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सीएमओ साहब! 15 मर गए, एक गोली भी नहीं दे सका स्वास्थ्य केंद्र

Wed, 26 May 2021 01:47 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Wed, 26 May 2021 01:47 AM IST
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CMO Sir 15 died, health center could not even give a pill
करमपुर चौधरी में वीरान पड़ा अस्पताल। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, बरेली

करमपुर चौधरी गांव में वीरान पड़ा है आठ साल पहले बना स्वास्थ्य उपकेंद्र और एएनएम सेंटर
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अफसरों ने नहीं की स्टाफ की तैनाती तो गांव वालों ने बना डाला पशुओं का तबेला

बरेली। इज्जतनगर के गांव करमपुर चौधरी में आठ साल पहले बना स्वास्थ्य उपकेंद्र कोरोना की विभीषिका के बीच लोगों को एक-एक कर मरते देखने के अलावा कुछ नहीं कर सका। पंचायत चुनाव के बाद बीमारी तेजी से फैली तो झोलाछाप से ही इलाज कराकर गांव के 15 लोग बेबस मौत का शिकार हो गए। गांव वालों के मुताबिक स्वास्थ्य उपकेंद्र के निर्माण पर सरकारी पैसा तो फूंक दिया गया लेकिन गांव के लोगों के काफी जोर लगाने के बावजूद अफसरों ने स्टाफ की तैनाती नहीं की।
करमपुर चौधरी में आठ साल पहले राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत स्वास्थ्य उपकेंद्र बनाया गया था। इसके निर्माण के तीन साल बाद इसी अस्पताल में तत्कालीन विधायक शहजिल इस्लाम ने एएनएम सेंटर का शुभारंभ किया था। गांव वाले कहते हैं कि एएनएम सेंटर के शुभारंभ से उनमें एक उम्मीद जगी थी कि उन्हें अब गांव में ही स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकेंगी लेकिन एक-एक साल बीतता गया, न अस्पताल में एक भी कर्मचारी की तैनाती हुई न कोई अफसर अस्पताल का हाल देखने आया। धीरे-धीरे अस्पताल की इमारत जर्जर हो गई। शौचालय और खिड़कियां भी टूट गईं। दरवाजे लटकर झूलने लगे हैं।
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अस्पताल लोगों का इलाज नहीं कर पाया तो बकरी और कुत्तों ने उसे अपना डेरा बना लिया। गांव के लोगों ने भी अस्पताल के सामने गोबर और रेत डालनी शुरू कर दी। गांव वाले कहते हैं कि अस्पताल में स्टाफ न होने के कारण उन्हें भोजीपुरा ब्लॉक जाना पड़ता है। उन्होंने कई बार अफसरों से स्वास्थ्य उपकेंद्र में डॉक्टर और स्टाफ की तैनाती की मांग की लेकिन किसी ने नहीं सुना।
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इन लोगों की हुई मौत

बबलू, वीरेंद्र, राजेंद्र, सागर की मां, वली मोहम्मद की भाभी, नौशे खां की पत्नी, शराफत की पुत्रवधू, रामप्रसाद की पत्नी, निजाम की मां, डॉ. यूसुफ की चाची और नज्जू खां के बेटे की पिछले कुछ दिनों में मौत हुई है। इसके अलावा करीब दस और लोगों की मौत होना बताई जा रही है।

नहीं सुनते अफसर  

अस्पताल के बराबर में हमारा घर है। जब से अस्पताल बना है तबसे कुत्ते और बकरी ही यहां रहते हैं। अगर अस्पताल में स्टाफ तैनात हो जाए तो काफी राहत मिल सकती है।- वाहिद खां

अस्पताल में स्टाफ तैनात होता तो यह लाखों रुपये से बनी इमारत जर्जर नहीं होती। गांव में अस्पताल बना है लेकिन फिर भी गांव वालों को इलाज झोलाछापों से ही कराना पड़ता है। - अहमद अली

स्वास्थ्य सेवाओं पर करोड़ों का बजट खर्च करने की बात कही जाती है लेकिन अधिकारियों की लापरवाही से सेंटर पर स्टाफ तक तैनात नहीं है। अस्पताल में स्टाफ तैनात होगा तभी ग्रामीणों को इसका लाभ मिलेगा। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से इसकी मांग करेंगे। - दिलीप रस्तोगी, भाजपा कार्यकर्ता



गांव के बच्चों को बुखार या छोटी-मोटी समस्याएं होने पर भोजीपुरा ब्लॉक दौड़ना पड़ता है। गांव में महामारी के दौरान 15 से ज्यादा लोगों की मौतें हो चुकी हैं। स्थानीय स्तर पर ही अस्पताल में सुविधाएं मिलती तो गांव वालों को दौड़ न लगानी पड़ती। - ताहिर

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