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कोर्ट के आदेश पर तुड़वाई 39 साल पुरानी मठिया
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बरेली। कोतवाली की मठ चौकी के बांस मंडी इलाके में अवैध कब्जा करके बनाई गई 39 साल पुरानी मठिया को तुड़वाने के लिए आधे जिले की पुलिस को जुटना पड़ा। एसपी सिटी ने भारी पुलिस फोर्स और पीएसी की मौजूदगी में मठिया तुड़वा दी। अंदेशा था कि बवाल हो सकता है, लेकिन फोर्स देखकर कोई बवाल करने की हिम्मत नहीं जुटा सका।
बांस मंडी निवासी रामकिशोर बुजुर्ग और अशक्त हो चुके हैं। उन्होंने बताया कि 1980 में उन्होंने मुश्ताक अली से करीब दो सौ वर्ग गज भूमि 18 हजार 400 रुपये में खरीदी थी। वह उस वक्त धन की कमी की वजह से निर्माण नहीं करा सके। उन्होंने बताया कि इसी मोहल्ले के हरिश्चंद्र रागी और उनके कुछ अन्य साथियों ने कब्जा करके मठिया बना दी। यहां पूजा-पाठ शुरू कर दिया। पुलिस ने नहीं सुनी तो वर्ष 1982 में उन्होंने अदालत में वाद दायर किया। मामला हाईकोर्ट तक पहुंचा। वहां के आदेश अनुपालन में सिविल जज जूनियर डिवीजन शहर के कोर्ट ने पुलिस को एक ही दिन में मठिया तोड़कर उनका कब्जा दिलाने का आदेश दिया। अदालत का आदेश लेकर गुरुवार दोपहर कोर्ट के अमीन आबिद अली खां कोतवाली पहुंचे। उच्चाधिकारियों ने एसपी सिटी अभिनंदन सिंह को कब्जा हटवाने की जिम्मेदारी सौंपी। चूंकि मठिया तोड़ने को लेकर पहले भी विवाद हो चुका है। इसलिए एसपी सिटी ने अपने अधीन सभी थानों के प्रभारी, फोर्स और पीएसी के साथ ही तीनों सीओ को बुलवा लिया। कोतवाली से दोपहर डेढ़ बजे काफिला बाजार होता हुआ बांसमंडी पहुंचा और घनी आबादी के बीच बनी मठिया तुड़वा दी। रामकिशोर, उनकी पत्नी कमला देवी और बेटे डालचंद ने 39 साल बाद कब्जा हटने पर खुशी जाहिर की। कहा कि देर से ही सही पर उन्हें न्याय मिल ही गया। हालांकि बस्ती के लोग गुस्से में नजर आए, लेकिन फोर्स के सामने कुछ कहने की कोई हिम्मत नहीं जुटा सका। एसपी सिटी ने बताया कि मालिक को कब्जा दिला दिया गया है।
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बांस मंडी निवासी रामकिशोर बुजुर्ग और अशक्त हो चुके हैं। उन्होंने बताया कि 1980 में उन्होंने मुश्ताक अली से करीब दो सौ वर्ग गज भूमि 18 हजार 400 रुपये में खरीदी थी। वह उस वक्त धन की कमी की वजह से निर्माण नहीं करा सके। उन्होंने बताया कि इसी मोहल्ले के हरिश्चंद्र रागी और उनके कुछ अन्य साथियों ने कब्जा करके मठिया बना दी। यहां पूजा-पाठ शुरू कर दिया। पुलिस ने नहीं सुनी तो वर्ष 1982 में उन्होंने अदालत में वाद दायर किया। मामला हाईकोर्ट तक पहुंचा। वहां के आदेश अनुपालन में सिविल जज जूनियर डिवीजन शहर के कोर्ट ने पुलिस को एक ही दिन में मठिया तोड़कर उनका कब्जा दिलाने का आदेश दिया। अदालत का आदेश लेकर गुरुवार दोपहर कोर्ट के अमीन आबिद अली खां कोतवाली पहुंचे। उच्चाधिकारियों ने एसपी सिटी अभिनंदन सिंह को कब्जा हटवाने की जिम्मेदारी सौंपी। चूंकि मठिया तोड़ने को लेकर पहले भी विवाद हो चुका है। इसलिए एसपी सिटी ने अपने अधीन सभी थानों के प्रभारी, फोर्स और पीएसी के साथ ही तीनों सीओ को बुलवा लिया। कोतवाली से दोपहर डेढ़ बजे काफिला बाजार होता हुआ बांसमंडी पहुंचा और घनी आबादी के बीच बनी मठिया तुड़वा दी। रामकिशोर, उनकी पत्नी कमला देवी और बेटे डालचंद ने 39 साल बाद कब्जा हटने पर खुशी जाहिर की। कहा कि देर से ही सही पर उन्हें न्याय मिल ही गया। हालांकि बस्ती के लोग गुस्से में नजर आए, लेकिन फोर्स के सामने कुछ कहने की कोई हिम्मत नहीं जुटा सका। एसपी सिटी ने बताया कि मालिक को कब्जा दिला दिया गया है।
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