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विश्वविद्यालय बुलाया और खुद को प्रोफेसर बताकर ठग लिए दो लाख
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बरेली। खुद को प्रोफेसर बताते हुए एक ठग ने उत्तराखंड के रुद्रपुर के कबाड़ कारोबारी को रुहेलखंड विश्वविद्यालय कैंपस में बुलाया और पांच लाख का कबाड़ चार लाख में दिलाने का झांसा देकर उससे दो लाख रुपये एडवांस लेकर फरार हो गया। ठगी का शिकार हुआ कबाड़ कारोबारी अब कई दिन से नकली प्रोफेसर की तलाश में विश्वविद्यालय के चक्कर काट रहा है।
रुद्रपुर के कबाड़ व्यापारी इजहार खां की यहां के एक व्यक्ति से जानपहचान है। ठग ने सलीम के सहारे ही व्यापारी से फोन पर बात की और विश्वविद्यालय में जनरेटर , बैटरी आदि का पांच लाख का कबाड़ चार लाख में दिलाने को कहा। शनिवार को व्यापारी विश्वविद्यालय कैंपस आया। फर्जी प्रोफेसर बने व्यक्ति ने अपना नाम अशरफ खां बताया। उसने पुस्तकालय में उसे मिलने के लिए बुलाया और यहां से गेस्ट हाउस लेकर गया। व्यापारी को बाहर खड़ा किया। कुछ देर बाद बाहर आया और दो लाख रुपये नकद और कागज मांगे। व्यापारी ने उसे पैसे दिए। इसके बाद वह चला गया। व्यापारी उसका इंतजार करता रहा, लेकिन वह नहीं लौटा। शक होने पर पूछताछ की तो हकीकत सामने आ गई। वह प्रशासनिक भवन गया, लेकिन माह का द्वितीय शनिवार होने के कारण कोई अधिकारी नहीं मिला। वह मंगलवार विश्वविद्यालय कैंपस में फिर पहुंचा, लेकिन कोई अधिकारी न होने के कारण शिकायत नहीं दे पाया। अब वह उस फर्जी प्रोफेसर की तलाश में विश्वविद्यालय के चक्कर काट रहा है।
‘मैं लखनऊ एक मीटिंग में आई हूं। इस तरह कोई मामला संज्ञान में नहीं है। अगर शिकायत मिलती है तो जांच कराई जाएगी। अगर कोई यूनिवर्सिटी का व्यक्ति इसमें शामिल है तो उसपर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।’
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- डॉ. सुनीता पांडेय, कुलसचिव
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रुद्रपुर के कबाड़ व्यापारी इजहार खां की यहां के एक व्यक्ति से जानपहचान है। ठग ने सलीम के सहारे ही व्यापारी से फोन पर बात की और विश्वविद्यालय में जनरेटर , बैटरी आदि का पांच लाख का कबाड़ चार लाख में दिलाने को कहा। शनिवार को व्यापारी विश्वविद्यालय कैंपस आया। फर्जी प्रोफेसर बने व्यक्ति ने अपना नाम अशरफ खां बताया। उसने पुस्तकालय में उसे मिलने के लिए बुलाया और यहां से गेस्ट हाउस लेकर गया। व्यापारी को बाहर खड़ा किया। कुछ देर बाद बाहर आया और दो लाख रुपये नकद और कागज मांगे। व्यापारी ने उसे पैसे दिए। इसके बाद वह चला गया। व्यापारी उसका इंतजार करता रहा, लेकिन वह नहीं लौटा। शक होने पर पूछताछ की तो हकीकत सामने आ गई। वह प्रशासनिक भवन गया, लेकिन माह का द्वितीय शनिवार होने के कारण कोई अधिकारी नहीं मिला। वह मंगलवार विश्वविद्यालय कैंपस में फिर पहुंचा, लेकिन कोई अधिकारी न होने के कारण शिकायत नहीं दे पाया। अब वह उस फर्जी प्रोफेसर की तलाश में विश्वविद्यालय के चक्कर काट रहा है।
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‘मैं लखनऊ एक मीटिंग में आई हूं। इस तरह कोई मामला संज्ञान में नहीं है। अगर शिकायत मिलती है तो जांच कराई जाएगी। अगर कोई यूनिवर्सिटी का व्यक्ति इसमें शामिल है तो उसपर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।’
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- डॉ. सुनीता पांडेय, कुलसचिव