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मिलाई करने पहुंचा बेटा तो पता चला पिता नहीं रहे
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जेल में हो गई मौत.. परिजनों को सूचना तक नहीं
तीन महीने बाद होनी थी बुजुर्ग की रिहाई
बरेली/दुनका। जिला जेल में कैद शेरगढ़ थाने के तुलाराम (83) की शनिवार रात मौत हो गई। इसके बावजूद जेल प्रशासन ने उनके परिजनों को सूचना तक नहीं दी। रविवार को बेटा मिलाई करने पहुंचा तो पता चला कि पिता नहीं रहे। बुजुर्ग तुलाराम की तीन महीने बाद रिहाई होनी थी। परिजनों का कहना है कि ठंड के कारण उनकी मौत हुई है, जबकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में लिवर की बीमारी और हार्ट अटैक को मौत की वजह बताया गया है।
शेरगढ़ थाने के गांव बंजरिया जागीर निवासी 83 वर्षीय तुलाराम की शनिवार रात इलाज के दौरान जिला अस्पताल में मौत हो गई। उसे शनिवार दिन में गंभीर अवस्था में भर्ती कराया गया था। पोस्टमार्टम हाउस पर मृतक के पुत्र हीरालाल ने बताया कि सन 1994 में पिता का बसई के साधुराम नेता से किसी बात पर झगड़ा हो गया था। साधुराम ने अपनी नाक-कान काटने में रिपोर्ट करा दी और लंबे समय बाद अदालत ने पिता को एक साल की सजा सुनाई थी। एक बार जमानत हो गई थी पर फाइल दोबारा खुलने पर शेष बची तीन महीने की सजा पूरी कराने को दोबारा गिरफ्तारी की गई थी। परिजनों ने बताया कि पिता को जिला अस्पताल में भर्ती कराने या उनकी मौत की जेल प्रशासन ने रविवार दोपहर तक कोई जानकारी नहीं दी। वह लोग जेल में पिता से मुलाकात करने आए तो इसका पता लगा।
‘ऐसा संभव नहीं है कि किसी कैदी की मौत के बाद उसके परिवार को सूचना न दी जाए। सूचना जरूर दी गई होगी। फिर भी यदि किसी स्तर पर चूक हुई है ये दिखवाया जाएगा।’
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- यूपी मिश्रा, अधीक्षक जिला जेल
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तीन महीने बाद होनी थी बुजुर्ग की रिहाई
बरेली/दुनका। जिला जेल में कैद शेरगढ़ थाने के तुलाराम (83) की शनिवार रात मौत हो गई। इसके बावजूद जेल प्रशासन ने उनके परिजनों को सूचना तक नहीं दी। रविवार को बेटा मिलाई करने पहुंचा तो पता चला कि पिता नहीं रहे। बुजुर्ग तुलाराम की तीन महीने बाद रिहाई होनी थी। परिजनों का कहना है कि ठंड के कारण उनकी मौत हुई है, जबकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में लिवर की बीमारी और हार्ट अटैक को मौत की वजह बताया गया है।
शेरगढ़ थाने के गांव बंजरिया जागीर निवासी 83 वर्षीय तुलाराम की शनिवार रात इलाज के दौरान जिला अस्पताल में मौत हो गई। उसे शनिवार दिन में गंभीर अवस्था में भर्ती कराया गया था। पोस्टमार्टम हाउस पर मृतक के पुत्र हीरालाल ने बताया कि सन 1994 में पिता का बसई के साधुराम नेता से किसी बात पर झगड़ा हो गया था। साधुराम ने अपनी नाक-कान काटने में रिपोर्ट करा दी और लंबे समय बाद अदालत ने पिता को एक साल की सजा सुनाई थी। एक बार जमानत हो गई थी पर फाइल दोबारा खुलने पर शेष बची तीन महीने की सजा पूरी कराने को दोबारा गिरफ्तारी की गई थी। परिजनों ने बताया कि पिता को जिला अस्पताल में भर्ती कराने या उनकी मौत की जेल प्रशासन ने रविवार दोपहर तक कोई जानकारी नहीं दी। वह लोग जेल में पिता से मुलाकात करने आए तो इसका पता लगा।
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‘ऐसा संभव नहीं है कि किसी कैदी की मौत के बाद उसके परिवार को सूचना न दी जाए। सूचना जरूर दी गई होगी। फिर भी यदि किसी स्तर पर चूक हुई है ये दिखवाया जाएगा।’
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- यूपी मिश्रा, अधीक्षक जिला जेल