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निराश मत हो बाबूराम! .. साहब को एक दिन करना ही पड़ेगा काम
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बरेली। नगर निगम के भुगतान लटकाने से परेशान बाबूराम हताश होने लगे हैं। उनका कहना है कि वह कैसे बच्चों की फीस जमा करें और कैसे अन्य जिम्मेदारियां निभाएं। कहीं उन्हें भी पीडब्ल्यूडी के ठेकेदार की तरह कोई कदम न उठाना पड़ जाए। वहीं, नगर निगम अधिकारी इस मामले में अभी फाइल-फाइल खेलने की तैयारी में है। इसके चलते यह मामला गंभीर होता जा रहा है।
पिछले साले स्वतंत्र दिवस के अवसर पर नगर निगम ने शहर में तमाम स्थानों पर हजारों पौधे लगवाए थे। इसके बाद जनवरी 2019 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आगमन की सुगबुगाहट पर भी चौपुला से चौकी चौराहा की ओर जाने वाली सड़क के डिवाइडर पर रातोंरात पौधे लगवाए थे। इन पौधों को फ्लोरा नर्सरी से लिया गया था। नर्सरी के मालिक बाबूराम मौर्य का कहना है कि करीब 50 लाख से किए गए इस पौधरोपण का नगर निगम ने अब तक उन्हें भुगतान नहीं किया है। इनमें से कुछ पौधों के लिए ई-टेंडर हुए थे और कुछ पौधे कुटेशन पर लगवाए गए थे। तत्कालीन नगर आयुक्त के ट्रांसफर के बाद उनका भुगतान लटका है और वह मुख्यमंत्री, कमिश्नर, डीएम, नगर आयुक्त आदि से शिकायत कर चुके हैं लेकिन कोई सुनवाई नहीं है। अपनी शिकायत में बाबूराम ने कहा है कि इसको लेकर वह बेहद तनाव में हैं और उन्हें भी वाराणसी में पीडब्ल्यूडी के ठेकेदार जैसी घटना के मजबूर होना पड़ सकता है।
अफसर खेल रहे फाइल-फाइल
इस मामले में नगर निगम के पर्यावरण अभियंता संजीव प्रधान का कहना है कि अभी बाबूराम के भुगतान की फाइल ही उनके पास नहीं आई है। उनका कहना है कि पौधरोपण भी काफी पुराना हो चुका है और अब इसका सत्यापन कराना पड़ेगा। वहीं, सूत्रों का कहना है कि बाबूराम के भुगतान की फाइल नगर निगम में तैयार रखी है और उनके पास पहुंची भी थी लेकिन भुगतान पूर्व नगर आयुक्त के कार्यकाल का होने के चलते मामला लटकाया गया है।
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पिछले साले स्वतंत्र दिवस के अवसर पर नगर निगम ने शहर में तमाम स्थानों पर हजारों पौधे लगवाए थे। इसके बाद जनवरी 2019 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आगमन की सुगबुगाहट पर भी चौपुला से चौकी चौराहा की ओर जाने वाली सड़क के डिवाइडर पर रातोंरात पौधे लगवाए थे। इन पौधों को फ्लोरा नर्सरी से लिया गया था। नर्सरी के मालिक बाबूराम मौर्य का कहना है कि करीब 50 लाख से किए गए इस पौधरोपण का नगर निगम ने अब तक उन्हें भुगतान नहीं किया है। इनमें से कुछ पौधों के लिए ई-टेंडर हुए थे और कुछ पौधे कुटेशन पर लगवाए गए थे। तत्कालीन नगर आयुक्त के ट्रांसफर के बाद उनका भुगतान लटका है और वह मुख्यमंत्री, कमिश्नर, डीएम, नगर आयुक्त आदि से शिकायत कर चुके हैं लेकिन कोई सुनवाई नहीं है। अपनी शिकायत में बाबूराम ने कहा है कि इसको लेकर वह बेहद तनाव में हैं और उन्हें भी वाराणसी में पीडब्ल्यूडी के ठेकेदार जैसी घटना के मजबूर होना पड़ सकता है।
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अफसर खेल रहे फाइल-फाइल
इस मामले में नगर निगम के पर्यावरण अभियंता संजीव प्रधान का कहना है कि अभी बाबूराम के भुगतान की फाइल ही उनके पास नहीं आई है। उनका कहना है कि पौधरोपण भी काफी पुराना हो चुका है और अब इसका सत्यापन कराना पड़ेगा। वहीं, सूत्रों का कहना है कि बाबूराम के भुगतान की फाइल नगर निगम में तैयार रखी है और उनके पास पहुंची भी थी लेकिन भुगतान पूर्व नगर आयुक्त के कार्यकाल का होने के चलते मामला लटकाया गया है।
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