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बरेली कॉलेज में घोटाले- विवेचना छह महीने से चल रही है.. आगे भी चलती रहेगी
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बरेली। बरेली कॉलेज में करोड़ों के घोटाले के बाद पहले तो अज्ञात कर्मचारियों पर रिपोर्ट लिखाकर खेल किया गया, अब क्राइम ब्रांच ने जांच को भी ठंडा कर दिया है। छह महीने विवेचना के बाद भी अभी तक किसी दोषी का नाम विवेचना में नहीं आया है। मंगलवार को कर्मचारी कल्याण सेवा समिति पदाधिकारी एडीजी मिलकर विवेचना ठीक से कराने और घोटालों पर रोक लगाने की मांग की।
पिछले साल नए शैक्षिक सत्र में बाहर किए गए अस्थाई कर्मचारियों ने बरेली कॉलेज में की गई गड़बड़ियों पर सबूतों के साथ कमिश्नर से शिकायत की थी। कुछ छात्र नेताओं ने भी घोटालों के कई साक्ष्य अफसरों को दिए थे। कमिश्नर के निर्देश पर डीएम ने उच्च शिक्षा अधिकारी के नेतृत्व में गठित कमेटी से जांच कराई। जांच में पांच सालों का रिकार्ड खंगाला गया तो करीब दो करोड़ से ज्यादा के काम बिना टेंडर कराने, सेल्फ फाइनेंस विभाग में वित्तीय गड़बड़ियां, बिलों के भुगतान में घपले सामने आए थे। इसके बाद उच्च शिक्षा अधिकारी ने सात दिसंबर 2018 को थाना बारादरी में जिम्मेदारों को बचाते हुए अज्ञात कर्मचारियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। वित्तीय घोटाले की यह विवेचना बाद में क्राइम ब्रांच को भेज दी गई थी।
पिछले छह महीनों में यह विवेचना कुछ खास आगे नहीं बढ़ पाई। घोटाला करने में कौन कर्मचारी या अधिकारी शामिल रहे, उन पर किसका हाथ रहा और कुल कितने का घोटाला हुआ, अभी तक कुछ स्पष्ट नहीं है। विवेचक इंस्पेक्टर सुरेंद्र कटियार ने बताया कि विवेचना जारी है। सहयोग के लिए उच्च शिक्षा विभाग से एक लिपिक की मांग की गई है।
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पिछले साल नए शैक्षिक सत्र में बाहर किए गए अस्थाई कर्मचारियों ने बरेली कॉलेज में की गई गड़बड़ियों पर सबूतों के साथ कमिश्नर से शिकायत की थी। कुछ छात्र नेताओं ने भी घोटालों के कई साक्ष्य अफसरों को दिए थे। कमिश्नर के निर्देश पर डीएम ने उच्च शिक्षा अधिकारी के नेतृत्व में गठित कमेटी से जांच कराई। जांच में पांच सालों का रिकार्ड खंगाला गया तो करीब दो करोड़ से ज्यादा के काम बिना टेंडर कराने, सेल्फ फाइनेंस विभाग में वित्तीय गड़बड़ियां, बिलों के भुगतान में घपले सामने आए थे। इसके बाद उच्च शिक्षा अधिकारी ने सात दिसंबर 2018 को थाना बारादरी में जिम्मेदारों को बचाते हुए अज्ञात कर्मचारियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। वित्तीय घोटाले की यह विवेचना बाद में क्राइम ब्रांच को भेज दी गई थी।
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पिछले छह महीनों में यह विवेचना कुछ खास आगे नहीं बढ़ पाई। घोटाला करने में कौन कर्मचारी या अधिकारी शामिल रहे, उन पर किसका हाथ रहा और कुल कितने का घोटाला हुआ, अभी तक कुछ स्पष्ट नहीं है। विवेचक इंस्पेक्टर सुरेंद्र कटियार ने बताया कि विवेचना जारी है। सहयोग के लिए उच्च शिक्षा विभाग से एक लिपिक की मांग की गई है।
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