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पिता के साथ बिहार चला गया असलम
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बरेली। बिहार निवासी मानसिक मंद युवक को उसके पिता बीती रात आकर अपने साथ ले गए। जासूसी के शक में युवक ने लंबी पूछताछ का सामना किया था। हालांकि किसी तरह की संलिप्तता न मिलने पर उसे छोड़ दिया गया।
सोमवार सुबह मिलिट्री इंटेलिजेंस ने एक सूचना के बाद कैंट के सैन्य क्षेत्र की एक मजार से 23 वर्षीय युवक को पकड़ा था। उसकी गतिविधियां संदिग्ध थीं और वह टीम के सवालों के जवाब भी नहीं दे पा रहा था। टीम उसे अपने दफ्तर ले गई। वहां उससे यहां करीब सात घंटे पूछताछ की गई। उसने अपना नाम असलम और पिता का नाम तैयब अंसारी बताया। वह बिहार के सीतामढ़ी जिले के थाना रुनी सैदपुर के वार्ड नंबर दो समुअल शाहपुर का निवासी था। सीसीटीवी फुटेज व अन्य जांच में उस पर कोई आरोप साबित नहीं हुआ। पता लगा कि वह अपने एक दोस्त के साथ आला हजरत दरगाह पर सिर झुकाने रविवार रात बरेली जंक्शन आया था। कल वह भटक गया। असलम की बातें ठीक निकलीं तो इंटेलिजेंस ने परिवार से संपर्क साधा। कैंट इंस्पेक्टर अवनीश कुमार ने सूचना दी तो सोमवार देर रात असलम के पिता तैयब अंसारी थाने पहुंचे और अपनी सुपुर्दगी में बेटे को ले गए।
बच्चा चोरी में भी पिट रहे मानसिक मंद
बरेली। मानसिक मंद लोगों पर इन दिनों बड़ी मुसीबत आई हुई है। कभी बच्चा चोर गैंग के सदस्य होने के शक में भीड़ उन्हें पीट देती है तो कभी संदिग्ध के तौर पर सेना और पुलिस की सख्त पूछताछ से वे परेशान होते हैं। असलम की कहानी भी ऐसी ही निकली। सेना ने उसके हुलिये और सही जवाब न दे पाने की वजह से ही इतने लंबे समय तक पूछताछ की। अगर वह सामान्य व्यक्ति होता और तत्काल ही अपने बारे में सही जानकारी दे देता तो उसे परेशानी नहीं झेलनी पड़ती। असलम के पिता का कहना था कि बेटे की मानसिक स्थिति की वजह से वह पहले भी परेशानी में पड़ चुका है। उसका काफी इलाज भी कराया गया पर पूरी तरह सही नहीं हो सका है।
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सोमवार सुबह मिलिट्री इंटेलिजेंस ने एक सूचना के बाद कैंट के सैन्य क्षेत्र की एक मजार से 23 वर्षीय युवक को पकड़ा था। उसकी गतिविधियां संदिग्ध थीं और वह टीम के सवालों के जवाब भी नहीं दे पा रहा था। टीम उसे अपने दफ्तर ले गई। वहां उससे यहां करीब सात घंटे पूछताछ की गई। उसने अपना नाम असलम और पिता का नाम तैयब अंसारी बताया। वह बिहार के सीतामढ़ी जिले के थाना रुनी सैदपुर के वार्ड नंबर दो समुअल शाहपुर का निवासी था। सीसीटीवी फुटेज व अन्य जांच में उस पर कोई आरोप साबित नहीं हुआ। पता लगा कि वह अपने एक दोस्त के साथ आला हजरत दरगाह पर सिर झुकाने रविवार रात बरेली जंक्शन आया था। कल वह भटक गया। असलम की बातें ठीक निकलीं तो इंटेलिजेंस ने परिवार से संपर्क साधा। कैंट इंस्पेक्टर अवनीश कुमार ने सूचना दी तो सोमवार देर रात असलम के पिता तैयब अंसारी थाने पहुंचे और अपनी सुपुर्दगी में बेटे को ले गए।
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बच्चा चोरी में भी पिट रहे मानसिक मंद
बरेली। मानसिक मंद लोगों पर इन दिनों बड़ी मुसीबत आई हुई है। कभी बच्चा चोर गैंग के सदस्य होने के शक में भीड़ उन्हें पीट देती है तो कभी संदिग्ध के तौर पर सेना और पुलिस की सख्त पूछताछ से वे परेशान होते हैं। असलम की कहानी भी ऐसी ही निकली। सेना ने उसके हुलिये और सही जवाब न दे पाने की वजह से ही इतने लंबे समय तक पूछताछ की। अगर वह सामान्य व्यक्ति होता और तत्काल ही अपने बारे में सही जानकारी दे देता तो उसे परेशानी नहीं झेलनी पड़ती। असलम के पिता का कहना था कि बेटे की मानसिक स्थिति की वजह से वह पहले भी परेशानी में पड़ चुका है। उसका काफी इलाज भी कराया गया पर पूरी तरह सही नहीं हो सका है।
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