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सीएम की घोषणा वाले तो प्रोजेक्ट लटके हैं
ब्ययूराो, अमर उजाला बरेली।
Updated Fri, 06 May 2016 12:52 AM IST
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बरेली-बदायूं फोरलेन रोड का उद्घाटन करने के लिए मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का 23 मई को बरेली आना तय हो चुका है। पिछले दौरों में सीएम की घोषणा में शामिल अधिकांश प्रोेजेक्ट किसी न किसी वजह से लटके पड़े हैं।
बरेली-बदायूं फोरलेन
दो साल पहले पीडब्ल्यूडी के प्रस्ताव पर 44.8 किलोमीटर लंबा बरेली-बदायूं रोड फोरलेन बनाने की स्वीकृति शासन से मिली थी। आगरा की पीएनसी कंपनी ने 244 करोड़ की लागत से ये सड़क फोरलेन की है। रोड पर अभी खामियां बरकरार हैं। बीच में दो फ्लाईओवर अभी नहीं बने। रोड के किनारे पटरी नहीं बनाई गई। इससे बरसात में पानी भरने से सड़क जल्दी उखड़ने का खतरा है। रोड के बीच में डिवाइडर बेहद पतला बनाया गया है। इससे दुघर्टनाएं बढ़ने की आशंका है।
बदायूं रोड बाईपास में तकनीकी पेंच
पिछले साल सीएम ने सपा जिलाध्यक्ष वीरपाल सिंह यादव की मांग पर बड़ा बाईपास से आईवीपी होते हुए बुखारा मोड तक 10 किलोमीटर लंबा फोरलेन रोड स्वीकृत किया था। पीडब्ल्यूडी ने 257 करोड़ का प्रोजेक्ट बनाकर शासन को भेजा। इसमें भी दो फ्लाईओवर बनने हैं जिसमें एक रेलवे का है। रेलवे ने ट्रैफिक कम होने का तर्क देकर फ्लाईओवर निर्माण में आपत्ति लगा दी। पीडब्ल्यूडी ने अब दोबारा टू लेन सड़क का आगणन 125 करोड़ का बनाया है। इस बाईपास के बनने में किसानों की जमीनें आ रही हैं। उनका अधिग्रहण करना पड़ेगा। भूमि अधिग्रहण में पीडब्ल्यूडी को 40 करोड़ रुपये किसानों को देने का प्रस्ताव है। फिलहाल, ये प्रोजेक्ट तकनीकी पेंच के चलते उलझ चुका है।
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समाजवादी आवास भी नहीं बन पाए
मुख्यमंत्री ने 26 जनवरी 2015 को लखनऊ में समाजवादी आवास योजना शुरू की थी। इसमें मध्यमवर्गीय परिवारों को सस्ती कीमतों में आवास उपलब्ध कराए जाने थे। बरेली विकास प्राधिकरण ने रामगंगा नगर में दो बार समाजवादी आवास बनाने का प्रोजेक्ट बनाया। दोनों ही बार मकानों की बुकिंग नहीं हुई। बाद में इज्जत बचाने के लिए किसी तरह 70 आवासों का प्रोजेक्ट बनाया गया। आउटसाइड एरिया में मकानों की कीमत ज्यादा होने से ग्राहक इनकी बुकिंग में रुचि नहीं ले रहे। अभी ये आवास आधे अधूरे ही बने हैं।
फोरलेन और साइकिल ट्रैक बदहाल
मुख्यमंत्री की प्राथमिकता में शामिल फोरलेन और साइकिल ट्रैक बनाने के लिए बीडीए ने शहामतगंज से सेटेलाइट तक 6.5 करोड़ की कार्ययोजना बनाई। ये प्रोजेक्ट छह महीने में पूरा होना था। एक साल बाद भी बिना अतिक्रमण हटाए किसी तरह कोलतार और बजरी चिपकाकर फोरलेन की खानापूरी कर दी गई। एस्टीमेट में फोरलेन 14 सौ मीटर है जबकि मौके पर 11 सौ मीटर से भी कम। साइकिल ट्रैक तो तीन सौ मीटर भी नहीं बना है। पूरे साइकिल ट्रैक पर मोटर मिस्त्रियों और ऑटो वालों ने कब्जा कर रखा है। बीडीए ने पूरा प्रोजेक्ट खानापूरी की तरह निपटाकर 6.5 करोड़ ठिकाने लगा दिए।
नया रोडवेज बस अड्डा
नगर निगम पार्षद गौरव सक्सेना ने सेंट्रल जेल की जमीन पर नया रोडवेज बस अड्डा बनाने की मांग 11 फरवरी को की थी। डीएम ने राज्य सड़क परिवहन निगम के क्षेत्रीय प्रबंधक को पत्र लिखकर इस बारे में जानकारी मांगी थी। सेंट्रल जेल की 40 बीघा जमीन पर कूड़े का डलाव समेत अन्य तरह से अतिक्रमण किया जा रहा है। अगर यहां नया रोडवेज बस अड्डा बनता है तो नैनीताल और दिल्ली रूट पर बसों का आवागमन आसान हो जाएगा। शहर को जाम से भी मुक्ति मिलेगी। बरेली आगमन पर सीएम से नये रोडवेज बस अड्डा निर्माण के अलावा बीएसए के पुराने दफ्तर में कन्या डिग्री कालेज खोलने की घोषणा कराने के लिए भी प्रयास किया जा रहा है।
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बरेली-बदायूं फोरलेन
दो साल पहले पीडब्ल्यूडी के प्रस्ताव पर 44.8 किलोमीटर लंबा बरेली-बदायूं रोड फोरलेन बनाने की स्वीकृति शासन से मिली थी। आगरा की पीएनसी कंपनी ने 244 करोड़ की लागत से ये सड़क फोरलेन की है। रोड पर अभी खामियां बरकरार हैं। बीच में दो फ्लाईओवर अभी नहीं बने। रोड के किनारे पटरी नहीं बनाई गई। इससे बरसात में पानी भरने से सड़क जल्दी उखड़ने का खतरा है। रोड के बीच में डिवाइडर बेहद पतला बनाया गया है। इससे दुघर्टनाएं बढ़ने की आशंका है।
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बदायूं रोड बाईपास में तकनीकी पेंच
पिछले साल सीएम ने सपा जिलाध्यक्ष वीरपाल सिंह यादव की मांग पर बड़ा बाईपास से आईवीपी होते हुए बुखारा मोड तक 10 किलोमीटर लंबा फोरलेन रोड स्वीकृत किया था। पीडब्ल्यूडी ने 257 करोड़ का प्रोजेक्ट बनाकर शासन को भेजा। इसमें भी दो फ्लाईओवर बनने हैं जिसमें एक रेलवे का है। रेलवे ने ट्रैफिक कम होने का तर्क देकर फ्लाईओवर निर्माण में आपत्ति लगा दी। पीडब्ल्यूडी ने अब दोबारा टू लेन सड़क का आगणन 125 करोड़ का बनाया है। इस बाईपास के बनने में किसानों की जमीनें आ रही हैं। उनका अधिग्रहण करना पड़ेगा। भूमि अधिग्रहण में पीडब्ल्यूडी को 40 करोड़ रुपये किसानों को देने का प्रस्ताव है। फिलहाल, ये प्रोजेक्ट तकनीकी पेंच के चलते उलझ चुका है।
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समाजवादी आवास भी नहीं बन पाए
मुख्यमंत्री ने 26 जनवरी 2015 को लखनऊ में समाजवादी आवास योजना शुरू की थी। इसमें मध्यमवर्गीय परिवारों को सस्ती कीमतों में आवास उपलब्ध कराए जाने थे। बरेली विकास प्राधिकरण ने रामगंगा नगर में दो बार समाजवादी आवास बनाने का प्रोजेक्ट बनाया। दोनों ही बार मकानों की बुकिंग नहीं हुई। बाद में इज्जत बचाने के लिए किसी तरह 70 आवासों का प्रोजेक्ट बनाया गया। आउटसाइड एरिया में मकानों की कीमत ज्यादा होने से ग्राहक इनकी बुकिंग में रुचि नहीं ले रहे। अभी ये आवास आधे अधूरे ही बने हैं।
फोरलेन और साइकिल ट्रैक बदहाल
मुख्यमंत्री की प्राथमिकता में शामिल फोरलेन और साइकिल ट्रैक बनाने के लिए बीडीए ने शहामतगंज से सेटेलाइट तक 6.5 करोड़ की कार्ययोजना बनाई। ये प्रोजेक्ट छह महीने में पूरा होना था। एक साल बाद भी बिना अतिक्रमण हटाए किसी तरह कोलतार और बजरी चिपकाकर फोरलेन की खानापूरी कर दी गई। एस्टीमेट में फोरलेन 14 सौ मीटर है जबकि मौके पर 11 सौ मीटर से भी कम। साइकिल ट्रैक तो तीन सौ मीटर भी नहीं बना है। पूरे साइकिल ट्रैक पर मोटर मिस्त्रियों और ऑटो वालों ने कब्जा कर रखा है। बीडीए ने पूरा प्रोजेक्ट खानापूरी की तरह निपटाकर 6.5 करोड़ ठिकाने लगा दिए।
नया रोडवेज बस अड्डा
नगर निगम पार्षद गौरव सक्सेना ने सेंट्रल जेल की जमीन पर नया रोडवेज बस अड्डा बनाने की मांग 11 फरवरी को की थी। डीएम ने राज्य सड़क परिवहन निगम के क्षेत्रीय प्रबंधक को पत्र लिखकर इस बारे में जानकारी मांगी थी। सेंट्रल जेल की 40 बीघा जमीन पर कूड़े का डलाव समेत अन्य तरह से अतिक्रमण किया जा रहा है। अगर यहां नया रोडवेज बस अड्डा बनता है तो नैनीताल और दिल्ली रूट पर बसों का आवागमन आसान हो जाएगा। शहर को जाम से भी मुक्ति मिलेगी। बरेली आगमन पर सीएम से नये रोडवेज बस अड्डा निर्माण के अलावा बीएसए के पुराने दफ्तर में कन्या डिग्री कालेज खोलने की घोषणा कराने के लिए भी प्रयास किया जा रहा है।