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सिस्टम की सुस्ती से कोरोना ने पकड़ी रफ्तार 30 दिन में 67वें से चौथे पायदान पर बरेली

Thu, 30 Jul 2020 02:20 AM IST
बरेली ब्यूरो अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
अमर उजाला ब्यूरो, बरेली Published by: बरेली ब्यूरो Updated Thu, 30 Jul 2020 02:20 AM IST
सार

एक महीने में 1125 लोग हुए कोरोना संक्रमित, 49 गंभीर मरीजों की हुई है मौत
 

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Corona caught speed due to system sluggishness, ranked 67th to fourth in 30 days...
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विस्तार

यूपी कोविड-19 की रिपोर्ट के मुताबिक बरेली में तेजी से बढ़ रहे सक्रिय संक्रमित

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बरेली। सिस्टम की अनदेखी कहें या लोगों की लापरवाही.. वजह चाहे जो हो, लेकिन एक महीने में ही कोरोना जिले में बेकाबू हो चुका है। कोरोना संक्रमितों की संख्या में एक महीने के भीतर हुए इजाफे ने जिले को प्रदेश में 67वें पायदान से चौथे पायदान पर पहुंचा दिया है। हालात ऐसे हो गए हैं कि अब लोगों को सिस्टम के भरोसे नहीं बल्कि खुद ही सतर्क रहने की जरूरत है। अगर अब भी नहीं संभले तो स्थितियां और गंभीर हो सकती हैं।
स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक, एक जुलाई को जिले में कोरोना संक्रमण के सक्रिय मामलों का आंकड़ा 97 था। उस वक्त जिले में कुल संक्रमितों की संख्या 258 थी और 12 संक्रमितों की मौत हुई थी। अब आई यूपी कोविड-19 की रिपोर्ट के अनुसार बरेली जिले में बीते एक में संक्रमण के सर्वाधिक मामले सामने आए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, 28 जुलाई तक एक महीने के भीतर बरेली में 1355 सक्रिय संक्रमित सामने आ चुके हैं। इस अवधि में जिले में 49 लोगों की मौत के साथ ही कोरोना से मरने वालों का आंकड़ा भी 61 पर पहुंच चुका है। जिले में अब कुल संक्रमितों की तादाद 1885 पर पहुंच चुकी है। संक्रमितों की तादाद तेजी से बढ़ने की वजह से ही 67वें पायदान पर दर्ज बरेली अब सूबे में चौथे पायदान पर पहुंच चुका है।
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हर दिन सामने आ रहे औसतन डेढ़ सौ मामले

जिले में हफ्ते भर में संक्रमण के सर्वाधिक मामले सामने आए हैं। 23 जुलाई को पहली बार एक दिन में संक्रमितों की तादाद 155 पर पहुंची थी। 26 जुलाई को 123 संक्रमित मिले थे, जबकि 27 जुलाई को रिकॉर्ड 262 नए संक्रमित सामने आए। 28 जुलाई को 162 लोगों में संक्रमण की पुष्टि हुई। 29 जुलाई को भी देर शाम तक 106 लोगों में संक्रमण की पुष्टि हो चुकी है। देर रात यह तादाद और बढ़ सकती है। हर दिन औसतन डेढ़ सौ से ज्यादा मामले सामने आने की वजह से हड़कंप मचा हुआ है। बता दें कि यूपी कोविड 19 की रिपोर्ट के मुताबिक, संक्रमण के मामले में अब लखनऊ, कानपुर और वाराणसी के बाद बरेली का ही नंबर है।
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सैंपलिंग बढ़ने से बढ़ी संक्रमितों की संख्या

आईएमए के कोषाध्यक्ष डॉ. हिमांशु अग्रवाल कहते हैं कि कोरोना को लेकर लोग अब भी लापरवाह बने हुए हैं। लिहाजा, संक्रमण का ग्राफ तेजी से बढ़ रहा है। कहा, सैंपलिंग की तादाद बीते दिनों सौ से दो सौ तक ही सीमित थी, लेकिन करीब तीन हफ्ते से सैंपलिंग की तादाद एक हजार से भी ज्यादा हो चुकी है। बड़ी तादाद में सैंपल लिए जाने से भी ज्यादा संक्रमित सामने आ रहे हैं। उम्मीद जताई कि अगर सैंपलिंग और जांच पहले ही बढ़ गई होती तो संक्रमितों की तादाद जिले में कम ही रहती, क्योंकि समय रहते संक्रमितों को ट्रेस कर उनसे दूसरे लोगों में संक्रमण फैलने से रोका जा सकता था।

सैंकड़ों संक्रमितों में सोर्स भी है लापता

स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक, बीते दिनों प्रवासियों के आने के बाद जिले में संक्रमण की रफ्तार बढ़ी है। मगर, इसमें सबसे बड़ी खामी हजियापुर के पहले संक्रमित युवक में संक्रमण का सोर्स खोजने में सर्विलांस टीम की असमर्थता सामने आई। विकास भवन के एक कक्ष में बैठकर सर्विलांस टीम महज फोन कॉल के जरिए ही सोर्स खोजने में जुटी रही। इसका नतीजा यह है कि अब सैकड़ों संक्रमितों में सोर्स लापता है। इसे देखते हुए आईसीएमआर की गाइडलाइन के अनुसार सामुदायिक संक्रमण की आशंका भी शहर के निजी चिकित्सकों ने पहले ही जता दी थी।

संक्रमण के फैलाव रोकने में इसलिए नाकाम रहा सिस्टम

  • - हॉटस्पॉट में गाइडलाइन के पालन में खानापूर्ति।
  • - कंटेन्मेंट जोन में नियमानुसार सैनिटाइज न कराना।
  • - संक्रमितों में संक्रमण का सोर्स ही न खोज पाना।
  • - संक्रमित के परिजन को क्वारंटीन करके ही इतिश्री कर लेना।
  • - संपर्क में आने वालों की ट्रेसिंग में ढुलमुल रवैया।
  • - संदिग्धों की ट्रेसिंग और सैंपलिंग में अनदेखी।
  • - ग्रामीण इलाकों में प्रवासियों की निगरानी में कोताही।
  • - निजी अस्पतालों में आईपीपी का पालन न करा पाना।
  • - संक्रमितों को समय से आइसोलेट न कराना।

सैंपलिंग बढ़ने से संक्रमण के मामले तेजी से बढ़े हैं, सिर्फ यही वजह नहीं है। संक्रमण फैलने की बड़ी वजह लोगों की ओर से बचाव के नियमों-कायदों का सही तरीके से अनुपालन न कर पाना है। सीमित संसाधनों में जो भी संभव हैं, वे सुविधाएं मुहैया कराई जा रही हैं। लोगों को चाहिए कि वे संक्रमण का संदेह होने पर तत्काल जांच कराएं। बीमार होना कोई अपराध नहीं है, बीमारी छिपाना अपराध है। - डॉ. विनीत शुक्ल, सीएमओ

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