{"_id":"5d6d85c18ebc3e016440645e","slug":"crime-bareilly-news-bly3746515151","type":"story","status":"publish","title_hn":"चौंके कप्तान! अनाज घोटाले की तकनीकी जांच में पुलिस का क्या काम","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
चौंके कप्तान! अनाज घोटाले की तकनीकी जांच में पुलिस का क्या काम
विज्ञापन
बरेली। अफसरों के जिक्र करने और फिर जिक्र की ही फिक्र करने से लटके तमाम गड़बड़-घोटालों के साथ आंवला सहकारी संघ में हुआ एक और घोटाला लटक गया है। इस घोटाले की शिकायत संघ के अध्यक्ष ने ही डीएम से की थी। सचिव पर किसानों के शोषण और भुगतानों में गड़बड़ी कर कम से कम 20 लाख का गबन का आरोप था, लेकिन डीएम के स्तर से इस मामले की पुलिस से जांच कराने के लिए एसएसपी को लिख दिया गया तो मामला जहां के तहां अटक गया। एसएसपी ने यह कहते हुए डीएम को वापस चिट्ठी भेज दी कि इसमें पुलिस के स्तर से जांच करने का कोई मामला नहीं बनता लिहाजा इसकी जांच टेक्निकल ऑडिट कमेटी से कराई जाए।
सहकारी संघ आंवला के अध्यक्ष ओमपाल सिंह ने सचिव शिव कुमार को इस गबन का आरोपी बताया था। उन्होंने डीएम को लिखी चिट्ठी में आरोप लगाया था कि गबन को छिपाने के लिए सचिव की ओर से संचालक मंडल की बैठक भी नहीं बुलाई जा रही है। शिकायत में कहा गया था कि सहकारी संघ में भ्रष्टाचार के माहौल के कारण गेहूं की तौल करते समय सोसाइटी का कर्मचारी प्रति क्विंटल गेहूं के साथ दो किलो की अलग वसूली करता है। यह गड़बड़ी वह खुद पकड़ चुके हैं। इसके अलावा सचिव बाजार से 11 रुपये प्रति कट्टे की दर से बारदाना खरीदकर किसानों को 18 रुपये का कट्टा बेचकर गलत तरह से मुनाफा कमाया है। किसानों को इसकी कोई रसीद भी नहीं दी गई। चीनी-केरोसिन और गेहूं की दुकानों का संचालन भी भ्रष्ट तरह से किया जा रहा है।
अध्यक्ष ने अपनी शिकायत में डीएम से इस घोटाले की अपने स्तर से जांच कराने का आग्रह किया था लेकिन डीएम की ओर से इसकी जांच पुलिस अधिकारियों से कराने के लिए एसएसपी को चिट्ठी लिख दी गई। हाल ही में एसएसपी की ओर से डीएम को जवाबी चिट्ठी लिखी गई है कि यह मामला पुलिस की जांच के दायरे में नहीं आता। लिहाजा इसकी जांच टीएसी से कराना ठीक रहेगा। इन चिट्ठियों के आदान-प्रदान के बाद घोटाले की जांच फिलहाल लटक गई है।
विज्ञापन
सहकारी संघ की शिकायत की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी। इसमें संघ में अगर गबन हुआ है तो इसमें शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई के साथ एफआईआर भी दर्ज होगी। -वीरेंद्र कुमार सिंह, डीएम
विज्ञापन
सहकारी संघ आंवला के अध्यक्ष ओमपाल सिंह ने सचिव शिव कुमार को इस गबन का आरोपी बताया था। उन्होंने डीएम को लिखी चिट्ठी में आरोप लगाया था कि गबन को छिपाने के लिए सचिव की ओर से संचालक मंडल की बैठक भी नहीं बुलाई जा रही है। शिकायत में कहा गया था कि सहकारी संघ में भ्रष्टाचार के माहौल के कारण गेहूं की तौल करते समय सोसाइटी का कर्मचारी प्रति क्विंटल गेहूं के साथ दो किलो की अलग वसूली करता है। यह गड़बड़ी वह खुद पकड़ चुके हैं। इसके अलावा सचिव बाजार से 11 रुपये प्रति कट्टे की दर से बारदाना खरीदकर किसानों को 18 रुपये का कट्टा बेचकर गलत तरह से मुनाफा कमाया है। किसानों को इसकी कोई रसीद भी नहीं दी गई। चीनी-केरोसिन और गेहूं की दुकानों का संचालन भी भ्रष्ट तरह से किया जा रहा है।
विज्ञापन
अध्यक्ष ने अपनी शिकायत में डीएम से इस घोटाले की अपने स्तर से जांच कराने का आग्रह किया था लेकिन डीएम की ओर से इसकी जांच पुलिस अधिकारियों से कराने के लिए एसएसपी को चिट्ठी लिख दी गई। हाल ही में एसएसपी की ओर से डीएम को जवाबी चिट्ठी लिखी गई है कि यह मामला पुलिस की जांच के दायरे में नहीं आता। लिहाजा इसकी जांच टीएसी से कराना ठीक रहेगा। इन चिट्ठियों के आदान-प्रदान के बाद घोटाले की जांच फिलहाल लटक गई है।
विज्ञापन
सहकारी संघ की शिकायत की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी। इसमें संघ में अगर गबन हुआ है तो इसमें शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई के साथ एफआईआर भी दर्ज होगी। -वीरेंद्र कुमार सिंह, डीएम