस भी फजीहत से बचने को कार्रवाई नहीं करती और इनके हौसले बुलंद हो जाते हैँ। रवि गोला और आकाश में मंगलवार को पुलिस टीम के सामने जो नाटक किया वह इसका सुबूत है कि इन्हें पुलस का कोई खौफ नहीं है। 

इस तरह बढ़ते हैं हौसले
करीब चार साल पहले रवि गोला और आकाश ने बरेली कॉलेज से स्नातक किया। रवि गोला उन दिनों एबीवीपी संगठन में थे। उसी दौरान इसकी बदमाशियां शुरू हुई। संगठन के नाम पर खूब उत्पात मचाया। इसकी हरकतों के चलते ही इसको एबीवीपी ने संगठन से निकाल दिया। उसके बाद आए दिन कॉलेज में हंगामा करना, मारपीट करना, शिक्षकों को धमकाना शुरू कर दिया। पिछले साल ही नकल कराने के मामले में रवि गोला जेल गया। कॉलेज में एक दर्जन से ज्यादा मामले इसके नाम दर्ज हैं।

 ऐसे भी हुए हैं बवाल
-दो साल पहले सछास के जिलाध्यक्ष ह्रदेश यादव, अनूप यादव और कुछ अन्य छात्र नेताओं ने कॉलेज में काफी बवाल मचाया था। ह्रदेश पर एक शिक्षिका के साथ अभद्रता का मामला था। उसे गिरफ्तार करने के लिए पुलिस फोर्स कॉलेज पहुंचा। एसपी सिटी तक पहुंचे। जमकर बवाल हुआ। सत्ता की हनक में पुलिस छात्रनेताओं को गिरफ्तार नहीं कर सकी।
-एबीवीपी में रहे सुमित सैनी ने बरेली कॉलेज में कई बार हंगामा किया। कॉलेज से उसको निष्कासित तक किया गया। चीफ प्रॉक्टर से बदतमीजी की। उसकी पहचान भी छात्र नेता के रूप में होती है।
-डिप्लोमा कोर्स के बंटू यादव ने बैरियर के पास प्रॉक्टोरियल बोर्ड के साथ धक्कामुक्की की। उसके नाम भी आए दिन हंगामे करने के मामले दर्ज है। उसकी भी पहचान छात्र नेता के रूप में होती है।
-छात्र नेता विपिन थापा ने भी अपनी पहचान कॉलेज में मारपीट, गुंडागर्दी से बनाई। पिछले साल ही उसने कैंपस में जमकर मारपीट की थी। उसको जेल तक भेजा गया था।
-2014 में बरेली कॉलेज में छात्रसंघ चुनाव के नाम पर कुछ छात्र नेताओं में मारपीट और आगजनी तक हुई थी। सभी को कॉलेज से निष्कासित किया गया, कुछ का प्रवेश तक प्रतिबंधित किया। उन छात्र नेताओं का दबदबा आज भी कॉलेज में चलता है। 

कुछ शिक्षकों की मिलती है शह
चाहें जो भी संगठन हो उन पर शिक्षकों की खूब मेहरबानी रहती है। सूत्रों की मानें तो रवि गोला और आकाश को एक वरिष्ठ शिक्षक पूरा सपोर्ट करते हैं। सछास के छात्रनेताओं को भी कुछ शिक्षकों का पूरा सपोर्ट मिलता है। उनको खर्चे के लिए पैसे तक दिए जाते हैं। कुछ छात्रनेता बरेली कॉलेज में कार्य करने वाले ठेकेदारों से रंगदारी तक वसूलते हैं।आम छात्र इनसे हमेशा दूर ही नजर आता है। विभागों में होने वाले कार्यक्रमों से भी इन छात्रनेताओं को दूर ही रखा जाता है।

अब जारी नहीं होती बदमाशों की सूची
सन 2000 से पहले बरेली कॉलेज में उन छात्रों की एक सूची जारी होती थी जो बवाल या हंगामा करते थे। इनमें सबसे ज्यादा बवाली छात्र नेताओं को कॉलेज की काली सूची में डाला जाता था। एक बार दो दर्जन छात्रनेताओं के नाम काली सूची में जारी किए गए थे। उसके बाद काली सूची जारी नहीं की गई।

अपना कोई कद नहीं बना पाए
बरेली। सियासत की पौधशाला मानकर कई छात्र कैंपस की नेतागीरी में आ गए लेकिन आगे अपना कोई मुकाम नहीं बना पाए। मुकदमों की वजह से बदनाम जरूर हुए। 
जवाहर लाल: भारतीय जनता पार्टी में काम कर रहे हैं। अध्यक्ष रहते हुए उनके खिलाफ थाना किला में रंगदारी मांगने का मुकदमा लिखा गया। पुलिस ने उन्हें इस मामले में गिरफ्तार करके जेल भी भेजा था।
भूपेंद्र कुर्मी: पंचायत चुनाव में गड़बड़ी करने की शिकायत मिलने पर तत्कालीन एसएसपी धर्मवीर यादव ने उनकी गिरफ्तारी कराई थी। इसके अलावा और भी उन पर कई मामले लिखे गए हैं। 
शिव प्रताप सिंह यादव: यह समाजवादी पार्टी से जुड़े हुए हैं। इनके खिलाफ दलित छात्रों की पुलिस चौकी में घुसकर पिटाई करने, सिटी प्वाइंट में तोड़फोड़ करने समेत सात मामले दर्ज हुए, लेकिन ज्यादातर निपट गए हैं। 
अरविंद पटेल: अंबेडकर छात्र संघ से चुनाव जीते थे। नकटिया में मारपीट के मामले में उनके खिलाफ पुलिस ने मुकदमा लिखकर कार्रवाई की थी। 
सुनील यादव: यह समाजवादी पार्टी के लिए काम कर रहे है। अध्यक्ष चुने जाने से पहले ही इनके खिलाफ नकटिया में सड़क जाम करने के आरोप में मायावती सरकार में सरकारी कार्य में बाधा डालने के आरोप में मुकदमा लिखा गया था।
 डरता है प्रोक्टोरियल बोर्ड और पुलिस वाले भी
 बरेली। छात्र नेता के बहाने बरेली कॉलेज में गुंडई करने माहौल बिगाड़ने वालों से प्रोक्टोरियल बोर्ड भी डरता है। गेट पर ड्यूटी करने वाले पुलिस कर्मियों की भी उन्हें गेट पर रोकने की हिम्मत नहीं होती है। दोनों पुलिस कर्मियों को हड़काकर गेट के अंदर घुसकर हंगामा करते हैं। 

बरेली कॉलेज के प्रोक्टोरियल बोर्ड में करीब 32 प्रवक्ता हैं। कॉलेज में अनुशासन और शांति व्यवस्था बनाए रखना प्रोक्टोरियल बोर्ड की जिम्मेदारी है। परीक्षा के दौरान बोर्ड के सदस्यों की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है। बरेली कॉलेज में इन दिनों परीक्षा चल रही है। पूर्वी और पश्चिमी दोनों ही गेटों से परीक्षा देने वालों की एंट्री होती है। सामान्य दिनों में दोनों गेटों पर दो कर्मचारी और दो सिक्योरिटी वालों की ड्यूटी रहती है। गेटों के अंदर बैरियर बने हैं। यहां तलाशी लेने के लिए प्रोक्टोरियल बोर्ड के दस-दस सदस्यों के अलावा दो सिपाही रहते हैं।  मंगलवार को भी दोनों गेटों पर सुरक्षा  थी। पश्चिमी गेट से रवि गोला और उसका साथी आकाश बाइक लेकर कॉलेज कैंपस में घुसकर तांडव मचाते रहे।  दोनों में से कोई कॉलेज का छात्र नहीं है, इसके बावजूद वह कॉलेज कैंपस में घुस कैसे गए।  प्रोक्टर ने मामले में मुकदमा दर्ज कराने उस वक्त तहरीर दी जब रवि और आकाश के हाथ उनके गिरेबान तक पहुंच गए। 
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