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साल भर से भूले बैठे हैं लाल निशान, वेल्डिंग सिलेंडर फटा तो मचेगा कोहराम
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बरेली। स्मार्ट सिटी बनने जा रहा अपना शहर फिलहाल खतरे में है। अतिक्रमण से घिरी सड़कों पर नगर निगम की टीमें लाल निशान लगाने निकलती हैं तो अफरातफरी मचती है लेकिन फिर सबकुछ अचानक शांत हो जाता है। हद यह है कि सरकारी जमीनों पर सीमेंटेड निर्माण कराने वाले अब सड़कों को खतरनाक कारोबार के लिए इस्तेमाल करने से भी नहीं चूक रहे। कलक्ट्रेट के पास ही सड़कों पर खुलेआम वेल्डिंग की जा रही है। हादसा होने का हर वक्त डर है लेकिन फिर भी किसी को कोई परवाह नहीं है।
कलक्ट्रेट और तहसील गेट से लेकर जंक्शन तक पक्के अवैध कब्जों की भरमार है जिन्हें साफ करने के लिए हर साल कम से कम दो बार लाल निशान भी लगाए जाते हैं। अतिक्रमण की चपेट में आबकारी भवन भी है। डीएम आवास के सामने व्यापारिक प्रतिष्ठान और आवासीय भवन है। तहसील गेट और शराब गोदाम से आगे दोनों स्थानों पर 50 से ज्यादा पक्की दुकानें हैं। तहसील गेट पर ज्यादातर अवैध कब्जेदार सड़क पर अवैध पार्किंग कराने के साथ कारोबार भी कर रहे हैं। गैस सिलेंडरों को सड़क पर ही रखकर वेल्डिंग जैसे खतरनाक काम तक किए जा रहे हैं।
इस वजह से हादसों की आशंका तो है ही, रास्ता तंग होने की वजह से दिन भर जाम भी लगा रहता है। लेकिन फिर भी इसे कोई नोटिस में नहीं लेता। तहसील गेट पर कुल मिलाकर दो दर्जन से ज्यादा पक्के अतिक्रमण हैं। शराब गोदाम से आगे बढ़ें तो यहां भी दो दर्जन से ज्यादा पक्की दुकानें सालों से सरकारी जमीन पर कब्जा किए हुए हैं। इन अतिक्रमणकारियों ने लाल निशान भी मिटा डाले हैं।
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पिछले साल कलक्ट्रेट से जंक्शन तक लाल निशान लगाए गए थे। करीब 50 पक्की दुकानें भी अतिक्रमण दायरे में हैं। अतिक्रमणकारियों को अतिक्रमण हटाने की चेतावनी भी दी गई है। अभियान में इसे फिर शामिल करेेंगे। - ललतेश सक्सेना, अतिक्रमण हटाओ अभियान प्रभारी नगर निगम
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कलक्ट्रेट और तहसील गेट से लेकर जंक्शन तक पक्के अवैध कब्जों की भरमार है जिन्हें साफ करने के लिए हर साल कम से कम दो बार लाल निशान भी लगाए जाते हैं। अतिक्रमण की चपेट में आबकारी भवन भी है। डीएम आवास के सामने व्यापारिक प्रतिष्ठान और आवासीय भवन है। तहसील गेट और शराब गोदाम से आगे दोनों स्थानों पर 50 से ज्यादा पक्की दुकानें हैं। तहसील गेट पर ज्यादातर अवैध कब्जेदार सड़क पर अवैध पार्किंग कराने के साथ कारोबार भी कर रहे हैं। गैस सिलेंडरों को सड़क पर ही रखकर वेल्डिंग जैसे खतरनाक काम तक किए जा रहे हैं।
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इस वजह से हादसों की आशंका तो है ही, रास्ता तंग होने की वजह से दिन भर जाम भी लगा रहता है। लेकिन फिर भी इसे कोई नोटिस में नहीं लेता। तहसील गेट पर कुल मिलाकर दो दर्जन से ज्यादा पक्के अतिक्रमण हैं। शराब गोदाम से आगे बढ़ें तो यहां भी दो दर्जन से ज्यादा पक्की दुकानें सालों से सरकारी जमीन पर कब्जा किए हुए हैं। इन अतिक्रमणकारियों ने लाल निशान भी मिटा डाले हैं।
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पिछले साल कलक्ट्रेट से जंक्शन तक लाल निशान लगाए गए थे। करीब 50 पक्की दुकानें भी अतिक्रमण दायरे में हैं। अतिक्रमणकारियों को अतिक्रमण हटाने की चेतावनी भी दी गई है। अभियान में इसे फिर शामिल करेेंगे। - ललतेश सक्सेना, अतिक्रमण हटाओ अभियान प्रभारी नगर निगम