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सड़क छोड़िए.. उनका रिकॉर्ड भी दुरुस्त नहीं रख पा रहा पीडब्ल्यूडी

Sat, 21 Sep 2019 01:38 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sat, 21 Sep 2019 01:38 AM IST
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Civic Amenities
बरेली। कमिश्नर ने मंडलीय समीक्षा बैठक में पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों को निशाने पर लिया कि सड़कों का रिकॉर्ड सही से नहीं रखा जा रहा। इससे यह पता नहीं चल रहा कि कौन सी रोड मुख्य जिला सड़क (एमडीआर) और अन्य जिला सड़क (ओडीआर) है। इसके अलावा ग्रामीण और प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना से बनीं सड़कों के भी रिकॉर्ड सही से नहीं रखे जा रहे हैं। कमिश्नर ने पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों को फटकार लगाते हुए अभिलेखों को सात दिन के अंदर दुरुस्त करने के निर्देश दिए।
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आयुक्त सभागार में हुई बैठक में कमिश्नर रणवीर प्रसाद ने मंडल में गो-संरक्षण के प्रति संवेदनशील होकर कार्य करने के निर्देश दिया। कहा कि पूरे मंडल के जिलों में कान्हा पशु आश्रय में निराश्रित पशुओं को रखा जाए। शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में जो भी निराश्रित पशु मिले तो उन्हें पकड़ कर आश्रय स्थलों में रख जाए। जहां आश्रय स्थल नहीं हैं, वहां ग्राम पंचायतों से आश्रय स्थल खोले जाने के प्रस्ताव प्राप्त किए जाएं।
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मंडलायुक्त ने पूरे मंडल की सड़कों में गड्ढों को तत्काल भरने के निर्देश देते हुए कहा कि किसी भी सड़क पर गड्ढे नहीं मिलने चाहिए। इसके अलावा उन्होंने आरटीओ को निर्देश दिए कि वह सुनिश्चित करें कि पर्यावरण प्रमाण पत्र निर्गत करने वाली एजेंसियां गलत सर्टिफिकेट जारी न करने पाएं। उन्होंने कहा नगर निकायों में कूड़ा प्रबंधन के लिए के लिए भूमि अभी तक चयनित नहीं है। कमिश्नर ने निर्माण कार्यों की समीक्षा करते हुए संबंधित विभाग व नामित संस्थाओं को निर्देश दिए कि जो काम धनाभाव की वजह से रुके हैं, उनके लिए शासन में नियमित पैरवी की जाए। बैठक में डीएम बरेली वीरेंद्र कुमार सिंह, डीएम बदायूं दिनेश कुमार सिंह, डीएम पीलीभीत वैभव श्रीवास्तव, संयुक्त विकास आयुक्त सत्येंद्र नाथ चौधरी सहित कई अधिकारी मौजूद रहे।
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ओडीएफ की रिपोर्ट भेजने में न हो तो लीपापोती
कमिश्नर ने स्वच्छ शौचालय की प्रगति की समीक्षा में कहा कि मंडल के कुछ ग्रामों में जांच में पाया गया है कि कुछ लोगों ने शौचालय स्वयं बनाया है, किंतुु उनको भुगतान नहीं हुआ है। उन्होंने सीडीओ को निर्देश दिए कि ऐसे लोगों का सत्यापन कराया जाए और भुगतान किया जाए। इस संबंध में ग्राम प्रधानों के खाते में भेजी गई धनराशि की भी जांच कराई जाए। अधिकारी ओडीएफ की सही रिपोर्ट भेजे। इसमें लीपापोती बर्दास्त नहीं की जाएगी।
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