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एसडब्ल्यूसी में तीन-चार गुना रेट पर काम करने वाले ठेकेदार आउट
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बरेली। आखिरकार राज्य भंडारण निगम माफियाराज खत्म करने की कवायद शुरू हो गई है। टेंडर प्रक्रिया में तमाम घोटाले सामने आने के बाद हाल ही में निगम प्रबंधन की ओर से गठित आठ सदस्यीय समिति ने ई-टेंडर स्वीकार करने की संस्तुति कर दी है। इसके बाद अब बरेली मंडल में भी तीन महीने पहले मांगे गए ई-टेंडरों को स्वीकृति मिलने का रास्ता साफ हो गया है।
राज्य भंडारण निगम यानी एसडब्लूसी के गोदामों से परिवहन और उठान कर राशन को रेलवे रैक तक पहुंचाने के काम पर कई सालों से कुछ गिनेचुने बड़े ठेकेदारों का कब्जा है। इनमें से ज्यादातर ठेकेदार विभागीय आला अफसरों के संरक्षण में ही काम कर रहे थे। यह कॉकस लगातार बड़े घोटालों का अंजाम दे रहा था, पिछले दिनों कुछ घोटालों का खुलासा होने के बाद निगम के एमडी एसपी सिंह और बरेली-मुरादाबाद मंडल के क्षेत्रीय प्रबंधक एसएन यादव समेत कई को निलंबित तक किया जा चुका है। ठेकेदारों का यह कॉकस इतना मजबूत था कि विभाग में ई-टेंडर प्रक्रिया को तक सफल नहीं होने दे रहा था। साथ ही पुरानी दरों में काम ले रहा था। उनके टेंडर दरें 300-400 प्रतिशत तक ज्यादा होती थीं जबकि ई-टेंडर में दरें 100-200 प्रतिशत तक नीचे भरी जा रही थीं। विभागीय सूत्रों के मुताबिक इस खेल में हर महीने करोड़ों की हेराफेरी हो रही थी। चूंकि इसकी भरपाई भारतीय खाद्य निगम को करनी होती है लिहाजा इन घोटालों से सरकार को सीधे-सीधे क्षति पहुंच रही थी। अमर उजाला ने इस खेल का खुलासा किया था। बरेली मंडल में एसडब्ल्यूसी के पांच गोदाम हैं, यहां से खाद्यान्न उठाने का काम लेने के लिए 19 फर्मों ने ई-टेंडर प्रक्रिया में भाग लिया था।
हाल ही में एसडब्ल्यूसी में तीन महीने से लटकी ई-टेंडर प्रक्रिया को हरी झंडी देने के लिए प्रबंधन ने आठ सदस्यीय कमेटी बनाई थी। इसने बरेली समेत दूसरे मंडलों में हुए ई-टेंडर प्रक्रिया को सही ठहराया है। सूत्रों के मुताबिक समिति ने कहा है कि ई-टेंडरिंग प्रक्रिया से प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और माफिया पर अंकुश लगेगा। प्रबंध निदेशक आरके गोस्वामी ने समिति की संस्तुतियों को सुरक्षित कर लिया है। दो दिन में इस पर वे फैसला लेंगे।
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एसडब्ल्यूसी में खाद्यान्न परिवहन और उठान ठेकों में ज्यादातर स्थानों पर मनमानी हो रही थी। कॉकस ज्यादातर ठेकों पर काबिज था, इसलिए ई-टेंडर प्रक्रिया पर जोर दिया गया है। बरेली और अन्य स्थानों पर तीन माह महीने पहले हुए ई-टेंडर प्रक्रिया में आए आवेदनों पर दो दिन में निस्तारण हो जाएगा।- रविकांत गोस्वामी, एमडी एसडब्लूसी
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राज्य भंडारण निगम यानी एसडब्लूसी के गोदामों से परिवहन और उठान कर राशन को रेलवे रैक तक पहुंचाने के काम पर कई सालों से कुछ गिनेचुने बड़े ठेकेदारों का कब्जा है। इनमें से ज्यादातर ठेकेदार विभागीय आला अफसरों के संरक्षण में ही काम कर रहे थे। यह कॉकस लगातार बड़े घोटालों का अंजाम दे रहा था, पिछले दिनों कुछ घोटालों का खुलासा होने के बाद निगम के एमडी एसपी सिंह और बरेली-मुरादाबाद मंडल के क्षेत्रीय प्रबंधक एसएन यादव समेत कई को निलंबित तक किया जा चुका है। ठेकेदारों का यह कॉकस इतना मजबूत था कि विभाग में ई-टेंडर प्रक्रिया को तक सफल नहीं होने दे रहा था। साथ ही पुरानी दरों में काम ले रहा था। उनके टेंडर दरें 300-400 प्रतिशत तक ज्यादा होती थीं जबकि ई-टेंडर में दरें 100-200 प्रतिशत तक नीचे भरी जा रही थीं। विभागीय सूत्रों के मुताबिक इस खेल में हर महीने करोड़ों की हेराफेरी हो रही थी। चूंकि इसकी भरपाई भारतीय खाद्य निगम को करनी होती है लिहाजा इन घोटालों से सरकार को सीधे-सीधे क्षति पहुंच रही थी। अमर उजाला ने इस खेल का खुलासा किया था। बरेली मंडल में एसडब्ल्यूसी के पांच गोदाम हैं, यहां से खाद्यान्न उठाने का काम लेने के लिए 19 फर्मों ने ई-टेंडर प्रक्रिया में भाग लिया था।
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हाल ही में एसडब्ल्यूसी में तीन महीने से लटकी ई-टेंडर प्रक्रिया को हरी झंडी देने के लिए प्रबंधन ने आठ सदस्यीय कमेटी बनाई थी। इसने बरेली समेत दूसरे मंडलों में हुए ई-टेंडर प्रक्रिया को सही ठहराया है। सूत्रों के मुताबिक समिति ने कहा है कि ई-टेंडरिंग प्रक्रिया से प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और माफिया पर अंकुश लगेगा। प्रबंध निदेशक आरके गोस्वामी ने समिति की संस्तुतियों को सुरक्षित कर लिया है। दो दिन में इस पर वे फैसला लेंगे।
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एसडब्ल्यूसी में खाद्यान्न परिवहन और उठान ठेकों में ज्यादातर स्थानों पर मनमानी हो रही थी। कॉकस ज्यादातर ठेकों पर काबिज था, इसलिए ई-टेंडर प्रक्रिया पर जोर दिया गया है। बरेली और अन्य स्थानों पर तीन माह महीने पहले हुए ई-टेंडर प्रक्रिया में आए आवेदनों पर दो दिन में निस्तारण हो जाएगा।- रविकांत गोस्वामी, एमडी एसडब्लूसी