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महायोजना-2031 : आपत्ति-सुझाव देने का आज अंतिम दिन
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बरेली। महायोजना-2031 पर आपत्ति और सुझाव देने की आज अंतिम तारीख है। शहर के लोग या संस्थाएं यदि बरेली विकास प्राधिकरण को शहर के विकास के संबंध में कोई सुझाव देना चाहते हैं या किसी बिंदु पर आपत्ति दर्ज कराना चाहते हैं तो आज आखिरी मौका है। अब तक करीब आठ सौ आपत्तियां/सुझाव मिले हैं।
महायोजना-2031 के प्रस्तावित ड्राफ्ट पर अब तक करीब आठ सौ आपत्तियां और सुझाव आए हैं। इनमें से नब्बे फीसदी सुझाव कृषि भूमि के श्रेणी परिवर्तन को लेकर हैं। इनमें कृषि भूमि को आवासीय और व्यावसायिक श्रेणी में बदलने का आग्रह किया गया है। ड्राफ्ट पर सुझाव देने की आखिरी तारीख पहले सात अप्रैल थी, लेकिन बाद में शासन ने इसे बढ़ाकर 14 अप्रैल कर दिया। यानी बृहस्पतिवार को अंतिम तिथि है।
बाजार स्ट्रीट बनाने का भी सुझाव
प्रांतीय उद्योग व्यापार मंडल की ओर से शहर में मुख्य सड़कों पर बाजार स्ट्रीट बनाने का सुझाव दिया गया है। इसमें संजयनगर, प्रेमनगर से जुड़ी सड़कें, कुदेशिया फाटक, नैनीताल रोड, मिनी बाईपास, चौकी चौराहा, कंपनी बाग, डेलापीर से आईवीआरआई रोड शामिल है।
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परसाखेड़ा के पास बनाया जाए ट्रांसपोर्ट नगर
सेंट्रल यूपी चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री सोसाइटी की ओर से दिए गए सुझाव में कहा गया है कि एक छोटा ट्रांसपोर्टनगर परसाखेड़ा के पास बनाया जाए। इससे ट्रांसपोर्ट और रेलवे साइडिंग पर यहां के गोदामों से माल पहुंचाने में आसानी होगी। शहर में जाम से भी राहत मिलेगी। इसके अलावा आईटीआर कंपनी की पुरानी रेलवे लाइन पर एक और मिनी बाईपास बनाकर रामपुर और नैनीताल रोड को सुंदर बनाने का भी सुझाव दिया गया है। सोसाइटी ने यह भी कहा है कि शहर के अंदर की सड़कें ग्रीन बेल्ट से पूरी तरह मुक्त हों। कंपाउंडिंग प्रक्रिया का सरलीकरण किया जाए। दोहना रेलवे रोड पर हरित पट्टी संभव नहीं है। इन बिंदुओं पर बीडीए को दोबारा विचार करना चाहिए।
अवैध निर्माणों का साफ जिक्र
चैबर्स ऑफ कॉमर्स इंडस्ट्री की ओर से दिए गए सुझाव में कहा गया है कि महायोजना-2031 में सभी अवैध निर्माणों का जिक्र होना चाहिए, ताकि बाद में अवैध निर्माणकर्ता उसका लाभ न ले सकें। उन्हाेंने कहा कि 45 वर्षों से बीडीए ने महायोजना में जोनल डेवलपमेंट तैयार नहीं किया है, जबकि महायोजना का क्रियान्वन जोनल डेवलपमेंट से ही संभव है, इसलिए इस महायोजना के ड्राफ्ट में जोनल डेवलपमेंट प्लान होना बहुत जरूरी है।
हरियाली पर न चले आरी, बढ़ाने पर हो जोर
जागर जन कल्याण समिति की ओर दिए गए सुझावों में कहा गया है कि आवासीय, व्यावसायिक, औद्योगिक और शांत क्षेत्रों में शैक्षिक संस्थान, अस्पताल और न्यायालय का निर्धारण करते समय परिवेशी वायु गुणवत्ता और ध्वनि संबंधी मानकों को ध्यान में रखा जाए। शहर में पार्किंग बड़ी समस्या है। इसके अलावा डेयरियों को शहर से बाहर बसाने का प्रावधान किया जाए। हरित पट्टी में भू-उपयोग बदलकर किसी भी निर्माण की अनुमति हरगिज न दी जाए। औद्योगिक क्षेत्र और आवासीय क्षेत्र के बीच कम से कम एक किलोमीटर चौड़ी हरित पट्टी बनाई जाए।
सात जनवरी को हुई थी पहली बैठक
सात जनवरी को मंडलायुक्त सभागार में महायोजना-2031 का ड्राफ्ट रखा गया था। इसमें हाईवे से सौ मीटर दूरी तक ग्रीन बेल्ट को घटाकर तीस मीटर करने, निर्मित क्षेत्र में 15 मीटर की गहराई तक बाजार स्ट्रीट भू-उपयोग और निर्मित क्षेत्र के बाहर 18 मीटर से अधिक चौड़ी सड़कों पर भी बाजार स्ट्रीट भू-उपयोग तैयार करने का प्रावधान बीडीए ने किया था। इसके अलावा नए औद्योगिक क्षेत्र और ट्रांसपोर्ट नगर भी प्रस्तावित किए गए। इसके अलावा बीसलपुर रोड से नकटिया तक रोड बनाने का सुझाव दिया था।
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महायोजना-2031 के प्रस्तावित ड्राफ्ट पर अब तक करीब आठ सौ आपत्तियां और सुझाव आए हैं। इनमें से नब्बे फीसदी सुझाव कृषि भूमि के श्रेणी परिवर्तन को लेकर हैं। इनमें कृषि भूमि को आवासीय और व्यावसायिक श्रेणी में बदलने का आग्रह किया गया है। ड्राफ्ट पर सुझाव देने की आखिरी तारीख पहले सात अप्रैल थी, लेकिन बाद में शासन ने इसे बढ़ाकर 14 अप्रैल कर दिया। यानी बृहस्पतिवार को अंतिम तिथि है।
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बाजार स्ट्रीट बनाने का भी सुझाव
प्रांतीय उद्योग व्यापार मंडल की ओर से शहर में मुख्य सड़कों पर बाजार स्ट्रीट बनाने का सुझाव दिया गया है। इसमें संजयनगर, प्रेमनगर से जुड़ी सड़कें, कुदेशिया फाटक, नैनीताल रोड, मिनी बाईपास, चौकी चौराहा, कंपनी बाग, डेलापीर से आईवीआरआई रोड शामिल है।
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परसाखेड़ा के पास बनाया जाए ट्रांसपोर्ट नगर
सेंट्रल यूपी चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री सोसाइटी की ओर से दिए गए सुझाव में कहा गया है कि एक छोटा ट्रांसपोर्टनगर परसाखेड़ा के पास बनाया जाए। इससे ट्रांसपोर्ट और रेलवे साइडिंग पर यहां के गोदामों से माल पहुंचाने में आसानी होगी। शहर में जाम से भी राहत मिलेगी। इसके अलावा आईटीआर कंपनी की पुरानी रेलवे लाइन पर एक और मिनी बाईपास बनाकर रामपुर और नैनीताल रोड को सुंदर बनाने का भी सुझाव दिया गया है। सोसाइटी ने यह भी कहा है कि शहर के अंदर की सड़कें ग्रीन बेल्ट से पूरी तरह मुक्त हों। कंपाउंडिंग प्रक्रिया का सरलीकरण किया जाए। दोहना रेलवे रोड पर हरित पट्टी संभव नहीं है। इन बिंदुओं पर बीडीए को दोबारा विचार करना चाहिए।
अवैध निर्माणों का साफ जिक्र
चैबर्स ऑफ कॉमर्स इंडस्ट्री की ओर से दिए गए सुझाव में कहा गया है कि महायोजना-2031 में सभी अवैध निर्माणों का जिक्र होना चाहिए, ताकि बाद में अवैध निर्माणकर्ता उसका लाभ न ले सकें। उन्हाेंने कहा कि 45 वर्षों से बीडीए ने महायोजना में जोनल डेवलपमेंट तैयार नहीं किया है, जबकि महायोजना का क्रियान्वन जोनल डेवलपमेंट से ही संभव है, इसलिए इस महायोजना के ड्राफ्ट में जोनल डेवलपमेंट प्लान होना बहुत जरूरी है।
हरियाली पर न चले आरी, बढ़ाने पर हो जोर
जागर जन कल्याण समिति की ओर दिए गए सुझावों में कहा गया है कि आवासीय, व्यावसायिक, औद्योगिक और शांत क्षेत्रों में शैक्षिक संस्थान, अस्पताल और न्यायालय का निर्धारण करते समय परिवेशी वायु गुणवत्ता और ध्वनि संबंधी मानकों को ध्यान में रखा जाए। शहर में पार्किंग बड़ी समस्या है। इसके अलावा डेयरियों को शहर से बाहर बसाने का प्रावधान किया जाए। हरित पट्टी में भू-उपयोग बदलकर किसी भी निर्माण की अनुमति हरगिज न दी जाए। औद्योगिक क्षेत्र और आवासीय क्षेत्र के बीच कम से कम एक किलोमीटर चौड़ी हरित पट्टी बनाई जाए।
सात जनवरी को हुई थी पहली बैठक
सात जनवरी को मंडलायुक्त सभागार में महायोजना-2031 का ड्राफ्ट रखा गया था। इसमें हाईवे से सौ मीटर दूरी तक ग्रीन बेल्ट को घटाकर तीस मीटर करने, निर्मित क्षेत्र में 15 मीटर की गहराई तक बाजार स्ट्रीट भू-उपयोग और निर्मित क्षेत्र के बाहर 18 मीटर से अधिक चौड़ी सड़कों पर भी बाजार स्ट्रीट भू-उपयोग तैयार करने का प्रावधान बीडीए ने किया था। इसके अलावा नए औद्योगिक क्षेत्र और ट्रांसपोर्ट नगर भी प्रस्तावित किए गए। इसके अलावा बीसलपुर रोड से नकटिया तक रोड बनाने का सुझाव दिया था।