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पहले कमरे तोड़ो तब देखेंगे कितना और बचा

Wed, 16 Oct 2019 06:20 PM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Wed, 16 Oct 2019 06:20 PM IST
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Civic Amenities
बरेली। राजेंद्र नगर में जिस सूरजभान कॉलेज की बिल्डिंग तोड़ने के लिए जिला प्रशासन 15 अक्तूबर की तारीख मुकरर्र कर चुका था, उसे भी सुभाषनगर के पटाखा बाजार की तरह ऐन मौके पर ‘दिवाली गिफ्ट’ दे दिया गया। मंगलवार को प्रशासन और आवास विकास परिषद के अफसरों की टीम सूरजभान कॉलेज पहुंची जरूर लेकिन अवैध कब्जा तोड़ने नहीं बल्कि सिर्फ देखने। गेट का ताला तुड़वाकर अंदर घुसी टीम ने मुआयना करने के बाद प्रबंधन पर जमकर दबाव बनाया। सिर्फ छज्जे को अवैध बताकर उसे कई दिनों से तुड़वा रहे प्रबंधन के लोगों से दो टूक कहा कि फिलहाल इमारत के साठ कमरे तुड़वाने होंगे। इसके बाद फिर मुआयना कर तय किया जाएगा कि उसका कितना और हिस्सा तोड़ा जाना है।
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सूरजभान के प्रबंधन पर प्राइमरी स्कूल के लिए आवास विकास परिषद से जमीन आवंटित कराकर विशाल इमारत बनाकर डिग्री कॉलेज समेत कई शिक्षा संस्थान बना लेने का आरोप है। इसके अलावा इसी इमारत में एक बैंक की शाखा भी खुलवा दी गई है। हाईकोर्ट के साथ शासन से भी इस इमारत को अवैध बताते हुए दो बार पहले तोड़ने का आदेश जारी हो चुका है लेकिन प्रबंधन ने आवास विकास परिषद के अफसरों को मैनेज कर इमारत को टूटने से बचा लिया। इस बार फिर शासन से उसे तोड़ने का आदेश आया तो जिला प्रशासन की ओर से इसके लिए 15 अक्तूबर की तारीख भी मुकरर्र कर दी गई। सोमवार को आवास विकास के अफसरों ने प्रेमनगर पुलिस को भी तैयार रहने के लिए सूचित कर दिया। इस बीच सूरजभान प्रबंधन के लोगों ने अपने छज्जे को अवैध बताकर उसे एक मजदूर लगाकर तुड़वाना शुरू कर दिया। सोमवार को वे डीएम और आवास विकास के अफसरों से भी मिले। सोमवार तक अफसर बिल्डिंग तुड़वाने पर अड़े हुए थे लेकिन फिर अचानक मामला पलट गया।
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मंगलवार सुबह से सूरजभान परिसर में सरगर्मियां बढ़ गईं। छज्जा तोड़ने के लिए प्रबंधन ने कुछ मजदूर भी बढ़ा दिए। इसके साथ प्रबंधन के लोग ध्वस्तीकरण की कार्रवाई से बचने के लिए प्रशासन के अफसरों से संपर्क साधने में भी जुटा रहा। डीएम वीरेंद्र कुमार सिंह ने इन लोगों को एडीएम सिटी से मिलने को कह दिया। यह भी कहा कि अगर अवैध बिल्डिंग खुद तोड़ लेंगे तो प्रशासन कार्रवाई नहीं करेगा। प्रबंधन ने बताया कि स्कूल में बच्चे पढ़ रहे हैं इसलिए तोड़फोड़ में समय लगेगा। डीएम ने कहा कि अफसर मौके पर निरीक्षण करने पहुंचेंगे और आंकलन करेंगे कि अवैध बिल्डिंग तोड़ने की कार्रवाई सही चल रही या नहीं। इसकी रिपोर्ट भी निरीक्षण करने वाले अफसर देंगे।
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बिल्डिंग नहीं तोड़ी, दबाव पूरा बना दिया
डीएम ने सोमवार शाम कहा था कि प्रबंधन अगर खुद अवैध बिल्ंिडग तोड़ लेगा तो सरकारी तंत्र उसे ध्वस्त नहीं करेगा। मंगलवार सुबह प्रशासन और पुलिस टीम को मौके पर पहुंचना था लेकिन टालमटोल शुरू हो गई। जिला प्रशासन ने परिषद अफसरों से कहा कि वे तहसील दिवस यानी दोपहर दो बजे के बाद संयुक्त निरीक्षण करें, शिक्षा विभाग से भी अफसर बुलाए गए। शाम चार बजे के बाद एसडीएम सदर अमरेश कुमार अपने आवास पर मिले, तब कहीं संयुक्त टीम राजेंद्रनगर रवाना हुई। वहां मौके पर गेट पर ताला लगा मिला। प्रबंधन से ताला खोलने को कहा तो वह बहानेबाजी करने लगा। इस पर एसडीएम सदर ने ताला तुड़वा दिया। इसके बाद संयुक्त टीम ने अवैध बिल्ंिडग का निरीक्षण किया। मौके पर कुछ तोड़ा गया छज्जा देखा। अफसरों ने कहा कि छज्जा गिराने से ही काम नहीं चलेगा, पहले पूरे 60 कमरे गिराओ, इसके बाद नापजोख कर पता चलेगा कि कितना और अवैध हिस्सा बचा है।
प्रशासन के अल्टीमेटम के बाद भी खुला रहा स्कूल
प्रबंधन जानता था कि तय तिथि पर ध्वस्तीकरण कार्रवाई नहीं होगी। इसलिए स्कूल में अवकाश नहीं किया और ना ही परिसर खाली हुआ। स्कूल प्रबंधन ने सभी सुरक्षा नियम ताक पर रखकर दूसरे दिन भी छज्जा तोड़ना जारी रखा। ऊपर छत पर तोड़फोड़ नीचे बच्चे, कोई भी अप्रिय घटना से प्रबंधन जानबूझकर बेखबर ही दिखा।
केनरा बैंक को भी एक सप्ताह का समय और मिला
अवैध बिल्ंिडग में कामर्शियल बैंक खुलने के घोटाले में घिरे केनरा बैंक प्रबंधन को अभी तक कोई राहत नहीं मिल पाई है। क्षेत्रीय प्रबंधक केनरा बैंक अभिताभ साहू और ब्रांच मैनेजर जिला प्रशासन से मदद मांगने पहुंचे, लेकिन बैंक अफसरों से कह दिया गया कि वे आवास विकास परिषद से संपर्क करें। दोपहर बाद परिषद अधिकारियों से संपर्क कर बैंक मैनेजरों ने ब्रांच शिफ्ट करने के छह माह का समय मांगा। परिषद अफसरों ने कहा कि एक सप्ताह से ज्यादा समय नहीं दिया जा सकता है। सुझाव दिया कि बैंक खाते और सिस्टम नजदीकी शाखा में शिफ्ट कर लें, अन्यथा मामला शीर्ष स्तर पर संदर्भित कर दिया जाएगा।

आगे उर्स और फिर दिवाली, कैसे होगी कार्रवाई
माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में प्रशासन की व्यस्तता बढ़ेगी और उसके बाद मामला ठंडे बस्ते में चला जाएगा। दरअसल 20 अक्तूबर के पहले ही दिवाली के लिए कानून-व्यवस्था को दुरुस्त रखने की तैयारी शुरू हो जाएगी। 23 अक्तूबर से आला हजरत का उर्स है और इस दौरान प्रशासन और पुलिस के अफसरों को सांस लेने की भी फुर्सत भी नहीं मिलेगी। इसके बाद अफसरों को दिवाली और उसके बाद कई और त्योहार कराने हैं। लिहाजा यह तय है कि प्रशासन का यह दिवाली गिफ्ट कम से कम दिवाली तक तो काम करेगा ही।
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