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नहीं रोक सके ‘चक दे इंडिया’ को हॉकी खेलने से
बरेली।
Updated Sat, 11 Feb 2017 01:22 AM IST
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Could not 'Chak De India' to play hockey
- फोटो : बरेली, अमर उजाला
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2007 में रिलीज हुई चक दे इंडिया फिल्म के उस कबीर खान कोच की महिला हॉकी टीम जरूर याद होगी जो हॉकी एसोसिएशन के चैलेंज को धूल चटाते हुए न केवल वर्ल्ड कप खेलती बल्कि शान से जीतती भी है। कुछ यही नजारा शुक्रवार को रुहेलखंड विश्वविद्यालय की महिला हॉकी टीम के साथ भी देखने को मिला और हाकी वाली इन लड़कियों की जीत हुई। लड़कियों की हॉकी के आगे टीम को न भेजने की मंशा बनाए बैठे विश्वविद्यालय प्रशासन को अपना फैसला बदला पड़ा। पूरे दिन बखेड़ा होने के बाद शाम चार बजे लड़कियों ने दोबारा ट्रायल देकर खुद को लायक साबित किया। क्रीड़ा परिषद के सदस्यों ने काफी मंथन के बाद रात साढ़े नौ बजे टीम को अमृतसर में शनिवार से होने वाली अंतर विश्वविद्यालयीय प्रतियोगिता के लिए भेजने को हरी झंडी दी। खिलाड़ियों की खुशी देखकर यही लग रहा था कि मानो टीम ने बिना खेले ही सबकुछ जीत लिया हो। हकीकत में यह जीत उनके लिए किसी वर्ल्ड कप से कम नहीं रही होगी।
नहीं मानी हार...डटी रहीं
चक दे इंडिया की टीम लड़कों की टीम से भिड़कर खुद को साबित करती है तो रुहेलखंड विश्वविद्यालय की यह हॉकी टीम पूरी व्यवस्था से लड़कर जीती। गुरुवार को पूरे दिन विश्वविद्यालय प्रशासन से यह खिलाड़ी जूझती रहीं। गार्ड के धक्के खाये, विश्वविद्यालय प्रशासन की भी बातें सुनी। घर से हॉकी खेलने का इरादा लेकर निकली इन लड़कियों ने क्रीड़ा सचिव के सामने भी दोबारा ट्रायल को गिड़गिड़ाई, लेकिन वह नहीं माने और कैंपस से चले गए। लड़कियां रात साढ़े दस बजे तक विश्वविद्यालय कैंपस में डेरा डाले रखीं, लेकिन कुलपति से लेकर कुलसचिव किसी ने इनकी नहीं सुनी। लड़कियों ने हिम्मत नहीं हारी और शनिवार को फिर विश्वविद्यालय पहुंच गईं और कुलसचिव कार्यालय में धरने पर बैठ गईं। बोली जबतक उनको भेजा नहीं जाता वह हटेंगी नहीं। क्रीड़ा परिषद के प्रोफेसर बीआर कुकरेती, डॉ. बृजेश त्रिपाठी, डॉ. जैन मौर्या समेत कई लोग पहुंचे। काफी हंगामा होने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन इनका दोबारा ट्रायल कराने का तैयार हुआ।
ट्रायल में खुद को साबित किया
हॉकी एसोसिएशन के सचिव वसीम ने इन लड़कियों को ट्रायल लिया। सोलह खिलाड़ियों को आठ-आठ की टीम में बांटकर मैच कराए गए। टीम की अधिकतर खिलाड़ियों ने अच्छा प्रदर्शन किया। चाहें आक्रामक खेल हो या फिर बेहतर डिफेंस, गोल कीपर ने भी शानदार खेल दिखाया। सचिव ने टीम को हरी झंडी दी उसके बाद टीम के कोच और प्रबंधक का पेंच फंसा। साढ़े छह बजे से लेकर रात साढ़े नौ बजे तक इसको लेकर मशक्कत चलती। बाद में तय हुआ कि लड़कों की टीम को ही लड़कियों की टीम का प्रबंधक बनाया जाएगा और कोच के रूप में हॉकी कोच अनवर को भेजा गया है।
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टीम का ट्रायल कराया गया। उसके बाद टीम को भेजने का निर्णय लिया गया। कोच और प्रबंधक की व्यवस्था होने में वक्त लगा इसलिए रात में टीम भेजने का फैसला हो सका। टीम भेज दी गई है।
-प्रोफेसर बीआर कुकरेती, क्रीड़ा परिषद सदस्य व चीफ प्रॉक्टर
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नहीं मानी हार...डटी रहीं
चक दे इंडिया की टीम लड़कों की टीम से भिड़कर खुद को साबित करती है तो रुहेलखंड विश्वविद्यालय की यह हॉकी टीम पूरी व्यवस्था से लड़कर जीती। गुरुवार को पूरे दिन विश्वविद्यालय प्रशासन से यह खिलाड़ी जूझती रहीं। गार्ड के धक्के खाये, विश्वविद्यालय प्रशासन की भी बातें सुनी। घर से हॉकी खेलने का इरादा लेकर निकली इन लड़कियों ने क्रीड़ा सचिव के सामने भी दोबारा ट्रायल को गिड़गिड़ाई, लेकिन वह नहीं माने और कैंपस से चले गए। लड़कियां रात साढ़े दस बजे तक विश्वविद्यालय कैंपस में डेरा डाले रखीं, लेकिन कुलपति से लेकर कुलसचिव किसी ने इनकी नहीं सुनी। लड़कियों ने हिम्मत नहीं हारी और शनिवार को फिर विश्वविद्यालय पहुंच गईं और कुलसचिव कार्यालय में धरने पर बैठ गईं। बोली जबतक उनको भेजा नहीं जाता वह हटेंगी नहीं। क्रीड़ा परिषद के प्रोफेसर बीआर कुकरेती, डॉ. बृजेश त्रिपाठी, डॉ. जैन मौर्या समेत कई लोग पहुंचे। काफी हंगामा होने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन इनका दोबारा ट्रायल कराने का तैयार हुआ।
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ट्रायल में खुद को साबित किया
हॉकी एसोसिएशन के सचिव वसीम ने इन लड़कियों को ट्रायल लिया। सोलह खिलाड़ियों को आठ-आठ की टीम में बांटकर मैच कराए गए। टीम की अधिकतर खिलाड़ियों ने अच्छा प्रदर्शन किया। चाहें आक्रामक खेल हो या फिर बेहतर डिफेंस, गोल कीपर ने भी शानदार खेल दिखाया। सचिव ने टीम को हरी झंडी दी उसके बाद टीम के कोच और प्रबंधक का पेंच फंसा। साढ़े छह बजे से लेकर रात साढ़े नौ बजे तक इसको लेकर मशक्कत चलती। बाद में तय हुआ कि लड़कों की टीम को ही लड़कियों की टीम का प्रबंधक बनाया जाएगा और कोच के रूप में हॉकी कोच अनवर को भेजा गया है।
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टीम का ट्रायल कराया गया। उसके बाद टीम को भेजने का निर्णय लिया गया। कोच और प्रबंधक की व्यवस्था होने में वक्त लगा इसलिए रात में टीम भेजने का फैसला हो सका। टीम भेज दी गई है।
-प्रोफेसर बीआर कुकरेती, क्रीड़ा परिषद सदस्य व चीफ प्रॉक्टर