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कार्रवाई के बाद धरने पर डटे लेखपाल
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बरेली। निलंबन और एफआईआर की कार्रवाई होने के बावजूद लेखपालों ने कार्य बहिष्कार जारी रखते हुए शुक्रवार को तहसील परिसर में धरना दिया। लेखपालों ने कहा कि वे इस तरह की कार्रवाई से डरने वाले नहीं है। शासन जब तक उनकी मांगें नहीं मान लेता, धरना-प्रदर्शन जारी रहेगा।
वेतन, प्रमोशन सहित कई मांगों को लेकर जिलेभर के लेखपाल 10 दिसंबर से धरने पर बैठे हैं। शासन ने 13 दिसंबर को एस्मा लागू कर दी थी। इसके बावजूद लेखपालों का धरना खत्म नहीं हुआ तो प्रशासन ने लेखपाल संघ के जिलाध्यक्ष संजीव सिंह और महामंत्री भूषित सक्सेना सहित 14 पदाधिकारियों को सस्पेंड कर दिया था। इसके अगले दिन जिलाध्यक्ष और महामंत्री के साथ 100 लेखपालों के खिलाफ रिपोर्ट भी दर्ज कराई जा चुकी है। प्रशासन की इस कार्रवाई के बावजूद लेखपालों ने शुक्रवार को सदर तहसील में धरना प्रदर्शन जारी रखा। जिलाध्यक्ष संजीव सिंह ने कहा कि शासन-प्रशासन इस तरह की कार्रवाई करके लेखपालों के आंदोलन को दबाना चाहती है। दूसरे वक्ताओं ने भी मांगें न माने जाने तक आंदोलन जारी रखने की घोषणा की।
‘शुक्रवार को नागरिकता कानून को लेकर हालात पर नजर रखने में प्रशासन व्यस्त था। इसलिए लेखपालों पर अग्रिम कार्रवाई नहीं हो सकी है। लेखपाल काम पर न लौटे तो उन पर और भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी।’
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- वीके सेन, एडीएम प्रशासन
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वेतन, प्रमोशन सहित कई मांगों को लेकर जिलेभर के लेखपाल 10 दिसंबर से धरने पर बैठे हैं। शासन ने 13 दिसंबर को एस्मा लागू कर दी थी। इसके बावजूद लेखपालों का धरना खत्म नहीं हुआ तो प्रशासन ने लेखपाल संघ के जिलाध्यक्ष संजीव सिंह और महामंत्री भूषित सक्सेना सहित 14 पदाधिकारियों को सस्पेंड कर दिया था। इसके अगले दिन जिलाध्यक्ष और महामंत्री के साथ 100 लेखपालों के खिलाफ रिपोर्ट भी दर्ज कराई जा चुकी है। प्रशासन की इस कार्रवाई के बावजूद लेखपालों ने शुक्रवार को सदर तहसील में धरना प्रदर्शन जारी रखा। जिलाध्यक्ष संजीव सिंह ने कहा कि शासन-प्रशासन इस तरह की कार्रवाई करके लेखपालों के आंदोलन को दबाना चाहती है। दूसरे वक्ताओं ने भी मांगें न माने जाने तक आंदोलन जारी रखने की घोषणा की।
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‘शुक्रवार को नागरिकता कानून को लेकर हालात पर नजर रखने में प्रशासन व्यस्त था। इसलिए लेखपालों पर अग्रिम कार्रवाई नहीं हो सकी है। लेखपाल काम पर न लौटे तो उन पर और भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी।’
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