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रिठौरा के नकटिया पुल में गड्ढे ही गड्ढे, कभी भी हो सकता है हादसा
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बरेली। एनएचएआई अफसरों की बेपरवाही से लखनऊ हाईवे की तरह पीलीभीत की ओर जाने वाले हाईवे पर भी सफर खतरनाक हो गया है। रिठौरा के पास नकटिया नदी के पुल के दोनों ओर सड़क पर इस कदर गहरे गड्ढे हो गए हैं कि दिन-दिन भर यहां जाम लगा रहता है और रात में जरा चूकते ही हादसा होना तय है। पुल भी काफी कमजोर हालत में है, कई जगह उसकी सरिया तक बाहर निकल आई हैं। इसके बावजूद एनएचएआई की ओर से लोगों को आगाह करने तक के लिए कोई इंतजाम नहीं किया है।
शहर से गुजरने वाले हाईवे एक-एक कर दुर्दशा का शिकार हो रहे हैं। लखनऊ हाईवे पर सीतापुर फोरलेन प्रोजेक्ट सालों से अधूरा पड़ा होने की वजह से पहले ही लोगों को जान जोखिम में डालकर सफर करना पड़ रहा है, अब पीलीभीत रोड पर भी खतरे बढ़ गए हैं। पीलीभीत तक यह रोड सितारगंज हाईवे का हिस्सा है जिसकी चौड़ाई सात मीटर से बढ़ाकर दस मीटर की जानी है। कई साल पहले इसे फोरलेन करने का कॉन्ट्रैक्ट वीआईएल नाम की जिस कंपनी को दिया गया था, वह भी सीतापुर फोरलेन का कॉन्ट्रैक्ट लेने वाली इरा कंपनी की तरह काम अधूरा छोड़कर भाग गई थी। तब से इस हाईवे पर मरम्मत तक नहीं कराई गई है, जिस वजह से वह लगातार खराब हो रहा है। एनएचएआई ने किसी दूसरी कंपनी को अब तक कॉन्ट्रैक्ट देने की प्रक्रिया भी शुरू नहीं की है। भारी ट्रैफिक गुजरने के कारण हाईवे पर हादसों का खतरा बना हुआ है लेकिन उसे नजरअंदाज किया जा रहा है।
रिठौरा के पास नकटिया नदी पर पुल पर सबसे ज्यादा खतरनाक स्थिति है। पुल के दोनों ओर गहरे गड्ढे होने से यहां गाड़ियों की रफ्तार कम करनी पड़ती है जिस वजह से दिन भर जाम लगा रहता है। पुल की हालत इस कदर जर्जर है कि उसकी सरिया तक बाहर दिखाई दे रही हैं। रात के अंधेरे में दूर से गड्ढे न दिखाई के कारण हादसों का खतरा बना रहता है। एनएचएआई की ओर से लोगों को आगाह करने के लिए भी कोई इंतजाम नहीं किया गया है। लोगों ने खुद ही यहां गड्ढों के आसपास ईंटों के ढेर डाल दिए हैं ताकि दूर से ही उन्हें देखकर हाईवे पर गुजरने वाले लोग गाड़ी की रफ्तार कम कर लें और हादसा न हो।
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जमीन अधिग्रहण में हुए घपलों की जांच दफन
सितारगंज हाईवे तो पूरा नहीं हो पाया, उसे चौड़ा करने के लिए 2013 में हुई जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया के दौरान मुआवजा तय करने में बड़े पैमाने पर हुए घपले कुछ समय पहले जरूर उजागर हुए थे। अफसरों के कृषि भूमि को व्यावसायिक दिखाकर सरकार के करोड़ों हड़पने का मामला शासन तक पहुंचा था। कलक्ट्रेट एक बाबू ने भी अपने एक रिश्तेदार का हाईवे किनारे पेट्रोल पंप दिखाकर कई गुना मुआवजा दिला दिया था। यह भी शिकायत की गई थी कि एक अफसर ने मुआवजे में हेराफेरी करके ही दिल्ली के पास आलीशान बंगला बनवा लिया। शासन से इस घोटाले की जांच का आदेश दिया गया था। तत्कालीन कमिश्नर पीवी जगनमोहन ने शासन को रिपोर्ट भी भेजी थी लेकिन बाद यह जांच ठंडी पड़ गई।
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शहर से गुजरने वाले हाईवे एक-एक कर दुर्दशा का शिकार हो रहे हैं। लखनऊ हाईवे पर सीतापुर फोरलेन प्रोजेक्ट सालों से अधूरा पड़ा होने की वजह से पहले ही लोगों को जान जोखिम में डालकर सफर करना पड़ रहा है, अब पीलीभीत रोड पर भी खतरे बढ़ गए हैं। पीलीभीत तक यह रोड सितारगंज हाईवे का हिस्सा है जिसकी चौड़ाई सात मीटर से बढ़ाकर दस मीटर की जानी है। कई साल पहले इसे फोरलेन करने का कॉन्ट्रैक्ट वीआईएल नाम की जिस कंपनी को दिया गया था, वह भी सीतापुर फोरलेन का कॉन्ट्रैक्ट लेने वाली इरा कंपनी की तरह काम अधूरा छोड़कर भाग गई थी। तब से इस हाईवे पर मरम्मत तक नहीं कराई गई है, जिस वजह से वह लगातार खराब हो रहा है। एनएचएआई ने किसी दूसरी कंपनी को अब तक कॉन्ट्रैक्ट देने की प्रक्रिया भी शुरू नहीं की है। भारी ट्रैफिक गुजरने के कारण हाईवे पर हादसों का खतरा बना हुआ है लेकिन उसे नजरअंदाज किया जा रहा है।
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रिठौरा के पास नकटिया नदी पर पुल पर सबसे ज्यादा खतरनाक स्थिति है। पुल के दोनों ओर गहरे गड्ढे होने से यहां गाड़ियों की रफ्तार कम करनी पड़ती है जिस वजह से दिन भर जाम लगा रहता है। पुल की हालत इस कदर जर्जर है कि उसकी सरिया तक बाहर दिखाई दे रही हैं। रात के अंधेरे में दूर से गड्ढे न दिखाई के कारण हादसों का खतरा बना रहता है। एनएचएआई की ओर से लोगों को आगाह करने के लिए भी कोई इंतजाम नहीं किया गया है। लोगों ने खुद ही यहां गड्ढों के आसपास ईंटों के ढेर डाल दिए हैं ताकि दूर से ही उन्हें देखकर हाईवे पर गुजरने वाले लोग गाड़ी की रफ्तार कम कर लें और हादसा न हो।
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सितारगंज हाईवे तो पूरा नहीं हो पाया, उसे चौड़ा करने के लिए 2013 में हुई जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया के दौरान मुआवजा तय करने में बड़े पैमाने पर हुए घपले कुछ समय पहले जरूर उजागर हुए थे। अफसरों के कृषि भूमि को व्यावसायिक दिखाकर सरकार के करोड़ों हड़पने का मामला शासन तक पहुंचा था। कलक्ट्रेट एक बाबू ने भी अपने एक रिश्तेदार का हाईवे किनारे पेट्रोल पंप दिखाकर कई गुना मुआवजा दिला दिया था। यह भी शिकायत की गई थी कि एक अफसर ने मुआवजे में हेराफेरी करके ही दिल्ली के पास आलीशान बंगला बनवा लिया। शासन से इस घोटाले की जांच का आदेश दिया गया था। तत्कालीन कमिश्नर पीवी जगनमोहन ने शासन को रिपोर्ट भी भेजी थी लेकिन बाद यह जांच ठंडी पड़ गई।