{"_id":"5c6b1357bdec227363551bdf","slug":"81550521175-bareilly-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"अंडर ट्रेनी दरोगा और यूपी 100 के सिपाही की करतूत","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
अंडर ट्रेनी दरोगा और यूपी 100 के सिपाही की करतूत
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बरेली। जम्मू-कश्मीर में बीएसएफ जवानों की शहादत के बाद पूरा देश उनके सम्मान में झुक गया है। जगह-जगह श्रद्धांजलि दी जा रही है। इस बीच अंडर ट्रेनी दरोगा और यूपी 100 के सिपाही की शर्मनाक करतूत ने पूरे पुलिस महकमे को शर्मसार कर दिया है। दोनों ने रिटायर्ड सूबेदार को तस्कर बताकर जंक्शन के पास से उठा ले लिया। थाने ले जाने के बजाय अपने कमरे में बंधक बनाकर रखा और छोड़ने के बदले परिवार से पांच लाख रकम मांगी। कोतवाली में रिपोर्ट के बाद प्रारंभिक जांच में दोषी पाते हुए एसएसपी ने दोनों को निलंबित कर दिया है।
भमोरा के गांव देवचरा निवासी रामकुमार गुहा ने बताया कि वह वर्ष 1994 में बंगलुरू से ऑनरेरी सूबेदार पद से रिटायर हुए थे। शनिवार को तारीख के सिलसिले में कचहरी आए थे। यहां एक बैंक के बाहर खड़े थे। तभी एक व्यक्ति लघुशंका जाने की बात कहते हुए उन्हें थैला थमाकर चला गया। काफी देर तक वह नहीं आया तो रामकुमार से उसे खोजने लगे। तभी पीएसी में व्यवहारिक परीक्षण की ट्रेनिंग ले रहे सिविल पुलिस के दरोगा पवन कुमार और यूपी 100 में तैनात सिपाही अंकित ने उन्हें पकड़ लिया। उन्हें तस्कर बताते हुए थैला में स्मैक लेकर घूमने की बात कही। रुहेलखंड चौकी ले जाने के बहाने बाइक पर बीच में बैठा लिया। काफी देर तक घुमाने के बाद मेेंजोगीनवादा स्थित अपने कमरे पर ले जाकर बंधक बना लिया। यहां से मोबाइल पर रामकुमार के परिवार से संपर्क कर तस्करी में पकड़ने की बात कही। बुजुर्ग सूबेदार को छोड़ने के बदले पांच लाख की फिरौती मांगी। परिवार को जंक्शन रोड पर बुलाकर निजी कंपनी के सिक्योरिटी गार्ड भमोरा के नौरंगपुर निवासी विकास को भेजा। काफी देर तक जब विकास से मोबाइल पर संपर्क नहीं हुआ तो घबराकर रामकुमार को छोड़ दिया। रामकुमार ने एसएसपी से शिकायत की तो उन्होंने इंस्पेक्टर बारादरी कृष्णवीर सिंह से जांच कराई। इसमें सिपाही और दरोगा प्राथमिक रूप से दोषी पाए गए। तब एसएसपी ने दोनों को निलंबित कर दिया। कोतवाली पुलिस ने जंक्शन रोड से गार्ड विकास को गिरफ्तार कर लिया। उसने कोई जानकारी न होने की बात कहते हुए दरोगा के कहने पर रुपये लेने जाने की बात कही लेकिन उसे कोई नहीं मिला।
फिर भी किया खेल..
इस मामले में शिकायत के बाद इंस्पेक्टर बारादरी ने अपनी जांच रिपोर्ट में ट्रेनी दरोगा और सिपाही के नाम स्पष्ट रूप से लिखे हैं। मगर रिपोर्ट दर्ज करने में पुलिस खेल कर गई। फौजी से अज्ञात वर्दीवालों के खिलाफ तहरीर लेकर रिपोर्ट दर्ज करते हुए समझौते की गुंजाइश छोड़ दी गई है।
विज्ञापन
‘बुजुर्ग को अवैध तरीके से पकड़ने और परिवार से रुपये मांगने के आरोप में जांच कराई थी। प्राथमिक जांच में दोषी पाते हुए ट्रेनी दरोगा पवन कुमार और यूपी 100 के सिपाही अंकित कुमार को निलंबित कर दिया गया। उनके खिलाफ रिपोर्ट कराई गई है।’
- मुनिराज जी. एसएसपी
विज्ञापन
भमोरा के गांव देवचरा निवासी रामकुमार गुहा ने बताया कि वह वर्ष 1994 में बंगलुरू से ऑनरेरी सूबेदार पद से रिटायर हुए थे। शनिवार को तारीख के सिलसिले में कचहरी आए थे। यहां एक बैंक के बाहर खड़े थे। तभी एक व्यक्ति लघुशंका जाने की बात कहते हुए उन्हें थैला थमाकर चला गया। काफी देर तक वह नहीं आया तो रामकुमार से उसे खोजने लगे। तभी पीएसी में व्यवहारिक परीक्षण की ट्रेनिंग ले रहे सिविल पुलिस के दरोगा पवन कुमार और यूपी 100 में तैनात सिपाही अंकित ने उन्हें पकड़ लिया। उन्हें तस्कर बताते हुए थैला में स्मैक लेकर घूमने की बात कही। रुहेलखंड चौकी ले जाने के बहाने बाइक पर बीच में बैठा लिया। काफी देर तक घुमाने के बाद मेेंजोगीनवादा स्थित अपने कमरे पर ले जाकर बंधक बना लिया। यहां से मोबाइल पर रामकुमार के परिवार से संपर्क कर तस्करी में पकड़ने की बात कही। बुजुर्ग सूबेदार को छोड़ने के बदले पांच लाख की फिरौती मांगी। परिवार को जंक्शन रोड पर बुलाकर निजी कंपनी के सिक्योरिटी गार्ड भमोरा के नौरंगपुर निवासी विकास को भेजा। काफी देर तक जब विकास से मोबाइल पर संपर्क नहीं हुआ तो घबराकर रामकुमार को छोड़ दिया। रामकुमार ने एसएसपी से शिकायत की तो उन्होंने इंस्पेक्टर बारादरी कृष्णवीर सिंह से जांच कराई। इसमें सिपाही और दरोगा प्राथमिक रूप से दोषी पाए गए। तब एसएसपी ने दोनों को निलंबित कर दिया। कोतवाली पुलिस ने जंक्शन रोड से गार्ड विकास को गिरफ्तार कर लिया। उसने कोई जानकारी न होने की बात कहते हुए दरोगा के कहने पर रुपये लेने जाने की बात कही लेकिन उसे कोई नहीं मिला।
विज्ञापन
फिर भी किया खेल..
इस मामले में शिकायत के बाद इंस्पेक्टर बारादरी ने अपनी जांच रिपोर्ट में ट्रेनी दरोगा और सिपाही के नाम स्पष्ट रूप से लिखे हैं। मगर रिपोर्ट दर्ज करने में पुलिस खेल कर गई। फौजी से अज्ञात वर्दीवालों के खिलाफ तहरीर लेकर रिपोर्ट दर्ज करते हुए समझौते की गुंजाइश छोड़ दी गई है।
विज्ञापन
‘बुजुर्ग को अवैध तरीके से पकड़ने और परिवार से रुपये मांगने के आरोप में जांच कराई थी। प्राथमिक जांच में दोषी पाते हुए ट्रेनी दरोगा पवन कुमार और यूपी 100 के सिपाही अंकित कुमार को निलंबित कर दिया गया। उनके खिलाफ रिपोर्ट कराई गई है।’
- मुनिराज जी. एसएसपी