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होली में रंग नसीम और इस्लाम भाई के हैं
बरेली।
Updated Fri, 10 Mar 2017 01:30 AM IST
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Will appear in the International Festival Glimpses of folk-classical artColors in Holi are from Naseem and Islam brother
- फोटो : बरेली, अमर उजाला
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होली पर कपड़ों की शॉपिंग के लिए नावल्टी स्थित मोहम्मद फहीम के यहां अच्छी भीड़ दिखाई दे रही है। रंग और गुलाल खरीदना है तो सिविल लाइंस के नसीम के यहां आ सकते हैं। पिचकारी और होली के दूसरे आइटमाें के लिए इस्लाम और उनके भाईयाें की 50 साल पुरानी दुकान हैं। बरेली की यही बात इस त्योहार को खास बनाती है। होली जैसे हिंदू त्योहार पर यहां के मुस्लिम कारोबारी सौहार्द का रंग भरते हैं।
कुतुबखाना चौक बाजार में इस्लाम हुसैन, शाकिर हुसैन और जाहिद हुसैन तीन भाई होली की पिचकारी, टोपियां, रंग और कपड़ों का थोक और खुदरा कारोबार करते हैं। इस समय इनके यहां अधिक भीड़ है। इस्लाम बताते हैं कि 50 साल से यह काम कर रहे हैं। दिवाली पर भी थोक आइटम इन्हीं के यहां से शहर में जाते हैं। जब त्योहार नहीं होते तो सामान्य सामग्रियां बेचते हैं। इसकी तैयारी दो माह पहले से ही होती है। सिविल लाइंस में नसीम 30 साल से रंगाें का कारोबार कर रहे हैं। हर्बल गुलाल और रंगाें के लिए इनके पास पूरे शहर से लोग आते हैं। नसीम कहते हैं कि सिर्फ रंग ही नहीं बेचते हैं बल्कि खेलते भी हैं। 25 साल से कुतुबखान में रंगों का काम कर रहे बाबू भाई कहते हैं कि होली पर सबसे ज्यादा गुलाल बिकता है। इनकी दुकान से दो ट्रक गुलाल बिक जाते हैं। बरेली ही नहीं उनका माल आस पास के शहरों में भी जाता है। रंग भी लगभग एक हजार किलो बिकता है। कोशिश होती है कि मुनासिब दामों पर लोगों को रंग उपलब्ध करा सकें। शहामतगंज के नाजिम खां कहते हैं कि उनका तो काम ही रंग का है। इसलिए हमें तो होली आने का बेसब्री से इंतजार रहता है। इसी से उनकी कमाई होती है।
- कपड़ों में भी बरेली वालों का जवाब नहीं
रेडीमेड कपड़ा कारोबारी मोहम्मद फहीम का कहते हैं कि उनके लिए सब त्योहार एक से हैं। ईद से लेकर होली तक अच्छा माल देते हैं। होली पर रेडीमेड कपड़ों की बिक्री का दस दिनों में सिविल लाइंस की सिर्फ तीन मार्केट में लगभग दो करोड़ रुपये का टर्नओवर हो जाता है। इसमें मिशन मार्केट में लगभग एक करोड़ से भी अधिक का कारोबार होने का अनुमान लगाया जाता है। प्रसाद टाकीज मार्केट से लगभग 35 से 40 लाख और नावल्टी स्थित वासलिया मार्केट में करीब 15 से 16 लाख का कारोबार होने का अनुमान है। बड़ा बाजार के टेलरिंग शॉप के स्वामी खुर्शीद का कहना है कि अभी भी होली या ईद पर लोग कपड़े सिलवा कर पहनते हैं। जो लोग शौकीन हैं और फिटिंग का कपड़ा पहनना पसंद करते हैं वो सिलवा कर ही कपड़े पहनते हैं।
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कुतुबखाना चौक बाजार में इस्लाम हुसैन, शाकिर हुसैन और जाहिद हुसैन तीन भाई होली की पिचकारी, टोपियां, रंग और कपड़ों का थोक और खुदरा कारोबार करते हैं। इस समय इनके यहां अधिक भीड़ है। इस्लाम बताते हैं कि 50 साल से यह काम कर रहे हैं। दिवाली पर भी थोक आइटम इन्हीं के यहां से शहर में जाते हैं। जब त्योहार नहीं होते तो सामान्य सामग्रियां बेचते हैं। इसकी तैयारी दो माह पहले से ही होती है। सिविल लाइंस में नसीम 30 साल से रंगाें का कारोबार कर रहे हैं। हर्बल गुलाल और रंगाें के लिए इनके पास पूरे शहर से लोग आते हैं। नसीम कहते हैं कि सिर्फ रंग ही नहीं बेचते हैं बल्कि खेलते भी हैं। 25 साल से कुतुबखान में रंगों का काम कर रहे बाबू भाई कहते हैं कि होली पर सबसे ज्यादा गुलाल बिकता है। इनकी दुकान से दो ट्रक गुलाल बिक जाते हैं। बरेली ही नहीं उनका माल आस पास के शहरों में भी जाता है। रंग भी लगभग एक हजार किलो बिकता है। कोशिश होती है कि मुनासिब दामों पर लोगों को रंग उपलब्ध करा सकें। शहामतगंज के नाजिम खां कहते हैं कि उनका तो काम ही रंग का है। इसलिए हमें तो होली आने का बेसब्री से इंतजार रहता है। इसी से उनकी कमाई होती है।
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- कपड़ों में भी बरेली वालों का जवाब नहीं
रेडीमेड कपड़ा कारोबारी मोहम्मद फहीम का कहते हैं कि उनके लिए सब त्योहार एक से हैं। ईद से लेकर होली तक अच्छा माल देते हैं। होली पर रेडीमेड कपड़ों की बिक्री का दस दिनों में सिविल लाइंस की सिर्फ तीन मार्केट में लगभग दो करोड़ रुपये का टर्नओवर हो जाता है। इसमें मिशन मार्केट में लगभग एक करोड़ से भी अधिक का कारोबार होने का अनुमान लगाया जाता है। प्रसाद टाकीज मार्केट से लगभग 35 से 40 लाख और नावल्टी स्थित वासलिया मार्केट में करीब 15 से 16 लाख का कारोबार होने का अनुमान है। बड़ा बाजार के टेलरिंग शॉप के स्वामी खुर्शीद का कहना है कि अभी भी होली या ईद पर लोग कपड़े सिलवा कर पहनते हैं। जो लोग शौकीन हैं और फिटिंग का कपड़ा पहनना पसंद करते हैं वो सिलवा कर ही कपड़े पहनते हैं।
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