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Bareilly News: निगम ने 18 करोड़ में बनवाया भवन, नहीं किए आग से बचाव इंतजाम
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बरेली। नगर निगम ने 18 करोड़ रुपये से नए भवन का निर्माण करवाया है। लेकिन उसमें आग से बचाव के इंतजाम नहीं किए गए हैं। पिछले महीने छत टपकने का मामला सामने आया तो जांच हुई। जांच के दौरान आग से बचाव के इंतजाम करने लगे। अब भू-तल, पहली और चौथी मंजिल में फायर सेंसर लगाए गए हैंं।
30 जनवरी को नगर निगम की नई बिल्डिंग की छत से पानी टपकने का मामला सामने आया था। उस समय नगर निगम के दो कंप्यूटर व प्रिंटर समेत दस्तावेज खराब हुए थे। इस प्रकरण में मंडलायुक्त की ओर से बनी समिति को भी जांच सौंपी गई थी। सात दिन में उसकी रिपोर्ट देनी थी लेकिन अब नगर आयुक्त को नहीं मिली। अमर उजाला पड़ताल में सामने आया है कि बिल्डिंग में आग लगी तो बचाव के व्यवस्था नहीं थी। जांच शुरू हुई तो कंस्ट्रक्शन कंपनी ने भू-तल, पहली और चौथी मंजिल में फायर सेंसर लगा दिए। इसके अलाव भू-तल से लेकर चौथी मंजिल आईसीसीसी तक एक भी अग्निश्मन यंत्र नहीं लगाया गया।
निर्माणाधीन दूसरी मंजिल बन सकती है हादसे की वजह
नगर निगम निर्माणाधीन दूसरी मंजिल हादसे का कारण बन सकती है। इसमें तारों का जाल फैला हुआ है। उसमें कंस्ट्रक्शन कंपनी का ऑफिस भी हैं। जांच के चलते काम फिलहाल रुका है। ऐसे में अगर कोई हादसा होता भी है तो इससे निपटना बहुत चुनौती होगी। मुख्यालय की नई बिल्डिंग में 60 प्रतिशत से अधिक प्लाईवुड और लकड़ी का काम है।
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फायर प्रोटेक्टिव सिस्टम तक नहीं है: सीएफओ
सीएफओ भी जांच टीम में हैं। सीएफओ चंद्र मोहन शर्मा ने बताया कि भवन में फायर प्रोटेक्टिव सिस्टम नहीं लगे हैं। सेंसर और अग्निशमन यंत्र एक भी नहीं है। कहा कि अभी तो इसके गुणवत्ता की जांच ही चल रही है। उन्होंने कहा कि भू-तल और पहली मंजिल में कार्यालय संचालित हैं। उन्होंने कंस्ट्रक्शन कंपनी के प्रोजेक्ट मैनेजर को सावधानी बरतते हुए जरूरी कार्य पूर्ण करने को कहा है। संवाद
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30 जनवरी को नगर निगम की नई बिल्डिंग की छत से पानी टपकने का मामला सामने आया था। उस समय नगर निगम के दो कंप्यूटर व प्रिंटर समेत दस्तावेज खराब हुए थे। इस प्रकरण में मंडलायुक्त की ओर से बनी समिति को भी जांच सौंपी गई थी। सात दिन में उसकी रिपोर्ट देनी थी लेकिन अब नगर आयुक्त को नहीं मिली। अमर उजाला पड़ताल में सामने आया है कि बिल्डिंग में आग लगी तो बचाव के व्यवस्था नहीं थी। जांच शुरू हुई तो कंस्ट्रक्शन कंपनी ने भू-तल, पहली और चौथी मंजिल में फायर सेंसर लगा दिए। इसके अलाव भू-तल से लेकर चौथी मंजिल आईसीसीसी तक एक भी अग्निश्मन यंत्र नहीं लगाया गया।
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निर्माणाधीन दूसरी मंजिल बन सकती है हादसे की वजह
नगर निगम निर्माणाधीन दूसरी मंजिल हादसे का कारण बन सकती है। इसमें तारों का जाल फैला हुआ है। उसमें कंस्ट्रक्शन कंपनी का ऑफिस भी हैं। जांच के चलते काम फिलहाल रुका है। ऐसे में अगर कोई हादसा होता भी है तो इससे निपटना बहुत चुनौती होगी। मुख्यालय की नई बिल्डिंग में 60 प्रतिशत से अधिक प्लाईवुड और लकड़ी का काम है।
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फायर प्रोटेक्टिव सिस्टम तक नहीं है: सीएफओ
सीएफओ भी जांच टीम में हैं। सीएफओ चंद्र मोहन शर्मा ने बताया कि भवन में फायर प्रोटेक्टिव सिस्टम नहीं लगे हैं। सेंसर और अग्निशमन यंत्र एक भी नहीं है। कहा कि अभी तो इसके गुणवत्ता की जांच ही चल रही है। उन्होंने कहा कि भू-तल और पहली मंजिल में कार्यालय संचालित हैं। उन्होंने कंस्ट्रक्शन कंपनी के प्रोजेक्ट मैनेजर को सावधानी बरतते हुए जरूरी कार्य पूर्ण करने को कहा है। संवाद