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लाखों के गोलमाल की जांच में दो साल से उलझी है पुलिस
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बरेली। सीबीगंज के आसपास के गांव में रहने वाले 23 लोगों ने दूसरे लोगों की खतौनियों पर अपना नाम लिखा और बड़ौदा ग्रामीण बैंक की परसाखेड़ा शाखा से लाखों का लोन लेकर हड़प गए। नवंबर 2019 में यह गोलमाल पकड़ में आया तो शाखा प्रबंधक ने रिपोर्ट दर्ज कराई मगर दो साल से भी ज्यादा लंबी विवेचना के बाद पुलिस सिर्फ पांच लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर सकी है।
वर्ष 2019 में सदर समेत अन्य तहसीलों में राजस्व रिकॉर्ड में हेराफेरी के कई मामले सामने आए थे। फरीदपुर में तहसील में खतौनी खुरचकर दूसरों की जमीन पर अपना नाम दर्ज करा लिया गया और सदर तहसील में भी जमीन में हेराफेरी के मामले सामने आए। इन मामलों में जिम्मेदार कर्मचारियों पर कार्रवाई भी। उसी दौरान बड़ौदा ग्रामीण बैंक की परसाखेड़ा शाखा में हुई आंतरिक जांच में सामने आया कि क्षेत्र में 23 लोगों ने खतौनियों में हेराफेरी करके दूसरों की जगह अपने नाम लिखकर बैंक से लाखों रुपये का लोन ले लिया। यह खेल 13 मार्च 2006 से 20 फरवरी 2017 तक हुआ। कुछ ऐसे भी मामले सामने आए, जिनमें पहले से ही बंधक जमीन की खतौनी में हेराफेरी करके दोबारा लोन ले लिया गया।
इन लोगाें पर हुई थी रिपोर्ट
पूरा मामला सामने पर तत्कालीन शाखा प्रबंधक यजवर्धन सिंधू की तहरीर पर थाना सीबीगंज में धोखाधड़ी कर दस्तावेजों में फर्जीवाड़ा और रकम हड़पने के आरोप में रिपोर्ट दर्ज कराई गई। इसमें भूड़ मढ़ौली के ओमकार, प्र्रेमपाल सिंह, अनेम पाल सिंह, बोहित के बाबूराम, नुक्ता प्रसाद, मढ़ौली के रामसेवक, हरप्रसाद, ठाकुरदास, नौगवां की प्रेमवती, उसका बेटा महेंद्र सिंह, मिलक इमामगंज के विजपाल, छेदालाल, बाबूराम, लाल सिंह, झम्मनलाल, वीरपुर कासमनगर के प्रवेश कुमार, भोलापुर के राजवीर, महेंद्र पाल, घाटमपुर का पीरखान, धंतिया का चंद्रपाल सिंह, रामस्वरूप और नदौसी के मान सिंह को आरोपी बनाया गया था।
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दो बार में लगाई चार्जशीट
सरकारी रकम को हड़पने का मामला होने के बावजूद पुलिस ने इस मामले को गंभीरता से नहीं लिया और विवेचना ठंडे बस्ते में डाल दी गई। कई विवेचक बदलने के बाद इसमें पहली चार्जशीट 30 जून 2021 और दूसरी चार्जशीट तीन नवंबर 2021 को लगाई गई। इसमें भी 23 नामजद लोगों से सिर्फ पांच लोग, बाबूराम, नुक्ता प्रसाद, विजपाल, हरप्रसाद और ठाकुरदास को ही आरोपी बनाया गया है। मामले के विवेचक परसाखेड़ा चौकी इंचार्ज विश्वदेव सिंह का कहना है कि मामले की विवेचना अभी जारी है। कुछ आरोपी हाईकोर्ट से स्टे ले आए हैं, इस वजह से इनके खिलाफ चार्जशीट नहीं लग सकी है। मामले की विवेचना अभी जारी है।
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वर्ष 2019 में सदर समेत अन्य तहसीलों में राजस्व रिकॉर्ड में हेराफेरी के कई मामले सामने आए थे। फरीदपुर में तहसील में खतौनी खुरचकर दूसरों की जमीन पर अपना नाम दर्ज करा लिया गया और सदर तहसील में भी जमीन में हेराफेरी के मामले सामने आए। इन मामलों में जिम्मेदार कर्मचारियों पर कार्रवाई भी। उसी दौरान बड़ौदा ग्रामीण बैंक की परसाखेड़ा शाखा में हुई आंतरिक जांच में सामने आया कि क्षेत्र में 23 लोगों ने खतौनियों में हेराफेरी करके दूसरों की जगह अपने नाम लिखकर बैंक से लाखों रुपये का लोन ले लिया। यह खेल 13 मार्च 2006 से 20 फरवरी 2017 तक हुआ। कुछ ऐसे भी मामले सामने आए, जिनमें पहले से ही बंधक जमीन की खतौनी में हेराफेरी करके दोबारा लोन ले लिया गया।
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इन लोगाें पर हुई थी रिपोर्ट
पूरा मामला सामने पर तत्कालीन शाखा प्रबंधक यजवर्धन सिंधू की तहरीर पर थाना सीबीगंज में धोखाधड़ी कर दस्तावेजों में फर्जीवाड़ा और रकम हड़पने के आरोप में रिपोर्ट दर्ज कराई गई। इसमें भूड़ मढ़ौली के ओमकार, प्र्रेमपाल सिंह, अनेम पाल सिंह, बोहित के बाबूराम, नुक्ता प्रसाद, मढ़ौली के रामसेवक, हरप्रसाद, ठाकुरदास, नौगवां की प्रेमवती, उसका बेटा महेंद्र सिंह, मिलक इमामगंज के विजपाल, छेदालाल, बाबूराम, लाल सिंह, झम्मनलाल, वीरपुर कासमनगर के प्रवेश कुमार, भोलापुर के राजवीर, महेंद्र पाल, घाटमपुर का पीरखान, धंतिया का चंद्रपाल सिंह, रामस्वरूप और नदौसी के मान सिंह को आरोपी बनाया गया था।
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दो बार में लगाई चार्जशीट
सरकारी रकम को हड़पने का मामला होने के बावजूद पुलिस ने इस मामले को गंभीरता से नहीं लिया और विवेचना ठंडे बस्ते में डाल दी गई। कई विवेचक बदलने के बाद इसमें पहली चार्जशीट 30 जून 2021 और दूसरी चार्जशीट तीन नवंबर 2021 को लगाई गई। इसमें भी 23 नामजद लोगों से सिर्फ पांच लोग, बाबूराम, नुक्ता प्रसाद, विजपाल, हरप्रसाद और ठाकुरदास को ही आरोपी बनाया गया है। मामले के विवेचक परसाखेड़ा चौकी इंचार्ज विश्वदेव सिंह का कहना है कि मामले की विवेचना अभी जारी है। कुछ आरोपी हाईकोर्ट से स्टे ले आए हैं, इस वजह से इनके खिलाफ चार्जशीट नहीं लग सकी है। मामले की विवेचना अभी जारी है।