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कान्हा गोशाला : करोड़ों की रकम दबाए बैठे सभी नौ निकायों के ईओ
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बरेली। बेसहारा गोवंशीय पशुओं को सीएम योगी सहारा देते चाहते हैं। इसके लिए शासन की ओर से सभी नौ स्थानीय निकायों को बजट भी आवंटित किया गया था. लेकिन ईओ यह रकम दबाकर बैठ गए। कुछ जगहों पर भूमि के चयन में गड़बड़ी पहले सामने आ चुकी है तो कई जगहों पर काम शुरू कराने के लिए टेंडर तक नहीं कराए गए हैं। इस लापरवाही पर एडीएम प्रशासन ने सभी ईओ को नोटिस जारी किया है।
सभी निकायों में 3500 वर्गमीटर भूमि पर 500 गोवंशीय पशुओं के लिए कान्हा गौशाला का निर्माण कराया जाना है। प्रत्येक निकाय को 1.65 करोड़ रुपये की धनराशि शासन से पहले ही जारी हो चुकी है। स्थानीय निकायों के अधिशासी अधिकारियों ने टेंडर कराने के बजाय करोड़ों की रकम ही दबाकर कर बैठ गए हैं। एडीएम प्रशासन वीके सिंह को ये पता चला है कि गोशाला का निर्माण ही नहीं कराया गया है। इसके बाद एडीएम ने नगर पालिका बहेड़ी व आंवला और नगर पंचायत धौराटांडा, शाही, ठिरिया निजावत खां, मीरगंज, फतेहगंज पश्चिमी और शीशगढ़ के अधिशासी अधिकारियों से तीन बिंदुओं स्पष्टीकरण मांगा है।
इन बिंदुओं पर सभी ईओ से मांगा गया जवाब
गोशाला के लिए चिह्नित भूमि की खतौनी, गाटा संख्या और क्षेत्रफल के साथ भूमि के प्रकार का विवरण।
ई-टेंडर की विज्ञप्ति कब जारी की गई और टेंडर किस तारीख में खोले गए।
कान्हा गोशाला बनाने के लिए कब आदेश जारी किए गए और अब तक कितना काम हुआ, इसका पूरा विवरण।
‘गोशाला के निर्माण को लेकर ईओ की लापरवाही सामने आई है। कुछ जगह जमीनों के चयन में गड़बड़ी तो हुई है तो अन्य जगहों पर बजट स्वीकृत होने के बावजूद निर्माण के लिए टेंडर तक नहीं कराए गए हैं। इसके लिए ईओ से स्पष्टीकरण मांगा गया है।’ - वीके सिंह, एडीएम प्रशासन
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सभी निकायों में 3500 वर्गमीटर भूमि पर 500 गोवंशीय पशुओं के लिए कान्हा गौशाला का निर्माण कराया जाना है। प्रत्येक निकाय को 1.65 करोड़ रुपये की धनराशि शासन से पहले ही जारी हो चुकी है। स्थानीय निकायों के अधिशासी अधिकारियों ने टेंडर कराने के बजाय करोड़ों की रकम ही दबाकर कर बैठ गए हैं। एडीएम प्रशासन वीके सिंह को ये पता चला है कि गोशाला का निर्माण ही नहीं कराया गया है। इसके बाद एडीएम ने नगर पालिका बहेड़ी व आंवला और नगर पंचायत धौराटांडा, शाही, ठिरिया निजावत खां, मीरगंज, फतेहगंज पश्चिमी और शीशगढ़ के अधिशासी अधिकारियों से तीन बिंदुओं स्पष्टीकरण मांगा है।
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इन बिंदुओं पर सभी ईओ से मांगा गया जवाब
गोशाला के लिए चिह्नित भूमि की खतौनी, गाटा संख्या और क्षेत्रफल के साथ भूमि के प्रकार का विवरण।
ई-टेंडर की विज्ञप्ति कब जारी की गई और टेंडर किस तारीख में खोले गए।
कान्हा गोशाला बनाने के लिए कब आदेश जारी किए गए और अब तक कितना काम हुआ, इसका पूरा विवरण।
‘गोशाला के निर्माण को लेकर ईओ की लापरवाही सामने आई है। कुछ जगह जमीनों के चयन में गड़बड़ी तो हुई है तो अन्य जगहों पर बजट स्वीकृत होने के बावजूद निर्माण के लिए टेंडर तक नहीं कराए गए हैं। इसके लिए ईओ से स्पष्टीकरण मांगा गया है।’ - वीके सिंह, एडीएम प्रशासन
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