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Bareilly News: मरने और मारने के इरादे से सोया था मन ही मन घुट रहा बालकराम

Thu, 01 Dec 2022 09:00 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Thu, 01 Dec 2022 09:00 AM IST
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crime
गांव रंभोजा में रोते बिलखते मृतक के परिजन। संवाद - फोटो : PILIBHIT
पीलीभीत। सीधे और सरल स्वभाव के बालकराम की मन:स्थिति इतनी क्रूर हो जाएगी। इसका किसी को अंदाजा न था। घटना की वजह भले स्पष्ट न हो पाई हो लेकिन यह तथ्य सच्चाई के नजदीक जान पड़ता है कि वह जान लेने और देने के इरादे से सोया था। क्योंकि रोज वह अलग कमरे में सोता था। मंगलवार को बेटा और बेटी के साथ सोया। उन्हें मौत की नींद सुलाकर खुद भी जान दे दी।
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बालकराम के घर में छोटे-छोटे कई कमरे हैं। मंगलवार की रात में शालिनी, प्रभात और निहाल ने खाना खा लिया तो चारों लोग एक कमरे में आ गए। यहां निहाल और शालिनी एक चारपाई पर सो गए। प्रभात ओर बालकराम दूसरी चारपाई पर। कुछ समय बाद बालकराम ने प्रभात को बरामदे में पड़ी चारपाई पर सोने के लिए भेज दिया। नौवीं कक्षा में पढ़ने वाले प्रभात को पिता के इरादों का पता ही नहीं लगा। सुबह जागा तो घटना का पता चला।
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बालकराम के परिवार वाले घरेलू कलह की बात से इन्कार कर रहे हैं। जबकि गांव में यह बात आम चर्चा में है। पूरी घटना का सबसे अहम पहलू यह है कि पिछले पांच-छह साल से बालकराम की मानसिक स्थिति ठीक नहीं थी। वह अजीबोगरीब हरकतें करता था। परिवार वालों ने कभी उसे डॉक्टर को नहीं दिखाया। हालांकि 2020 में जब बेटे शिवम की शादी हुई उसके बाद उसकी व बेटी शालिनी की हालत कुछ ठीक हुई। परिवार वाले मान रहे थे कि अब दोनों ठीक हो गए हैं। ग्रामीणों की मानें तो बालकराम अंदर ही अंदर घुट रहा था, उसने अपना दर्द कभी बयां नहीं किया। मंगलवार को उसके व पत्नी के बीच क्या हुआ यह तो किसी को नहीं पता। हालात इशारा कर रहे हैं कि वह इतना परेशान हो उठा था कि उसने बच्चों को मारकर खुद भी जान दे दी। संवाद
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अंधविश्वास में डूबा है परिवार, जेल में बंद रामपाल का अनुयायी था बालकराम
पीलीभीत। सरल स्वभाव का बालकराम जेल में बंद हरियाणा का कथित संत रामपाल का अनुयायी था। इसका प्रभाव उसके पूरे परिवार पर है। पुलिस की पूछताछ में उसके बड़े बेटे शिवम ने भी परिवार से जुड़ी अजीबोगरीब बातें बताईं।
इंटर पास शिवम ने उसके पिता पर जब ऊपरी हवा आती थी तो वह कई कई मीटर तक उल्टा चल लेते थे। पेड़ पर चढ़ जाया करते थे। एक बार तो हाथ से ही खेत में गड्ढा खोद डाला। गांव वाले भी इतने गहरे गड्ढे को देखकर हैरत में पड़ गए थे। बहन शालिनी पर भी हवा का असर था। पहले परिवार वालों ने झाड़- फूंक वालों को दिखाया। कोई फायदा न होने पर किसी के बताने पर हरियाणा में रामपाल के आश्रम में गए। इसके बाद तो बालकराम रामपाल का इस कदर भक्त हो गया कि पूजा-पाठ छोड़ दिया। घर पर रामपाल की तस्वीर लगाकर उसकी पूजा करता था। परिजनों का मानना है कि इसके बाद से बालकराम और उसकी लड़की की तबीयत में कुछ सुधार होने लगा। पूरा परिवार मानता था कि यह रामपाल को मानने की वजह से ही हो रहा है।
बुधवार को घटना के बाद जब पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे तो परिजनों ने उनको भी यही बताया। अंधविश्वास में डूबे परिवार वालों ने कभी भी डॉक्टर से इलाज नहीं कराया। पुलिस का कहना है कि पूरा परिवार अंधविश्वास में डूबा था। कभी भी इन लोगों ने डॉक्टर से इलाज नहीं कराया।
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एक ही घर में अलग रहते हैं बड़ा बेेटा-बहू
पीलीभीत। बालकराम का पुस्तैनी मकान रंपुराभोज में है। छह जुुलाई 2020 को उसने बड़े लड़के शिवम की शादी की थी। शादी के बाद सास-बहू के रिश्ते ज्यादा अच्छे नहीं रहे। लिहाजा उसने 13 लाख रुपये में गांव का अपने हिस्से का मकान बेचकर गांव से आधा किलोमीटर पहले मुख्य सड़क किनारे मकान बनाया।
आधा बीघा जमीन पर उसने इस तरह से मकान बनवाया था कि तीनों लड़कों को अलग-अलग कमरों में रखा जा सके। उसमें दुकानें भी बना ली थी। एक दुकान किराये पर दे रखी थी। पर वह अभी चौराहे वाली दुकान से ही काम करता था। पूरा परिवार रहता तो एक ही घर में था लेकिन शिवम और उसकी पत्नी अलग कमरे में रहकर खाना बनाते हैं । बालकराम व तीन बच्चों का खाना अलग बनता था। ग्रामीणों ने बताया कि बालकराम की दुकान अच्छी चलती थी। रुपयों की कोई दिक्कत नहीं थी। गांव में किसी से कोई रंजिश भी नहीं थी।
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चार दिन पहले ही पिता को खरीद कर दी थी मोटरसाइकिल
बड़े बेटे शिवम ने बताया कि चार दिन पहले उसने पिता को बाइक खरीद कर दी थी। उसे क्या पता था कि पिता कभी इस बाइक पर नहीं बैठ पाएंगे। चर्चा यह भी है कि इस बाइक के आने के बाद घर में क्लेश काफी बढ़ गया था। लड़के की बहू इस बात से खुश नहीं थी।
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चेहरा देखने को तरस रहे थे घरवाले
पीलीभीत। घटना के बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने शवों को पोस्टमार्टम पर भेजवाने के लिए पोस्टमार्टम किट मंगवाई। काले रंग की किट इस तरह की बनी हुई थी कि उसमें चेहरा ऊपर से दिख सकता था। पुलिस ने तीनों शवों को पैक किया। इसके बाद बालकराम की पत्नी उसकी बूढ़ी मां व अन्य परिवार वाले शव से लिपट कर रोने लगे। वह एक चेहरा दिखाने की जिद करने लगे। बमुश्किल पुलिस वालों ने किट को खोलकर चेहरा दिखाया। इसके बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। संवाद
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चटनी का नमूना भेजा, घर में रखा था आटा और चावल
पीलीभीत। रात में शालिनी ने आलू गोभी की सब्जी, चावल, चटनी और रोटी बनाई थी। दोनों भाई, पिता व शालिनी ने अलग-अलग खाना खाया। सब्जी रात में ही खत्म हो गई। छानबीन के दौरान फील्ड यूनिट को चटनी मिली। चटनी का नमूना लेकर जांच के लिए थाना पुलिस को दे दिया गया। संवाद
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जेब से मिले हैरान करने वाले चार पन्ने
बालकराम की मौत के बाद उसकी जेब से पुलिस को चार पन्ने मिले हैं। इन पन्नों ने पुलिस को बुरी तरह से उलझा कर रख दिया है। पन्नों पर सुंदर राइटिंग में लिखा है कि बालकराम और शालिनी की मौत के साथ ही मेरा बदला अब पूरा हो गया...।
घटना के बाद सुबह जब पुलिस पहुंची तो बालकराम की जेब से कुछ पन्ने मिले। पन्ने पुलिस ने अपने कब्जे में ले लिए। पहले पन्ने पर सबसे पहले आत्मा का सत्य वचन करके टाइटल लिखा है। पत्र एक महिला की तरफ से लिखा गया है, जिसमें अंधविश्वास संबंधी बातें लिखीं हैं। परिजनों के अनुसार बालकराम पांचवीं तक पढ़ा था। यह पत्र किसी और ने लिखा होगा।

मानसिक बीमारी से ग्रसित हो सकता है बालकराम: डा. पल्लवी
जिला अस्पताल के मन कक्ष की इंचार्ज व साइकोथेरेपिस्ट डा. पल्लवी सक्सेना का कहना है कि घटना के बारे में जानकर ऐसा लगता है कि बालकराम सिजोफ्रेनिया बीमारी से ग्रसित रहा होगा। इस बीमारी में ब्रेन में डोपामिन केमिकल की मात्रा बढ़ जाती है। मरीज को ऐसा लगता है कि वह किसी के वश में है। कोई साया या परछाई उसे दिखने का आभास होता है। मरीज का दिमाग इसी साए के कंट्रोल में रहता है। जबकि यह उसके विचारों द्वारा बनाई गई छवि होती है। ऐसे मरीजों का इलाज संभव है। लोग झाड़-फूंक व तंत्र मंत्र में पढ़ने के बजाए मरीजों को इलाज कराएं। संवाद
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