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Pilibhit: बेटे की खुदकुशी पर अस्पताल दौड़े पिता, सड़क हादसे में उनकी भी मौत, काश ऐसा होता तो बच जाती एक जान

Thu, 20 Oct 2022 12:47 AM IST
बरेली ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, बरेली
अमर उजाला नेटवर्क, बरेली Published by: बरेली ब्यूरो Updated Thu, 20 Oct 2022 12:47 AM IST
सार

घुंघचाई पुलिस चौकी क्षेत्र के झिरकुरिया में मुकेश को पेड़ पर फंदे से लटका देखकर गांव के हरीशंकर ने शोर मचाया। अस्पताल ले जाते समय उसकी मौत हो गई। मजदूरी को गए पिता जगन्नाथ को पता चला तो वह बाइक से अस्पताल की ओर जा रहे थे। जहां उनका भी हादसा हो गया।

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Son commits suicide and father dies in road accident in Pilibhit s Puranpur
मुकेश का फाइल फोटो। - फोटो : PILIBHIT

विस्तार

पीलीभीत के पूरनपुर में घरेलू कलह पिता-पुत्र की मौत की वजह बन गई। गांव झिरकुरिया में मंगलवार शाम हुए विवाद के बाद मुकेश (26) खेत में पेड़ पर फंदे से लटक गया। इलाज के लिए ले जाते समय उसकी मौत हो गई। सूचना पर ग्रामीणों के साथ बाइक से अस्पताल जा रहे पिता जगन्नाथ की भी वाहन की चपेट में आने से जान चली गई।

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घुंघचाई पुलिस चौकी क्षेत्र के झिरकुरिया में मुकेश को पेड़ पर फंदे से लटका देखकर गांव के हरीशंकर ने शोर मचाया। ग्रामीण मुकेश को इलाज के लिए पूरनपुर ले जा रहे थे। रास्ते में उसकी मौत हो गई। मजदूरी को गए पिता जगन्नाथ को पता चला तो वह गांव के हरनरायन और परिवार के गंगाचरन के साथ बाइक से पूरनपुर के लिए निकले। घुंघचाई धर्मकांटे के पास उनकी बाइक वाहन की चपेट में आ गई। हादसे में घायल तीनों बाइक सवारों को सीएचसी लाया गया। यहां से जिला अस्पताल ले जाते समय जगन्नाथ की मौत हो गई। पुलिस ने जगन्नाथ के बड़े पुत्र दयाराम की तहरीर पर अज्ञात वाहन चालक पर रिपोर्ट दर्ज की है। संवाद
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काश! रास्ते में बेटे का शव देख लेते तो बच जाते जगन्नाथ
बेटे के फंदे से लटकने की खबर पर पिता जगन्नाथ उसे को देखने के लिए बाइक से अस्पताल की तरफ जा रहे थे। रास्ते में सामने की ओर से बेटे का शव लेकर लोग घर लौट रहे थे। पर वह देख न सके। जल्दी में आगे बढ़ गए और कुछ दूर पर ही हादसे का शिकार हो गए। काश! वह रास्ते में ही शव देख पाते तो एक जान बच जाती। जगन्नाथ के पुत्र दयाराम ने बताया कि फंदे से उतारने के बाद मुकेश को घुंघचाई के एक प्राइवेट चिकित्सक के यहां ले जाया गया।
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चिकित्सक ने उसे मृत घोषित कर दिया। तब उसका छोटा भाई ब्रजेश और गांव के कुछ लोग मुकेश का शव लेकर घर चल दिए। सभी बाइक से थे। मुकेश का शव घर ले जा रहे लोग बाइक से घुंघचाई की ओर जा रहे पिता जगन्नाथ को नहीं देख सके। पिता भी मुकेश और अन्य लोगों को नहीं देख सके। वह जल्दी में आगे बढ़ गए। अगर पिता या कोई भी ग्रामीण रास्ते में एक-दूसरे को देख लेते तो हादसा नहीं होता। पिता जी शव के साथ घर लौट आते। लेकिन कुदरत को शायद कुछ और ही मंजूर था।


गांव झिरकुरिया में जगन्नाथ पत्नी प्रेमवती और पुत्र दयाराम, प्रेमपाल, नरेश, मुकेश, बृजेश और एक पुत्री के साथ रहते थे। एक पुत्री की शादी हो चुकी है। दूसरी की शादी के लिए लड़के की तलाश की जा रही थी। जगन्नाथ के पास ढाई बीघा जमीन है। आर्थिक स्थिति ठीक न होने के कारण घर के सभी सदस्य मजदूरी करते हैैं। जगन्नाथ मंगलवार को मजदूरी करने गए थे। बेटे दयाराम ने बताया कि भाई मुकेश घर में अलग रहता था। कभी किसी में कोई विवाद नहीं हुआ। वह कब घर से निकल गया। इसकी किसी को जानकारी तक नहीं हुई। उसे ढूंढा जा रहा था तभी वह खेत में पेड़ पर लटका मिला।

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