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कैसे पाए कुपोषण से पार.. पुष्टाहार बन गया पशु आहार
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आंवला। कुपोषित बच्चों और गर्भवती महिलाओं को बांटने के लिए आंगनबाड़ी केंद्रों को आने वाला पुष्टाहार आंगनबाड़ी वर्कर और अधिकारियों की मिलीभगत से जानवरों का चारा बन गया है। मानकों को दरकिनार कर अधिकारी मनमाफिक तरीके से सुविधा शुल्क लेकर आंगनबाड़ी वर्कर को पुष्टाहार वितरित करते हैं, जो आंगनबाड़ी बच्चों और गर्भवती को बांटने के बजाय बेच देती हैं। रामनगर ब्लॉक में पुष्टाहार के नाम पर रुपये मांगने का एक वीडियो वायरल हुआ है। इसके बाद से आंगनबाड़ी केंद्र में खलबली मच गई है।
वायरल वीडियो में केंद्र की बाल विकास परियोजना अधिकारी एक आंगनबाड़ी वर्कर को पुष्टाहार देने से इसलिए मना कर देती है क्योंकि वह सुविधा शुल्क के सौ रुपये कम देती है। जब आंगनबाड़ी वर्कर घर जाने के किराये के लिए रुपये न बचने की बात कहकर पुष्टाहार देने की गुहार करती है तो उसे पूरे पैसे देने पर ही पुष्टाहार देने के बात कहकर रुपये लौटा दिए जाते हैं।
नाम उजागर न करने की शर्त पर एक आंगनबाड़ी वर्कर ने बताया कि सीडीपीओ पुष्टाहार सहित अन्य बिलों पर हस्ताक्षर करने के नाम पर सुविधा शुल्क की वसूली करती हैं। बिना सुविधा शुल्क लिए किसी भी चेक पर हस्ताक्षर नहीं करती। इस बाबत सीडीपीओ का पक्ष जानने के लिए उनको कई बार फोन किया लेकिन संपर्क नहीं हो सका ।
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ऐसे होता है खेल
आंगनबाड़ी केंद्र पर हर महीने कुपोषित बच्चों और गर्भवती महिलाओं को वितरित करने के पुष्टाहार आता है। जोकि आंगनबाड़ी वर्करों को उनके क्षेत्र में कुपोषित बच्चों और गर्भवती महिलाओं के संख्या के आधार पर वितरित करने के लिए दिया जाता है, लेकिन भ्रष्टाचार के चलते जरूरतमंदों की संख्या को दरकिनार कर जो आंगनबाड़ी वर्कर जितने अधिक पैसे देती है उसे उतने अधिक कट्टे दे दिए जाते हैं। आंगनबाड़ी वर्कर भी पुष्टाहार को बांटने के बजाय पशुपालकों 100 से 150 रुपये प्रति कट्टे के हिसाब से बेच देती हैं।
बंद केंद्र हजार रुपये तो चालू का 500 रुपये महीना फिक्स रेट
सूत्रों के मुताबिक जो आंगनबाड़ी केंद्र चल रहे हैं उनकी वर्कर से हर महीने पुष्टाहार देने के एवज में 500 रुपये वसूले जाते हैं, जबकि जो केंद्र बंद हैं और केवल कागजों में चल रहे हैं वहां तैनात आंगनबाड़ी वर्कर से 1000 रुपये महीने वसूल किया जाता है। यह पुष्टाहार कुपोषित बच्चों को बांटने के बजाय बेच दिया जाता है।
यह गंभीर मामला है, वीडियो की जांच करवाई जाएगी, यदि जांच में बाल विकास परियोजना अधिकारी दोषी पाई जाती हैं तो उनके खिलाफ विभागीय और दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। - विशु राजा, एसडीएम आंवला
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वायरल वीडियो में केंद्र की बाल विकास परियोजना अधिकारी एक आंगनबाड़ी वर्कर को पुष्टाहार देने से इसलिए मना कर देती है क्योंकि वह सुविधा शुल्क के सौ रुपये कम देती है। जब आंगनबाड़ी वर्कर घर जाने के किराये के लिए रुपये न बचने की बात कहकर पुष्टाहार देने की गुहार करती है तो उसे पूरे पैसे देने पर ही पुष्टाहार देने के बात कहकर रुपये लौटा दिए जाते हैं।
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नाम उजागर न करने की शर्त पर एक आंगनबाड़ी वर्कर ने बताया कि सीडीपीओ पुष्टाहार सहित अन्य बिलों पर हस्ताक्षर करने के नाम पर सुविधा शुल्क की वसूली करती हैं। बिना सुविधा शुल्क लिए किसी भी चेक पर हस्ताक्षर नहीं करती। इस बाबत सीडीपीओ का पक्ष जानने के लिए उनको कई बार फोन किया लेकिन संपर्क नहीं हो सका ।
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ऐसे होता है खेल
आंगनबाड़ी केंद्र पर हर महीने कुपोषित बच्चों और गर्भवती महिलाओं को वितरित करने के पुष्टाहार आता है। जोकि आंगनबाड़ी वर्करों को उनके क्षेत्र में कुपोषित बच्चों और गर्भवती महिलाओं के संख्या के आधार पर वितरित करने के लिए दिया जाता है, लेकिन भ्रष्टाचार के चलते जरूरतमंदों की संख्या को दरकिनार कर जो आंगनबाड़ी वर्कर जितने अधिक पैसे देती है उसे उतने अधिक कट्टे दे दिए जाते हैं। आंगनबाड़ी वर्कर भी पुष्टाहार को बांटने के बजाय पशुपालकों 100 से 150 रुपये प्रति कट्टे के हिसाब से बेच देती हैं।
बंद केंद्र हजार रुपये तो चालू का 500 रुपये महीना फिक्स रेट
सूत्रों के मुताबिक जो आंगनबाड़ी केंद्र चल रहे हैं उनकी वर्कर से हर महीने पुष्टाहार देने के एवज में 500 रुपये वसूले जाते हैं, जबकि जो केंद्र बंद हैं और केवल कागजों में चल रहे हैं वहां तैनात आंगनबाड़ी वर्कर से 1000 रुपये महीने वसूल किया जाता है। यह पुष्टाहार कुपोषित बच्चों को बांटने के बजाय बेच दिया जाता है।
यह गंभीर मामला है, वीडियो की जांच करवाई जाएगी, यदि जांच में बाल विकास परियोजना अधिकारी दोषी पाई जाती हैं तो उनके खिलाफ विभागीय और दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। - विशु राजा, एसडीएम आंवला