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Bareilly News: नई पानी की टंकी से जलापूर्ति करने पर कोर्ट ने लगाई रोक
Sat, 26 Aug 2023 01:52 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
Updated Sat, 26 Aug 2023 01:52 AM IST
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बरेली। राजेंद्र नगर बांके बिहारी मंदिर के पीछे नई बनाई गई पानी की टंकी से जलापूर्ति पर अदालत ने रोक लगा दी है। कोर्ट ने कहा कि जब तक पुरानी पानी की टंकी से जलापूर्ति की जा रही है अथवा इस बारे में कोर्ट में चल रहे मुकदमे का निस्तारण होने तक यह आदेश लागू रहेगा। आदेश अपर सत्र न्यायाधीश ज्ञानेंद्र त्रिपाठी की अदालत ने किया।
राजेंद्र नगर के जगतपाल सिंह ने वकील नरेंद्र मोहन के जरिये कोर्ट में अपील दायर कर उन्होंने नगर आयुक्त, उप्र जल निगम व यूपी जल निगम के अस्सिटेंट इंजीनियर संजय कुमार को पक्षकार बनाते हुए कहा कि बांके बिहारी मंदिर के पीछे पानी की टंकी इस तरह से बन रही है कि उसका डोम उनके आवास पर आ जाएगा। इस टंकी से वादी के मकान की दूरी 30 मीटर है। टंकी की नींव उसके मकान की दीवार से सटी हुई है। इससे ओवरहेड टैंक का फैलाव उसके मकान के ऊपर आ जाएगा।
विपक्षीगण ने इस दो हजार लीटर क्षमता की टंकी का निर्माण केंद्र व राज्य सरकार के निर्धारित सुरक्षा मानकों को ताक पर रखकर किया है। टंकी से ओवरफ्लो होकर पानी उनकी छत पर गिर रहा है। भविष्य में अगर वादी अपने आवास पर कुछ और मंजिल बनाना चाहे तो टैंक के डोम के कारण ऐसा नहीं कर सकेगा। विपक्ष के अधिवक्ता ने पुरानी टंकी के जर्जर होने और स्थानीय जनता की पेयजल की जरूरतों के मद्देनजर टंकी का निर्माण करने की बात कही।
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कोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि पहले से बनी पानी की टंकी की क्रियाशीलता को देखते हुए जब तक वह पानी की आपूर्ति करने के लायक है अथवा इस मुकदमे के निपटारे तक नई टंकी में विपक्षीगण न तो पानी भरेंगे न ही उससे जलापूर्ति करेंगे। कोर्ट ने निचली अदालत को भी निर्देश दिया कि नई पानी की टंकी के बारे में न्यायालय अमीन अथवा जिला प्रशासन या अन्य किसी विशेषज्ञ संस्था से जांच कराकर उचित फैसला लें।
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राजेंद्र नगर के जगतपाल सिंह ने वकील नरेंद्र मोहन के जरिये कोर्ट में अपील दायर कर उन्होंने नगर आयुक्त, उप्र जल निगम व यूपी जल निगम के अस्सिटेंट इंजीनियर संजय कुमार को पक्षकार बनाते हुए कहा कि बांके बिहारी मंदिर के पीछे पानी की टंकी इस तरह से बन रही है कि उसका डोम उनके आवास पर आ जाएगा। इस टंकी से वादी के मकान की दूरी 30 मीटर है। टंकी की नींव उसके मकान की दीवार से सटी हुई है। इससे ओवरहेड टैंक का फैलाव उसके मकान के ऊपर आ जाएगा।
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विपक्षीगण ने इस दो हजार लीटर क्षमता की टंकी का निर्माण केंद्र व राज्य सरकार के निर्धारित सुरक्षा मानकों को ताक पर रखकर किया है। टंकी से ओवरफ्लो होकर पानी उनकी छत पर गिर रहा है। भविष्य में अगर वादी अपने आवास पर कुछ और मंजिल बनाना चाहे तो टैंक के डोम के कारण ऐसा नहीं कर सकेगा। विपक्ष के अधिवक्ता ने पुरानी टंकी के जर्जर होने और स्थानीय जनता की पेयजल की जरूरतों के मद्देनजर टंकी का निर्माण करने की बात कही।
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कोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि पहले से बनी पानी की टंकी की क्रियाशीलता को देखते हुए जब तक वह पानी की आपूर्ति करने के लायक है अथवा इस मुकदमे के निपटारे तक नई टंकी में विपक्षीगण न तो पानी भरेंगे न ही उससे जलापूर्ति करेंगे। कोर्ट ने निचली अदालत को भी निर्देश दिया कि नई पानी की टंकी के बारे में न्यायालय अमीन अथवा जिला प्रशासन या अन्य किसी विशेषज्ञ संस्था से जांच कराकर उचित फैसला लें।