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सीबीगंज में 70 बीघा गेहूं हो गया राख
बरेली।
Updated Wed, 12 Apr 2017 01:50 AM IST
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70 bigha wheat ashes in CBGanj
- फोटो : बरेली, अमर उजाला
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गेहूं के खेत में अचानक आग लगने से 70 बीघा फसल राख हो गई। चार गांवों के लोग बाल्टियों में पानी भरकर आग बुझाने दौड़े। फायर बिग्रेड को 101 नंबर पर सूचना देने की कोशिश की गई लेकिन फोन नहीं उठा। इस पर ग्रामीणों ने 100 डायल को खबर दी तो पुलिस घटनास्थल पर पहुंची। ग्रामीणों ने पेड़ की टहनियां काटकर और बाल्टियों में पानी लाकर आग पर काबू पाने की कोशिश की। काफी देर बाद फायर ब्रिगेड की दो गाड़ियां मौके पर पहुंची तब तक ग्रामीण आग बुझा चुके थे।
क्षेत्र के गांव बहजुइया जागीर में रहने वाली भूरी पत्नी हमीद के तीन बीघा गेहूं के खेत में कहीं से आग की चिनगारी उठने लगी। धीरे-धीरे आग ने विकराल रूप धारण करना शुरू कर दिया। खेत में आग की लपटें उठती देख बहजुइया जागीर, चंदपुर जोगियान, चंदपुर कजियान, सरनियां आदि गांवों से बड़ी संख्या में महिलाएं और पुरुष हाथों में बाल्टी और पेड़ की टहनियां लेकर खेत की ओर दौड़ पड़े और आग बुझाने की कोशिश की। कुछ लोगों ने फायर ब्रिगेड को खबर देने के लिए 101 नंबर डायल करने की कोशिश की लेकिन नंबर बहुत देर तक नहीं लगा। तब लोगों ने 100 डायल पर आग लगने की सूचना दी। इस पर फायर ब्रिगेड की दो गाड़ियां मौके पर पहुंची। तब तक एक घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद ग्रामीण आग बुझाने में सफल रहे। चंदपुर जोगियान में हरीश के खेत में आग लगने से 12 बीघा गेहूं जलकर राख हो गया। अनिल गोस्वामी की 10 बीघा, लालवन की तीन बीघा, हरीश वन की चार बीघा, गंगावन की 10 बीघा, राजू मौर्य की नौ बीघा समेत 70 बीघा गेहूं जलकर राख गया। इससे पहले भी यहां खेतों में आग लगने से फसल नष्ट हो चुकी है।
एक घंटे में राख हो गई गरीबों की बस्ती
फिर वही हुआ फायर ब्रिगेड की टीम वक्त से नहीं पहुंची और गरीबों की बस्ती एक घंटे में जलकर राख हो गई। बच्चे बाहर खड़े होकर चीख-पुकार मचाते रहे। आसपास के लोग मदद के लिए आए भी, लेकिन कर कुछ भी नहीं पाए। फूंस की झोपड़ियों में लगी आग को बुझाना आसान नहीं था।
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रामपाल के लिए बिलासो देवी बहुत बड़ा सहारा थीं। वह और उनकी पत्नी काम को निकल जाते थे। बूढ़ी मां बच्चों को घर में संभाले रहती थीं। मंगलवार को चली तेज हवा रामपाल ही नहीं पूरी बस्ती के लिए काल बन गई। रामपाल की झोपड़ी में लगी आग ने गरीबों की पूरी बस्ती को जला दिया। फायर ब्रिगेड को बुलाने के लिए कई आसपास के लोग फोन करते रहे, लेकिन फोन रिसीव ही नहीं हुआ। आसपास के लोगों ने बाल्टियों से आग बुझाने की कोशिश की, लेकिन सफलता नहीं मिली।
दस साल से काबिज थे परिवार
ममता आश्रम के पड़ोस की कंथरी गांव की इस करोड़ों की जमीन पर आग से पीड़ित परिवार करीब दस साल से काबिज थे। पूर्व प्रधान ने इन गरीबों को यह जमीन रहने के लिए दी थी। पहले कुछ परिवार आए थे। इसके बाद परिवारों की संख्या बढ़ती गई। यहां बसने के लिए किसी धर्म और जाति की दीवार नहीं थी। जो गरीब आता था, उसे झोपड़ी डालकर रहने की इजाजत मिल जाती थी। वर्तमान प्रधान ने इन कब्जेदारों पर मुकदमा कर दिया था। इसके चलते कई लोगों को जुर्माना भी जमा करना पड़ा है।
गरीबों को पट्टे दिलाने की कोशिश होगी
डीएम सुरेंद्र सिंह ने बताया कि अग्निकांड से 29 परिवारों के 155 सदस्य प्रभावित हुए हैं। पीड़ित के ठहरने की व्यवस्था कर दी गई है। उनके लिए खाने-पीने का इंतजाम करा दिया है। पीड़ितों को पट्टे दिलाकर पुनर्वास कराने की कोशिश जाएगी। आग से जलकर मरने वाली बिलासो देवी के परिवार को चार लाख रुपये की अर्थिक मदद दी जानी है। बाकी परिवारों की भी आर्थिक सहायता होगी।
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क्षेत्र के गांव बहजुइया जागीर में रहने वाली भूरी पत्नी हमीद के तीन बीघा गेहूं के खेत में कहीं से आग की चिनगारी उठने लगी। धीरे-धीरे आग ने विकराल रूप धारण करना शुरू कर दिया। खेत में आग की लपटें उठती देख बहजुइया जागीर, चंदपुर जोगियान, चंदपुर कजियान, सरनियां आदि गांवों से बड़ी संख्या में महिलाएं और पुरुष हाथों में बाल्टी और पेड़ की टहनियां लेकर खेत की ओर दौड़ पड़े और आग बुझाने की कोशिश की। कुछ लोगों ने फायर ब्रिगेड को खबर देने के लिए 101 नंबर डायल करने की कोशिश की लेकिन नंबर बहुत देर तक नहीं लगा। तब लोगों ने 100 डायल पर आग लगने की सूचना दी। इस पर फायर ब्रिगेड की दो गाड़ियां मौके पर पहुंची। तब तक एक घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद ग्रामीण आग बुझाने में सफल रहे। चंदपुर जोगियान में हरीश के खेत में आग लगने से 12 बीघा गेहूं जलकर राख हो गया। अनिल गोस्वामी की 10 बीघा, लालवन की तीन बीघा, हरीश वन की चार बीघा, गंगावन की 10 बीघा, राजू मौर्य की नौ बीघा समेत 70 बीघा गेहूं जलकर राख गया। इससे पहले भी यहां खेतों में आग लगने से फसल नष्ट हो चुकी है।
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एक घंटे में राख हो गई गरीबों की बस्ती
फिर वही हुआ फायर ब्रिगेड की टीम वक्त से नहीं पहुंची और गरीबों की बस्ती एक घंटे में जलकर राख हो गई। बच्चे बाहर खड़े होकर चीख-पुकार मचाते रहे। आसपास के लोग मदद के लिए आए भी, लेकिन कर कुछ भी नहीं पाए। फूंस की झोपड़ियों में लगी आग को बुझाना आसान नहीं था।
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रामपाल के लिए बिलासो देवी बहुत बड़ा सहारा थीं। वह और उनकी पत्नी काम को निकल जाते थे। बूढ़ी मां बच्चों को घर में संभाले रहती थीं। मंगलवार को चली तेज हवा रामपाल ही नहीं पूरी बस्ती के लिए काल बन गई। रामपाल की झोपड़ी में लगी आग ने गरीबों की पूरी बस्ती को जला दिया। फायर ब्रिगेड को बुलाने के लिए कई आसपास के लोग फोन करते रहे, लेकिन फोन रिसीव ही नहीं हुआ। आसपास के लोगों ने बाल्टियों से आग बुझाने की कोशिश की, लेकिन सफलता नहीं मिली।
दस साल से काबिज थे परिवार
ममता आश्रम के पड़ोस की कंथरी गांव की इस करोड़ों की जमीन पर आग से पीड़ित परिवार करीब दस साल से काबिज थे। पूर्व प्रधान ने इन गरीबों को यह जमीन रहने के लिए दी थी। पहले कुछ परिवार आए थे। इसके बाद परिवारों की संख्या बढ़ती गई। यहां बसने के लिए किसी धर्म और जाति की दीवार नहीं थी। जो गरीब आता था, उसे झोपड़ी डालकर रहने की इजाजत मिल जाती थी। वर्तमान प्रधान ने इन कब्जेदारों पर मुकदमा कर दिया था। इसके चलते कई लोगों को जुर्माना भी जमा करना पड़ा है।
गरीबों को पट्टे दिलाने की कोशिश होगी
डीएम सुरेंद्र सिंह ने बताया कि अग्निकांड से 29 परिवारों के 155 सदस्य प्रभावित हुए हैं। पीड़ित के ठहरने की व्यवस्था कर दी गई है। उनके लिए खाने-पीने का इंतजाम करा दिया है। पीड़ितों को पट्टे दिलाकर पुनर्वास कराने की कोशिश जाएगी। आग से जलकर मरने वाली बिलासो देवी के परिवार को चार लाख रुपये की अर्थिक मदद दी जानी है। बाकी परिवारों की भी आर्थिक सहायता होगी।