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UP: सिपाही की हत्या के दोषी चालक को उम्रकैद, कोर्ट ने कहा- राजाओं की तरह ट्रक चालने की आजादी नहीं दी जा सकती

Sat, 01 Feb 2025 09:31 PM IST
मुकेश कुमार अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
अमर उजाला ब्यूरो, बरेली Published by: मुकेश कुमार Updated Sat, 01 Feb 2025 09:31 PM IST
सार

बरेली में नौ मार्च 2018 की रात चालक ने ट्रक चढ़ाकर सिपाही की हत्या कर दी थी। इस मामले में हत्या के दोषी चालक को न्यायालय ने शनिवार को उम्रकैद की सजा सुनाई।

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Convict of killing cop gets life imprisonment court says freedom to drive truck like kings cannot be given
सिपाही धर्मेंद्र का फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

ट्रक चालकों को अगर आजादी गई कि वह राजाओं की तरह ट्रक चलाएं और किसी को भी रौंदते चले जाएं, तो आम लोगों का रास्ते पर चलना दूभर हो जाएगा। समाज में भय एवं अराजकता का वातावरण उत्पन्न हो जाएगा। यह टिप्पणी करते हुए बरेली के अपर सत्र न्यायाधीश त्वरित न्यायालय प्रथम रवि कुमार दिवाकर ने पुलिस कांस्टेबल पर ट्रक चढ़ाकर हत्या करने के मामले में दोषी ड्राइवर को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। उस पर 50 हजार रुपये जुर्माना भी लगाया है।
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घटना सुभाषनगर थाना क्षेत्र के सिटी स्टेशन के सामने नौ मार्च 2018 को हुई थी। पुलिस लाइन निवासी अमित प्रताप सिंह ने पुलिस को बताया कि संभल जिले के गुन्नौर थाना क्षेत्र के गांव रजवाना निवासी उनके साले कांस्टेबल धर्मेंद्र कुमार सरकारी कार्य के लिए मीरगंज थाने से जिला मुख्यालय आ रहे थे। सिटी स्टेशन के सामने धर्मेंद्र ने शिकायतकर्ता को भी बैठा लिया था। दोनों चौपुला ओवरब्रिज होते हुए बदायूं रोड की ओर जा रहे थे। 
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ट्रक में फंसकर 50 मीटर तक घिसटता 
रात करीब 10:45 बजे पुल पर ट्रक ने टक्कर मार दी। इससे धर्मेंद्र कुमार गिर गए और वह ट्रक रोकने को चीखते रहे, लेकिन चालक ने ट्रक नहीं रोका। धर्मेंद्र व उनकी बाइक को करीब 50 मीटर तक घसीट ले गया। इसके बाद ट्रक चालक ट्रक छोड़कर भाग गया। सूचना पर अमित ने मौके पर जाकर देखा तो धर्मेंद्र की बाइक ट्रक के आगे के पहिये में फंसी थी। धर्मेंद्र पीछे के पहियों में फंसे थे। उनकी मौके पर ही मौत हो चुकी थी। पुलिस ने धर्मेंद्र के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। 
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पुलिस ने तहरीर के आधार पर रिपोर्ट दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी। सात जुलाई 2018 को न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया गया। अभियोजन की ओर से न्यायालय में कुल नौ गवाहों के बयान कराए गए और 13 दस्तावेजी साक्ष्य पेश किए गए। न्यायालय ने पत्रावली का अवलोकन करने के बाद न्यायालय ने प्रत्यक्षदर्शी गवाह विशेष पाल सिंह के बयानों के आधार पर पीलीभीत जिले के गजरौला थाना क्षेत्र के गांव सिरसा सरदहा निवासी रोहित कुमार को हत्या का दोषी पाते हुए सजा सुनाई।

इकलौता पुत्र था कांस्टेबल धर्मेंद्र
न्यायालय ने कहा कि सिपाही धर्मेंद्र कुमार की उम्र 27 वर्ष थी। वह अपने पिता की इकलौती संतान थी। पिता के पुत्र खोने के दर्द को न्यायालय कितना भी महसूस करे, लेकिन इस दर्द को न्यायालय शायद शब्दों में बयां करने में असमर्थ है।

पुलिस में अराजपत्रित कर्मचारियों को विषम परिस्थितियों का करना पड़ता है सामना
न्यायालय ने टिप्पणी करते हुए कहा कि पुलिस विभाग में 92 प्रतिशत अराजपत्रित कर्मचारी हैं। इनमें कांस्टेबल, हेड कांस्टेबल, उपनिरीक्षक और निरीक्षक आदि शामिल हैं। सड़क पर ड्यूटी का कार्य कांस्टेबल, हेड-कांस्टेबल ही करते हुए पाए जाते हैं। लेकिन इन पुलिस वालों को उतनी सुविधाएं नहीं मिलती हैं, जितनी मिलना चाहिए। 

पुलिस वाले शायद ही कोई तीज त्योहार अपने घर पर मना पाते हैं। पुलिस विभाग में अराजपत्रित कर्मचारियों को किन परिस्थितियों में रहकर ड्यूटी करनी होती है और क्या-क्या समस्याएं आती हैं। यह एक कविता के माध्यम से ही समझा जा सकता है। इस दौरान न्यायालय ने कविता से पुलिस विभाग के कर्मचारियों की भावनाओं का उल्लेख किया।
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