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बड़ी प्रॉपर्टी के छोटे-छोटे बैनामे कराओ.. इनकम टैक्स बचाओ

Sat, 20 Jul 2019 02:42 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sat, 20 Jul 2019 02:42 AM IST
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Civic Amenities
बरेली। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और इनकम टैक्स की नजरों से बचने के लिए एक बैनामा करने के बजाय उसकी जगह र्कई छोटे बैनामे कराए जा रहे हैं। परिवार के सदस्यों और या रिश्तेदारों के नाम से अलग-अलग बैनामे कराने का खेल चल रहा है। इससे आय से अधिक संपत्ति के मामलों को भी पकड़ा नहीं जा पा रहा है। बताते हैं कि 20 से 25 फीसदी तक मामले दबे हुए हैं। इनकी जांच नहीं हो रही है।
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अगर कोई महंगी संपत्ति खरीद रहा है तो जुटाई गई रकम का ब्योरा देना होता है। इसके लिए रजिस्ट्री विभाग को आदेश यह है कि 30 लाख की कीमत से ज्यादा की संपत्ति का रिकार्ड इनकम टैक्स और 50 लाख रुपये से ज्यादा की कीमत की संपत्ति का ब्योरा इनकम टैक्स के साथ ईडी को भी भेजा जाए। इसे लेकर सरकार ने भी सख्ती दिखाई है। इससे बचने के लिए खरीददारों ने नया तरीका ईजाद कर लिया है। अब पूरी संपत्ति का बैनामा करने के बजाय कई हिस्से कर अलग-अलग बैनामा कराया जा रहा है। रजिस्ट्री विभाग के सूत्रों मुताबिक, अगर किसी संपत्ति की कीमत 60 लाख रुपये है तो कोई उसे दो या तीन हिस्सों में बांटकर उसकी रजिस्ट्री कराने पर इनकम टैक्स और ईओ की नजरों से बचा जा सकता है। इस साल से संपत्तियों की खरीद में 20 हजार रुपये से ज्यादा नकद लेनदेन पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। उसके बाद ऐसे से छोटे बैनामे कराने वाले की संख्या में बढ़ोत्तरी हो गई है।
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बैंक लोन लेकर खरीद जा रही 60 फीसदी संपत्तियां
रजिस्ट्री विभाग के स्टाफ की मानें तो अब 60 फीसदी संपत्तियों की खरीद-फरोख्त बैंक लोन लेकर की जा रही है। जबकि पहले यह ग्राफ काफी कम था। इसकी वजह यह है कि जीएसटी लागू होने के बाद खर्च और आय छिपाना आसान नहीं है। ऐसे में लोगों की आईटीआर यानी इनकम टैक्स रिटर्न में आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है। इससे उन्हें बैंक लोन लेने में भी आसानी हुई है। ऐसे में बैंकों से लोन लेकर प्रापर्टी खरीदने वालों की संख्या में बढ़ोत्तरी हुई है।
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पिछले साल साढ़े 36 हजार से ज्यादा लोगों ने की थी संपत्ति की खरीद-फरोख्त
जिले में वर्ष 2018-19 मेें 36576 लोगों ने प्रॉपर्टी की खरीद फरोख्त की। इससे रजिस्ट्री विभाग ने 2.49 अरब रुपये स्टांप की बिक्री से मिले थे। जबकि इससे पूर्व 2017-18 में 31164 लोगों ने संपत्तियों के बैनामे कराए थे। इसमें स्टांप शुल्क के तौर पर 2.20 अरब का राजस्व रजिस्ट्री विभाग को मिला था। जबकि इस साल अप्रैल से जून तक 10297 रजिस्ट्रियों से 67.53 करोड़ रुपये के स्टांप बिके हैं। जबकि इस अवधि में पिछले साल यानी 2018-19 में 9828 लोगों ने बैनामे कराए थे। पिछले साल बैनामों की तादाद कम होने के बावजूद 68.45 करोड़ के स्टांपों की बिक्री हुई थी।


‘संपत्तियों की कीमत के हिसाब से उसका रिकार्ड ईओ और इनकम टैक्स को भेजा जा रहा है। ये खरीददारों के विवेक पर है कि वह संपत्ति का एक साथ बैनामा कराएं या उसका बंटवारा करके।’
- आरके गौतम, उप निबंधक
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