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नगर निगम बोर्ड की बैठक में पार्षदों ने किया हंगामा

Tue, 06 Oct 2020 01:52 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Tue, 06 Oct 2020 01:52 AM IST
सार

बजट की बात करना बाद में.. पहले ये बताओ अफसर फोन क्यों नहीं उठाते
 

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Councilors created ruckus in the meeting of the Municipal Board
नगर निगम बोर्ड की बैठक में अपनी बात रखते पार्षद। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, बरेली

विस्तार

अफसरों पर लगाए जनसमस्याओं की अनदेखी के आरोप, बैठक में ही धरने पर बैठे कई पार्षद
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नाला निर्माण, सफाई व्यवस्था, टैक्स विभाग की कार्यशैली पर उठाए सवाल, घाटे में रहा बजट

बरेली। नगर निगम ने सोमवार को आईएमए हॉल में बजट पेश किया। बजट के दौरान पार्षदों ने जन समस्याओं की झड़ी लगा दी। अधिकारियों की शिकायतें हुईं कि वह फोन नहीं उठाते हैं। करीब आठ घंटे तक चली बैठक में पार्षदों ने कई खामियों पर जमकर हंगामा किया। पार्षद सतीश कातिब सक्सेना हॉल में ही जमीन पर बैठकर धरना देने लगे। कहा कि आरटीआई के तहत सूचना मांगे जाने के बाद भी नगर निगम का स्वास्थ्य विभाग सूचनाएं नहीं देता है। बैठक में कई मौकों पर सामाजिक दूरी का उल्लंघन हुआ।
आईएमए हॉल में सुबह 11 बजे से बोर्ड बैठक शुरू हुई। नगर निगम का वित्तीय वर्ष 2020-21 का बजट बिना लाभ-हानि का रहा। शहर में नए प्रोजेक्टों को लेकर भी निगम ने कोई योजना नहीं बनाई है। अधिकारियों ने कहा कि कोरोना संक्रमण काल का प्रभाव बजट पर पड़ा है। लॉकडाउन के चलते नगर निगम को औसतन 70 प्रतिशत राजस्व का घाटा हुआ है। बैठक में मेयर डॉ. उमेश गौतम ने अंत में बजट को सर्वसहमति से पास कर दिया। इस मौके पर नगर आयुक्त अभिषेक आनंद, संयुक्त नगर आयुक्त अजीत कुमार सिंह व अन्य विभागों के अधिकारी व पार्षद मौजूद रहे।
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  • कुल बजट- 4.34 अरब
  • आमदनी- 3 अरब नौ करोड़ 63 लाख
  • खर्च- 3 अरब 97 करोड़ 11 लाख

बन्नूवाल कॉलोनी में ढाई करोड़ की सड़क बनवाएंगे तो घाटे में ही जाएगा बजट

बरेली। पार्षदों ने जनसमस्याओं के साथ ही बजट के कई जगह दुरुप्रयोग की भी शिकायत की। कहा कि बन्नूवाल कॉलोनी नगर निगम में नहीं आती है। बावजूद इसके वहां करीब ढाई करोड़ की लागत से सड़क का निर्माण कराया जा रहा है, ऐसे में बजट तो घाटे में जाएगा ही। सभी पार्षदों ने बारी-बारी से अपनी बात रखी।
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बानखाना वार्ड के पार्षद शमीम अहमद और विपुल लाला ने कहा कि उनके क्षेत्र में नाला निर्माण में कई अनियमितताएं बरती जा रही हैं। नाला निर्माण में भ्रष्टाचार हुआ है। कई बार निगम में इसकी शिकायत भी की गई है, लेकिन हुआ कुछ नहीं। नाले को जहां मन किया वहां से आड़ा तिरछा कर दिया गया है। कई जगह चौड़ाई बेहद कम कर दी गई है। निर्माण विभाग ने शिकायत का निस्तारण किए बिना ही ठेकेदार को भुगतान भी कर दिया है।
पार्षद विकास शर्मा ने कहा कि लेखा विभाग शासनादेश नहीं मानता है। बजट एजेंडे से कुछ प्रपत्र गायब हैं। पूर्व उपसभापति अतुल कपूर ने कहा कि जिन एजेंसियों को विज्ञापन लगाने की जिम्मेदारी दी उनको रिकॉर्ड दिखाया जाए। उन्होंने यूनीपोल में धांधली का मामला उठाया। कहा कि कुछ चहेते लोगों को इसका काम दे दिया गया है। आवेदन के नाम पर खानापूर्ति की गई है। विज्ञापन में करोड़ों रुपये का खेल कर दिया गया है। पार्षदों ने मांग उठाई कि इसमें लिप्त अधिकारियों की जांच जरूरी है।
लेखा अधिकारी जवाब देने लगे तो पार्षदों ने टोका कि जिम्मेदार ही इसका जवाब दें। पार्षद रईस अब्बासी ने कहा कि विज्ञापन विभाग अपनी ही मनमानी चला रहा है। ऐसा नहीं होने दिया जाएगा। पोर्टल पर आवेदन के नाम पर विज्ञापन एजेंसियों से मोटी रकम वसूलकर उन्हें मनमानी करने की छूट दी जाती है। इस पर संयुक्त नगर आयुक्त अजीत कुमार सिंह ने कहा कि सभी नियमों का पालन किया गया है। एजेंसियों से पोर्टल के जरिए आवेदन लिए गए। अन्य मांगों पर मेयर ने कहा कि जिन मोहल्लों में सीवर लाइन, पानी की लाइन नहीं है। वहां के लोगों से सिर्फ हाउस टैक्स लिया जाएगा। कूड़ा कलेक्शन पर एक लाख घरों से यूजर चार्ज लेने पर सहमति बनी।

टैक्स विभाग में कई मठाधीश.. नगर निगम को बदनाम कर रहा ये विभाग

बरेली। नगर निगम की बोर्ड बैठक में टैक्स विभाग के खिलाफ एक साथ सत्तापक्ष व विपक्ष के सभी पार्षदों ने मोर्चा खोल दिया। कहा कि इस विभाग ने सारी मर्यादाओं को पार कर सिर्फ जनता को परेशान करने का काम ले लिया है। रोजाना सैकड़ों शिकायतें आ रही हैं, लेकिन इस विभाग से जुड़े किसी भी अधिकारी पर कभी कोई कार्रवाई नहीं होती। इस पर मेयर ने कहा कि वह खुद भुक्तभोगी हैं।
सपा पार्षद दल के नेता राजेश अग्रवाल ने कहा कि कमिश्नर, डीएम आवास पर बरसों से टैक्स बकाया है, उसका कुछ नहीं हुआ। जनता पर अंधाधुंध टैक्स लगाकर भेजा जा रहा है। पार्षद अतुल कपूर ने कहा कि टैक्स विभाग में गड़बड़ी रुकने का नाम नहीं ले रही। भाजपा पार्षद दल के नेता छंगामल मौर्य ने कहा कि टैक्स विभाग भ्रष्टाचार का गढ़ बन गया है। अधिकारी मनमानी कर रहे हैं।
गौरव सक्सेना ने कहा कि नाम परिवर्तन की प्रक्रिया के लिए जनता एक साल से भटक रही है, लेकिन यहां कोई सुनवाई नहीं होती है। इस विभाग के अधिकारी वसूली की बात कहकर खुद अपनी पीठ थपथपाने में लगे हैं। इस पर मेयर डॉ. उमेश गौतम ने कहा कि टैक्स विभाग की बात मत करिए। इनके कारनामों का तो खुद मैं भुक्तभोगी हूं। टैक्स विभाग ने नगर निगम की छवि पूरे शहर में खराब कर रखी है। इस विभाग में कुछ मठाधीश हैं जिन्हें लगता है सब उन्हीं के ऊपर चल रहा है। इन पर कार्रवाई बहुत जरूरी है। अगले सप्ताह भी इस विभाग के साथ बैठक की जाएगी। नहीं सुधरे तो कार्रवाई होगी और मुख्यमंत्री तक मामले को पहुंचाया जाएगा।

फैंसी लाइटों पर इतना पैसा फूंका गया फिर भी जल क्यों नहीं रहीं

बरेली। कंपनी गार्डन से प्रभात नगर तक लगी फैंसी लाइटों की गुणवत्ता की जांच की मांग भी बोर्ड बैठक में उठी। पार्षदों ने कहा कि इस लाइट की पूरी प्रक्रिया की जांच होना जरूरी है।
फैंसी लाइट एक बार फिर लाइमलाइट में आई। पार्षद राजेश अग्रवाल और दीपक सक्सेना ने लाइट की जांच कराने की मांग की। कहा कि लाइटों की गुणवत्ता ठीक नहीं है। जब से लगाई गई हैं तभी से कई बार खंभे गिर चुके हैं, लेकिन आज तक मामले में न कोई जांच हुई है और न किसी पर कोई कार्रवाई हुई है। गांधी उद्यान में गिरे लाइट के खंभे पर मेयर ने कहा कि वह किसी ने गिराया था और उस समय उसकी रिपोर्ट भी दर्ज कराई गई थी। कहा कि फिर भी यदि जांच चाहते हैं तो मामले में लिखित शिकायत दर्ज कराएं। सभी बिंदुओं की जांच करा ली जाएगी।

कांच के गिलास में पानी देने पर भी विरोध

बैठक के दौरान निगम कर्मी सभी कांच के गिलास में पानी पिला रहे थे, जिसका पार्षदों ने विरोध किया, लेकिन पानी वितरण कांच के गिलासों से होता रहा। पार्षदों का कहना था कि कोरोना में इस तरह पानी पिलाना ठीक नहीं है। वहीं हंगामे के दौरान कई पार्षद आगे आकर एक जगह जमा हो जाते थे, जिससे कोविड के नियमों की धज्जियां भी उड़ीं। वहीं पार्षदों को बोलने के लिए एक ही माइक दिया गया था। वही माइक हर पार्षद के हाथ में जा रहा था। बोलते समय पार्षद मास्क का भी प्रयोग नहीं कर रहे थे, जिसे देखते हुए कई पार्षदों ने बोलते समय माइक का प्रयोग करने से ही इनकार कर दिया और वह बिना माइक के ही अपनी बात रखते रहे।

अब पार्षदों को मिलेगा पांच हजार भत्ता

अब नगर निगम के पार्षदों को पांच हजार रुपये महीना भत्ता मिलेगा। इस प्रस्ताव को सभी की सहमति से पास कर दिया गया। अब तक पार्षदों को एक हजार रुपये ही भत्ते के रूप में दिए जाते थे।
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