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सियासत या स्वार्थ: गुटबंदी के भेंट चढ़ गए पालिका के विकास कार्य
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गोला गोकर्णनाथ। नगर पालिका परिषद में सदस्यों और पालिकाध्यक्ष के बीच मनमुटाव के चलते 14 माह से एक भी बैठक नही हो पाई है। ऐसे में 14वें वित्त का विकास कार्यों के लिए आया 5.59 करोड़ रुपये का बजट खर्च नहीं हो पा रहा है, जिससे एक साल से नगर में विकास कार्य ठप हैं। इसे नगरवासी अब सियासत और स्वार्थ की जंग मानने लगे हैं। कुछ पालिका सदस्यों का आरोप है कि जब से जीतकर आए हैं, उनके प्रस्ताव पास ही नहीं किए गए हैं।
नगर पालिका परिषद बोर्ड की बैठक कभी अपरिहार्य कारणों तो कभी सदस्यों के न आने के कारण बीते साल 15 नवंबर से नहीं हो पा रही है। नतीजन 14 माह से नगर के विकास की योजनाओं को मंजूरी नहीं मिल पा रही है। गुरुवार को बोर्ड की होने वाली बैठक में 25 में से 23 सदस्य तो आ गए, लेकिन सदस्यों ने अपने सवालों के जवाब देने और संतुष्ट होने पर ही हस्ताक्षर की बात कही थी, जिससे कोरम के अभाव में बैठक स्थगित कर दी गई।
विकास ठप, सांसद-विधायक को भी परवाह नहीं
नगर पालिका में 14वें वेतन आयोग से पांच करोड़ 59 लाख रुपये के काम कराए जाने हैं। साथ ही सफाई, पेयजल और चैती मेला 2019 के बजट की स्वीकृति भी होनी थी। पिछले साल के मेले के बजट की अब तक स्वीकृति नहीं हो पाई है, जबकि 2020 के चैती मेला की तैयारी भी शुरू होनी है।
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खास बात यह है कि स्थानीय नगर पालिका स्वच्छता सर्वेक्षण में टॉप-टेन में स्थान बना चुकी है, लेकिन यहां विकास योजनाओं की मंजूरी सदस्यों के कारण ही नहीं मिल पा रही है। हर बार सांसद, विधायक और राज्य सभा सदस्य को एजेंडा भी जाता है, लेकिन वह कभी नहीं आते।
पांच बैठकें हो चुकी हैं निरस्त
नगर पालिका परिषद में बैठक 27 जून 2019, 18 नवंबर 2019 को अपरिहार्य कारणों से और 27 मई 2019, 18 सितंबर 2019 और 23 जनवरी 2020 को पालिका के 17 सदस्यों के हस्ताक्षर न करने से कोरम के अभाव में स्थगित हो चुकी हैं। इससे पहले 15 नवंबर 2018 को ही बोर्ड की बैठक हुई थी।
विकास योजनाओं को पूरा नहीं होने दिया जा रहा है
नगर की विकास योजनाओं में अड़ंगा लगाया जा रहा है। सदस्यों को हमें सहयोग करना चाहिए। सभी सदस्यों को हस्ताक्षर कर बैठक को सफल बनाना चाहिए ताकि पूरे नगर का विकास हो सके। उनका प्रयास है कि केंद्र से मिली 5.59 करोड़ रुपये की धनराशि से नगर का विकास हो। इससे शेष बची सड़कें, गलियां और नालियां भी बन जाएंगी।
-मीनाक्षी अग्रवाल, पालिकाध्यक्ष गोला
मुझे सम्मान से बुलाएं तो पूरे प्रकरण का हल कराऊंगा
नगर और क्षेत्र के विकास के लिए हमेशा प्रयत्नशील रहा हूूं। अफसोस है कि पालिका के विकास कार्यों के संबंध में न तो उनसे कभी सलाह ली जाती है और न कभी उनसे चर्चा की गई। उन्हें विधायक के रूप में बुलाया नहीं जाता, आगामी बैठक में अगर पालिकाध्यक्ष खुद आमंत्रित करती हैं तो वह जाकर नगर पालिका के पूरे प्रकरण को समझकर निस्तारण कराने का प्रयास करेंगे।
-अरविंद गिरि, विधायक
नगर के विकास के लिए वह सदैव प्रयत्नशील रहे हैं। इस बोर्ड बैठक में भी उन्होंने प्रस्ताव पास कराने के लिए काफी प्रयास किया लेकिन उनके सदस्य साथी नहीं माने, यह गोला के लोगों में अच्छा संदेश नहीं है।
-नानकचंद वर्मा, पालिका सदस्य
पालिका परिषद के 17 सदस्यों ने हस्ताक्षर युक्त पत्र देकर वित्तीय अनियमितताओं पर शंका जताई है। अगर कहीं हेर-फेर नहीं है तो पालिका सदस्यों को जबाब क्यों नहीं दिया जा रहा है। उन्हें भी अपने वार्ड और नगर विकास के प्रति काफी चिंता है। वार्ड में नलकूप लगवाने के लिए प्रस्ताव किया गया था जो अब तक नहीं लग पाया है।
-पंकज गुप्ता, पालिका सदस्य
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नगर पालिका परिषद बोर्ड की बैठक कभी अपरिहार्य कारणों तो कभी सदस्यों के न आने के कारण बीते साल 15 नवंबर से नहीं हो पा रही है। नतीजन 14 माह से नगर के विकास की योजनाओं को मंजूरी नहीं मिल पा रही है। गुरुवार को बोर्ड की होने वाली बैठक में 25 में से 23 सदस्य तो आ गए, लेकिन सदस्यों ने अपने सवालों के जवाब देने और संतुष्ट होने पर ही हस्ताक्षर की बात कही थी, जिससे कोरम के अभाव में बैठक स्थगित कर दी गई।
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विकास ठप, सांसद-विधायक को भी परवाह नहीं
नगर पालिका में 14वें वेतन आयोग से पांच करोड़ 59 लाख रुपये के काम कराए जाने हैं। साथ ही सफाई, पेयजल और चैती मेला 2019 के बजट की स्वीकृति भी होनी थी। पिछले साल के मेले के बजट की अब तक स्वीकृति नहीं हो पाई है, जबकि 2020 के चैती मेला की तैयारी भी शुरू होनी है।
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खास बात यह है कि स्थानीय नगर पालिका स्वच्छता सर्वेक्षण में टॉप-टेन में स्थान बना चुकी है, लेकिन यहां विकास योजनाओं की मंजूरी सदस्यों के कारण ही नहीं मिल पा रही है। हर बार सांसद, विधायक और राज्य सभा सदस्य को एजेंडा भी जाता है, लेकिन वह कभी नहीं आते।
पांच बैठकें हो चुकी हैं निरस्त
नगर पालिका परिषद में बैठक 27 जून 2019, 18 नवंबर 2019 को अपरिहार्य कारणों से और 27 मई 2019, 18 सितंबर 2019 और 23 जनवरी 2020 को पालिका के 17 सदस्यों के हस्ताक्षर न करने से कोरम के अभाव में स्थगित हो चुकी हैं। इससे पहले 15 नवंबर 2018 को ही बोर्ड की बैठक हुई थी।
विकास योजनाओं को पूरा नहीं होने दिया जा रहा है
नगर की विकास योजनाओं में अड़ंगा लगाया जा रहा है। सदस्यों को हमें सहयोग करना चाहिए। सभी सदस्यों को हस्ताक्षर कर बैठक को सफल बनाना चाहिए ताकि पूरे नगर का विकास हो सके। उनका प्रयास है कि केंद्र से मिली 5.59 करोड़ रुपये की धनराशि से नगर का विकास हो। इससे शेष बची सड़कें, गलियां और नालियां भी बन जाएंगी।
-मीनाक्षी अग्रवाल, पालिकाध्यक्ष गोला
मुझे सम्मान से बुलाएं तो पूरे प्रकरण का हल कराऊंगा
नगर और क्षेत्र के विकास के लिए हमेशा प्रयत्नशील रहा हूूं। अफसोस है कि पालिका के विकास कार्यों के संबंध में न तो उनसे कभी सलाह ली जाती है और न कभी उनसे चर्चा की गई। उन्हें विधायक के रूप में बुलाया नहीं जाता, आगामी बैठक में अगर पालिकाध्यक्ष खुद आमंत्रित करती हैं तो वह जाकर नगर पालिका के पूरे प्रकरण को समझकर निस्तारण कराने का प्रयास करेंगे।
-अरविंद गिरि, विधायक
नगर के विकास के लिए वह सदैव प्रयत्नशील रहे हैं। इस बोर्ड बैठक में भी उन्होंने प्रस्ताव पास कराने के लिए काफी प्रयास किया लेकिन उनके सदस्य साथी नहीं माने, यह गोला के लोगों में अच्छा संदेश नहीं है।
-नानकचंद वर्मा, पालिका सदस्य
पालिका परिषद के 17 सदस्यों ने हस्ताक्षर युक्त पत्र देकर वित्तीय अनियमितताओं पर शंका जताई है। अगर कहीं हेर-फेर नहीं है तो पालिका सदस्यों को जबाब क्यों नहीं दिया जा रहा है। उन्हें भी अपने वार्ड और नगर विकास के प्रति काफी चिंता है। वार्ड में नलकूप लगवाने के लिए प्रस्ताव किया गया था जो अब तक नहीं लग पाया है।
-पंकज गुप्ता, पालिका सदस्य