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छात्र को उठा ले गए, आंवला सांसद की कोठी के पास पीटा
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बरेली। कैंट थाना क्षेत्र में एक छात्र को उठाकर आंवला सांसद धर्मेंद्र कश्यप की कोठी के पास ले जाकर जमकर पीटा गया। शोर सुनकर आवास से निकले सांसद ने छात्र को बचाया और पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने उसे भर्ती कराकर हमलावरों की तलाश शुरू कर दी है। बताया जा रहा है कि जानलेवा हमले का आरोप खारिज होने के बाद इस तरह का हमला किया गया।
झील गौंटिया निवासी यशवीर 11 वीं का छात्र है। रविवार रात 11 बजे वह कांधरपुर चौराहे की दुकान पर समोसे खरीदने आया था। बताते हैं कि यहां आए पांच-छह लड़कों ने उसे पकड़ा और खींचते हुए सांसद धर्मेंद्र कश्यप की कोठी के पास ले गए। वहां एक जगह उसे गिराकर लाठी डंडों से जमकर पीटा। छात्र की चीखें सांसद ने सुनीं जो थोड़ी देर पहले ही अपने घर पहुंचे थे। सांसद अपने सुरक्षाकर्मियों और समर्थकों के साथ बाहर निकले और हमलावरों को दौड़ा लिया। आरोपी फरार हो गए तो सांसद ने यशवीर को उठाकर अस्पताल भिजवाया। उन्हीं ने कैंट इंस्पेक्टर अवनीश कुमार को सूचना दी। इंस्पेक्टर पहुंचे तो अस्पताल में डॉक्टर ने कागजात कंपलीट न होने की बात कहकर मेडिकल परीक्षण से मना किया। तब इंस्पेक्टर ने इलाज शुरू कराकर वहीं फौरी कागजात बनवाए।
यशवीर कुछ बताने की हालत में नहीं था तो परिवार के लोग कुछ लोगों पर रंजिश निकालने का आरोप लगा रहे थे। इंस्पेक्टर ने बताया कि एक ऑटो ड्राइवर ने चार दिन पहले यशवीर समेत कुछ लोगों के खिलाफ गोली से फायरिंग कर जान से मारने की कोशिश की रिपोर्ट कराई थी। उन्होंने पीड़ित का मेडिकल परीक्षण कराया तो उसमें गोली लगने की पुष्टि ही नहीं हुई। केवल कील चुभने जितना घाव था। इसी आधार पर रिपोर्ट से धारा 307 हटाकर उसे एनसीआर बना दिया गया। सर्विलांस की जांच में भी यशवीर के मौके पर होने की पुष्टि नहीं हुई। इससे यशवीर का साफ बचना तय था। शायद इसकी भनक दूसरे पक्ष को लग गई और उन्होंने यशवीर पर हमला किया। बताया कि तहरीर के मुताबिक रिपोर्ट लिखी जाएगी।
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झील गौंटिया निवासी यशवीर 11 वीं का छात्र है। रविवार रात 11 बजे वह कांधरपुर चौराहे की दुकान पर समोसे खरीदने आया था। बताते हैं कि यहां आए पांच-छह लड़कों ने उसे पकड़ा और खींचते हुए सांसद धर्मेंद्र कश्यप की कोठी के पास ले गए। वहां एक जगह उसे गिराकर लाठी डंडों से जमकर पीटा। छात्र की चीखें सांसद ने सुनीं जो थोड़ी देर पहले ही अपने घर पहुंचे थे। सांसद अपने सुरक्षाकर्मियों और समर्थकों के साथ बाहर निकले और हमलावरों को दौड़ा लिया। आरोपी फरार हो गए तो सांसद ने यशवीर को उठाकर अस्पताल भिजवाया। उन्हीं ने कैंट इंस्पेक्टर अवनीश कुमार को सूचना दी। इंस्पेक्टर पहुंचे तो अस्पताल में डॉक्टर ने कागजात कंपलीट न होने की बात कहकर मेडिकल परीक्षण से मना किया। तब इंस्पेक्टर ने इलाज शुरू कराकर वहीं फौरी कागजात बनवाए।
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यशवीर कुछ बताने की हालत में नहीं था तो परिवार के लोग कुछ लोगों पर रंजिश निकालने का आरोप लगा रहे थे। इंस्पेक्टर ने बताया कि एक ऑटो ड्राइवर ने चार दिन पहले यशवीर समेत कुछ लोगों के खिलाफ गोली से फायरिंग कर जान से मारने की कोशिश की रिपोर्ट कराई थी। उन्होंने पीड़ित का मेडिकल परीक्षण कराया तो उसमें गोली लगने की पुष्टि ही नहीं हुई। केवल कील चुभने जितना घाव था। इसी आधार पर रिपोर्ट से धारा 307 हटाकर उसे एनसीआर बना दिया गया। सर्विलांस की जांच में भी यशवीर के मौके पर होने की पुष्टि नहीं हुई। इससे यशवीर का साफ बचना तय था। शायद इसकी भनक दूसरे पक्ष को लग गई और उन्होंने यशवीर पर हमला किया। बताया कि तहरीर के मुताबिक रिपोर्ट लिखी जाएगी।
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