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पत्नी की हत्या में पति को उम्रकैद, जुर्माना
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पीलीभीत। अपर सत्र न्यायाधीश त्वरित न्यायालय विवेक कुमार ने सत्यवती दहेज हत्याकांड में पति को दोषी पाकर आजीवन कारावास और 25 हजार रुपये अर्थदंड से दंडित किया है। साक्ष्यों के अभाव में न्यायालय ने मृतका के जेठ और ससुर को दोषमुक्त करार दिया है।
थाना सेहरामऊ उत्तरी में चेतराम ने 10 मार्च 2016 को रिपोर्ट दर्ज कराई। रिपोर्ट के अनुसार चेतराम ने अपनी पुत्री सत्यवती का विवाह करीब 11 माह पहले गांव मोहनपुर निवासी रामनिवास से किया था। उन्होंने अपनी हैसियत के अनुसार बेटी की शादी में दहेज दिया था। मगर शादी के बाद पति रामनिवास, जेठ विनोद और ससुर इतवारी दहेज की मांग को लेकर उसकी बेटी सत्यवती को परेशान करने लगे। इसी वजह से 10 मार्च 2016 की सुबह चार बजे पति और ससुराल वालों ने सत्यवती को फांसी के फंदे पर लटका दिया, जिससे उसकी मौत हो गई। पुलिस ने विवेचना के बाद आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल हुआ। मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से मृतका के पिता चेतराम और शव का अंतिम परीक्षण करने वाले डॉ. अनिल कुमार मिश्रा समेत छह गवाहों के बयान दर्ज कराए गए। मामले की सुनवाई के बाद त्वरित न्यायालय के अपर सत्र न्यायाधीश विवेक कुमार ने आरोपी पति को दोषी पाकर आजीवन कारावास और 25 हजार रुपये अर्थदंड से दंडित किया है। साक्ष्य के अभाव में न्यायालय ने मृतका के जेठ और ससुर को दोष मुक्त कर दिया है।
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थाना सेहरामऊ उत्तरी में चेतराम ने 10 मार्च 2016 को रिपोर्ट दर्ज कराई। रिपोर्ट के अनुसार चेतराम ने अपनी पुत्री सत्यवती का विवाह करीब 11 माह पहले गांव मोहनपुर निवासी रामनिवास से किया था। उन्होंने अपनी हैसियत के अनुसार बेटी की शादी में दहेज दिया था। मगर शादी के बाद पति रामनिवास, जेठ विनोद और ससुर इतवारी दहेज की मांग को लेकर उसकी बेटी सत्यवती को परेशान करने लगे। इसी वजह से 10 मार्च 2016 की सुबह चार बजे पति और ससुराल वालों ने सत्यवती को फांसी के फंदे पर लटका दिया, जिससे उसकी मौत हो गई। पुलिस ने विवेचना के बाद आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल हुआ। मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से मृतका के पिता चेतराम और शव का अंतिम परीक्षण करने वाले डॉ. अनिल कुमार मिश्रा समेत छह गवाहों के बयान दर्ज कराए गए। मामले की सुनवाई के बाद त्वरित न्यायालय के अपर सत्र न्यायाधीश विवेक कुमार ने आरोपी पति को दोषी पाकर आजीवन कारावास और 25 हजार रुपये अर्थदंड से दंडित किया है। साक्ष्य के अभाव में न्यायालय ने मृतका के जेठ और ससुर को दोष मुक्त कर दिया है।
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