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आंवला प्रभारी निरीक्षक बताएं क्यों नहीं लिखी पीड़ित की रिपोर्ट
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बरेली। अनुसूचित जाति के एक व्यक्ति के थाने में तहरीर देने के बावजूद रिपोर्ट दर्ज न करने पर कोर्ट ने थाना आंवला के प्रभारी निरीक्षक को तलब किया है। यह आदेश विशेष न्यायाधीश एससीएसटी एक्ट ने किया।
गांव मधुपुरी थाना आंवला के रहने वाले वीरपाल ने कोर्ट में अर्जी देकर कहा कि आठ जून 19 को सुबह नौ बजे उनके इलाके के ही दो अभियुक्तों ने उनका जातिसूचक शब्द कहकर अपमानित किया। तहरीर देने के बाद भी पुलिस ने रिपोर्ट नहीं लिखी। उन्होंने कोर्ट से रिपोर्ट दर्ज कराने की गुहार की है। कोर्ट ने कहा कि एक्ट में प्रावधान है कि अनुसूचित जाति के व्यक्ति के उत्पीड़न मामलों में थानाध्यक्ष रिपोर्ट दर्ज करने के लिए बाध्य है। अगर इसका पालन नहीं किया जाता है तो एक्ट के मुताबिक संबधित पुलिस अधिकारी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करने का प्रावधान है। इसमें एक साल तक की सजा हो सकती है। कोर्ट ने आंवला थानाध्यक्ष को आदेश दिया कि वह इस बारे में 16 जुलाई को आकर अपना स्पष्टीकरण दें कि आवेदक की रिपोर्ट क्यों नहीं लिखी गई। एक्ट के प्रावधानों के तहत क्यों न आपके खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई जाए।
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गांव मधुपुरी थाना आंवला के रहने वाले वीरपाल ने कोर्ट में अर्जी देकर कहा कि आठ जून 19 को सुबह नौ बजे उनके इलाके के ही दो अभियुक्तों ने उनका जातिसूचक शब्द कहकर अपमानित किया। तहरीर देने के बाद भी पुलिस ने रिपोर्ट नहीं लिखी। उन्होंने कोर्ट से रिपोर्ट दर्ज कराने की गुहार की है। कोर्ट ने कहा कि एक्ट में प्रावधान है कि अनुसूचित जाति के व्यक्ति के उत्पीड़न मामलों में थानाध्यक्ष रिपोर्ट दर्ज करने के लिए बाध्य है। अगर इसका पालन नहीं किया जाता है तो एक्ट के मुताबिक संबधित पुलिस अधिकारी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करने का प्रावधान है। इसमें एक साल तक की सजा हो सकती है। कोर्ट ने आंवला थानाध्यक्ष को आदेश दिया कि वह इस बारे में 16 जुलाई को आकर अपना स्पष्टीकरण दें कि आवेदक की रिपोर्ट क्यों नहीं लिखी गई। एक्ट के प्रावधानों के तहत क्यों न आपके खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई जाए।
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