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संकट के सिपाही : कोरोना जांच और जागरूकता में गांव को बनाया मिसाल

Mon, 24 May 2021 06:09 AM IST
दुष्यंत शर्मा  अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
 अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Mon, 24 May 2021 06:09 AM IST
सार

  • सुनीता ने एक साथ पूर्व सरपंच व आंगनबाड़ी वर्कर की जिम्मेदारी निभाते हुए घर-घर जाकर लोगों को कोरोना से बचाव के लिए जागरूक किया
  • इस समय उनका ध्यान टीकाकरण पर केंद्रित है

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corona warrior : set an example in Corona investigation and awareness 
कोरोना योद्धा... सुनीता, सौरभ तिवारी (ऊपर से दाएं), डॉ. मेराज और रामेश्वर सिंह - फोटो : amar ujala

विस्तार

कोरोना ने जहां अब गांवों में ज्यादा कहर बरपाया हुआ है, वहीं सोनीपत में मौजमनगर ऐसा गांव है, जहां एक महिला सुनीता के कारण कोरोना आज तक नहीं घुस सका है। सुनीता ने एक साथ पूर्व सरपंच व आंगनबाड़ी वर्कर की जिम्मेदारी निभाते हुए पहले घर-घर जाकर लोगों को कोरोना से बचाव के लिए जागरूक किया जिसका असर यह दिखा कि गांव में सभी मास्क या मुंह पर कपड़ा बांधकर रहते हैं और कोई जरूरी काम होने के बाद ही बाहर निकलते हैं।

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वहीं अब सुनीता गांव के हर घर में जाकर जांच कराने में जुटी है और किसी के बीमार होने पर स्वास्थ्य विभाग की टीम को सूचना देकर उपचार कराया जाता है। प्रशासनिक अधिकारी भी कहते हैं कि इस तरह सभी गांवों के लोग जागरूक रहेंगे तो कोरोना पूरी तरह से खत्म करना आसान होगा।
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खरखौदा क्षेत्र के मौजमनगर गांव की सुनीता आंगनबाड़ी वर्कर है तो इसके साथ ही वह सरपंच थी। तीन महीने पहले कार्यकाल खत्म होने के बावजूद वह अपनी जिम्मेदारी नहीं भूली है। यही कारण है कि जब कोरोना ने कहर बरपाना शुरू किया तो सुनीता ने आंगनबाड़ी वर्कर व पूर्व सरपंच की जिम्मेदारियों को निभाने का बीड़ा उठा लिया और घर-घर जाकर लोगों को जागरूक करने लगी। लोगों को बताया गया कि घर से कोई जरूरी काम होने पर ही बाहर निकला जाए। इसके साथ ही मास्क व सैनिटाइजर का इस्तेमाल जरूर करें और हाथों को साबुन से जरूर धोते रहें।
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सुनीता को इसमें सभी ग्रामीणों का सहयोग मिला और अब गांव में सभी मास्क लगाते हैं या मुंह पर कपड़ा बांधकर रहते हैं। गांव में कोरोना को लेकर लोग इतने जागरूक है कि वह किसी भी तरह से लापरवाही नहीं बरतते हैं और इसलिए ही कोरोना संक्रमण की शुरुआत से लेकर अभी तक यहां एक भी केस नहीं मिला है।

पूर्व डीसी श्यामलाल पूनिया बताते हैं कि मौजमनगर के लोगों में कोरोना को लेकर जागरूकता है और वहां लोग मास्क लगाकर या कपड़ा बांधकर रहते हैं। हुक्का साथ पीना बंद किया हुआ है और ताश भी साथ बैठकर नहीं खेलते। 

इलाज के साथ अस्पताल में भर्ती मरीजों को पहुंचा रहे भोजन
डॉ. रामेश्वर सिंह, जोनल मेडिकल अधिकारी, कठुआ

बनी में जोनल मेडिकल अधिकारी और पीएचसी कोटी चंडियार में तैनात डॉ. रामेश्वर सिंह ने समाज सेवा में एक बार फिर मिसाल कायम की है। सब डिवीजन में तेजी से बढ़ रहे कोरोना संक्रमण और लॉकडाउन के बीच दूरदराज के इलाकों से लोग अस्पताल में पहुंच रहे हैं। ऐसे में इन लोगों के पास खानपान की व्यवस्था नहीं रहती। क्षेत्र में सीमित संसाधनों और दुकानों के बंद होने के चलते डॉ. रामेश्वर सिंह ने मदद का हाथ बढ़ाया है। 

उन्होंने कोरोना महामारी में घोषित लॉकडाउन के बीच अस्पताल में भर्ती मरीजों और तीमारदारों के लिए निशुल्क भोजन की व्यवस्था करने की जिम्मेदारी संभाल ली है। घोषणा की है कि जबतक लॉकडाउन रहेगा, तब तक अस्पताल में पहुंच रहे मरीजों और तीमारदारों तक मदद पहुंचाई जाएगी। इससे पहले भी डॉ. रामेश्वर सिंह की ओर से समय-समय पर सब डिवीजन के विभिन्न दूरदराज इलाकों में निशुल्क स्वास्थ्य जांच कैंप लगाए जाते थे। यही नहीं, दूरदराज के इलाकों में कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए जांच से लेकर टीकाकरण की जिम्मेदारी भी संभाले हुए हैं। मूलरूप से बनी के ढग्गर निवासी डॉ. रामेश्वर के अनुसार अपने क्षेत्र के लोगों की सेवा करने का इससे बेहतर अवसर नहीं हो सकता। 

दो बार हुए संक्रमित फिर भी लौट आए ड्यूटी पर
डॉ. मेराज, राजकीय मेडिकल कॉलेज, शाहजहांपुर 

शाहजहांपुर के राजकीय मेडिकल कॉलेज के इमरजेंसी और ट्रॉमा सेंटर में कार्यरत डॉ. मेराज दो बार संक्रमित हो चुके हैं। इसके बावजूद मरीजों का दर्द अपना समझकर इलाज में कोई कसर नहीं छोड़ते। संक्रमित होने के नौ दिन बाद ही ड्यूटी ज्वाइन कर ली।

वह कोरोना संक्रमण के खतरे के बीच काम करने की वजह से घर में भी खुद को अपने बुजुर्ग माता-पिता से अलग रखते थे। कोरोना संक्रमण के फैलाव के साथ पिछले साल से घर में अलग ही रह रहे हैं। इमरजेंसी में काम करने के कारण डॉ. मेराज दुर्घटनाग्रस्त या नाजुक हालत में आने वाले मरीजों के तुरंत इलाज में जुट जाते हैं। ऐसे मरीजों का कोरोना टेस्ट करने का समय नहीं होता। इसलिए वह उपचार में देरी नहीं करते। इसी वजह से संक्रमण की चपेट में आने की सबसे ज्यादा आशंका रहती है।

डॉ. मेराज गत वर्ष भी कोरोना संक्रमित हुए थे। रिपोर्ट निगेटिव आते ही ड्यूटी ज्वाइन कर ली थी। इस वर्ष इलाज के दौरान पॉजिटिव हुए तो निगेटिव होते ही नौ दिन में ड्यूटी ज्वाइन कर ली। पोस्ट कोविड आराम की जरूरत नहीं समझी। डॉ. मेराज के मुताबिक कोरोना काल में सभी स्वास्थ्यकर्मी योद्धा की तरह काम कर रहे हैं। घर में बैठने का समय नहीं है। देश-समाज को उनकी जरूरत है और फर्ज निभाने से वह पीछे नहीं हटना चाहते हैं। 

पंद्रह दिनों में सौ रोगियों को घर जाकर दे चुके निशुल्क दवाइयां और खाना
सौरभ तिवारी, अमरीक विहार कॉलोनी, झांसी

कोरोना काल में महानगर निवासी एक दवा व्यवसायी सौरभ खुद कोरोना से ठीक होने के बाद जरूरतमंदों को खुद पैसा खर्च कर अस्पतालों में भर्ती भी करा रहे रहे हैं। यही नहीं, पिछले पंद्रह दिनों में वह सौ रोगियों को घर जाकर निशुल्क दवाएं और राशन तक दे चुके हैं। 

अमरीक विहार कॉलोनी सौरभ तिवारी दवा व्यवसायी हैं। लगभग एक महीने पहले वो उनकी पत्नी, दो बेटियां, मां, भाभी समेत परिवार के नौ लोग कोरोना की चपेट में आ गए। सौरभ, उनकी पत्नी और मां आईसीयू में भर्ती हुए और बाद में ठीक हो गए। इसके बाद उन्होंने कोरोना संक्रमितों की मदद की ठान ली। अब वह आर्थिक रूप से कमजोर कोरोना संक्रमितों को घर जाकर निशुल्क दवाइयां दे रहे हैं। पिछले 15 दिनों में वह लगभग 100 लोगों को दवाएं बांट चुके हैं। 

यही नहीं, हालात में सुधार न होने पर मरीजों को अस्पतालों में भर्ती कराते हैं। कुछ मरीजों को तो उन्होंने खुद पैसा खर्च कर निजी अस्पताल में भर्ती कराया है। कई ऐसे परिवार जिनकी आर्थिक स्थिति बहुत खराब हैं, उन्हें राशन सामग्री तक पहुंचाई है।

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