{"_id":"5d8d07678ebc3e93b774f286","slug":"chinmiyanand-bareilly-news-bly377830693","type":"story","status":"publish","title_hn":"‘छात्रा चीखकर कह रही रेप हुआ तो रंगदारी और रेप में फर्क क्यों नहीं समझा’","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
‘छात्रा चीखकर कह रही रेप हुआ तो रंगदारी और रेप में फर्क क्यों नहीं समझा’
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शाहजहांपुर। भाकपा नेता वृंदा करात और अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति की प्रदेश अध्यक्ष सुभाषिनी अली ने छात्रा को जेल भेजे जाने को लेकर एसआईटी पर पक्षपात का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि जब छात्रा चीखकर कह रही कि उसके साथ दुष्कर्म हुआ तो दुष्कर्म की रिपोर्ट क्यों नहीं दर्ज की गई। अब 376-सी धारा लगाकर केस को हल्का कर दिया गया और फिरौती मामले में छात्रा को जेल भेज दिया। फिरौती और रेप केस को एक ही नजरिये से नहीं देखा जा सकता। इससे साफ है कि चिन्मयानंद को बचाने की कोशिश की जा रही है।
कम्युनिस्ट नेता ने कहा कि वह इस मामले में तह तक गईं हैं। जिससे वह दावे के साथ कह सकती हैं कि उत्तर प्रदेश की सरकार, प्रशासन और जितनी भी एजेंसियां हैं वह प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से आरोपी चिन्मयानंद को बचाने का काम कर रहीं हैं। उन्होंने कहा कि छात्रा की तहरीर पर रिपोर्ट दर्ज नहीं हुई। पीड़िता की ओर से वकील सुप्रीम कोर्ट में बचाव के लिए गए। आज वहीं सुप्रीम कोर्ट के आदेश का बहाना लेकर 376 की रिपोर्ट दर्ज नहीं की जा रही है। सुभाषिनी अली ने एसआईटी से कहा है कि आप दुष्कर्म और फिरौती के केस को एक ही नजरिये से कैसे देख सकते हैं। एक एफआईआर है, जिसमें उसके पिता कह रहे हैं कि उन्हें शक है कि बेटी के साथ दुष्कर्म हुआ है और वह पीड़िता भी सामने है। उसके बयान के आधार पर भी दुष्कर्म का मामला दर्ज नहीं किया और दूसरी तरफ जो फिरौती का मामला है, उसको आप बराबर नजरिये से देख रहे हैं। उस लड़की को हतोत्साहित कर रहे हैं। उसे जेल में डाल दिया। उन्होंने कहा कि देश में दुष्कर्म के जो आंकड़े हैं, उनमें प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से वीआईपी लोगों का सहारा है या वह लोग खुद इसमें कहीं न कहीं शामिल हैं।
पहले सेंगर ने अब चिन्मयानंद की हरकतों से बदनाम हुआ प्रदेश
कम्युनिस्ट वृंदा करात ने कहा कि पिछले एक साल में प्रदेश में दो ऐसी घटनाएं हुई हैं जिसने देश भर में प्रदेश को बदनाम करने का काम किया है। इसमें एक मामला भारतीय जनता पार्टी के उन्नाव के कुलदीप सेंगर का है जो कि अब मामला सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है और इसके तुरंत बाद दूसरा मामला चिन्मयानंद का है। जिससे प्रदेश की छवि पूरे देश में खराब हुई है।
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हर स्तर पर लड़ी जाएगी कानूनी लड़ाई
सुभाषिनी अली ने कहा कि आरोपी के पास राजनैतिक और आर्थिक ताकत है और दूसरी तरफ जो पीड़िता है। दोनों में काफी अंतर है। ऐसे मामलों में शिकायत दर्ज कराने में बड़ी हिम्मत जुटानी पड़ती है। उन्होंने कहा कि छात्रा को न्याय दिलाने के लिए हर स्तर पर कानूनी लड़ाई लड़ी जाएगी।
चुप्पी साधे है भाजपा संगठन
चिन्मयानंद प्रकरण को लेकर गुरुवार से भाजपा पर हमला तेज हो गया है। वाम नेताओं ने तो सरकार पर आरोप लगाया ही। कांग्रेस नेताओं ने भी बयान जारी किए। लेकिन भाजपा संगठन इस पर कुछ बोलने को तैयार नहीं। भाजपा जिलाध्यक्ष राकेश मिश्रा ने कोई भी प्रतिक्रिया देने से इंकार कर दिया।
सुभाषिनी अली और वृंदा करात ने कहा कि दुष्कर्म पीड़िता के साक्ष्य उसके हॉस्टल वाले कमरे में बंद थे, जिसमें वह कैमरे वाला चश्मा जिससे वीडियो क्लिप तैयार की गई, वह गायब है, जबकि हॉस्टल के कमरे को एसआईटी की निगरानी में सील किया गया था। उन्होंने कहा कि इससे साबित होता है कि साक्ष्य को हटाने या नष्ट करने का काम कॉलेज प्रशासन की ओर से किया गया होगा। आरोप लगाया कि एसआईटी ने इस तरह का कोई आरोप कॉलेज प्रशासन पर नहीं लगाया जबकि यह एक गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है। उन्होंने कहा कि एसआईटी ने हॉस्टल के कमरे से गायब होने वाले साक्ष्यों में एक तरह से पीड़िता को ही दोषी मान लिया। उन्होंने एसआईटी से कहा कि साक्ष्य गायब करने पर कॉलेज प्रशासन पर रिपोर्ट दर्ज होनी चाहिए थी लेकिन ऐसा नहीं किया गया। ब्यूरो
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कम्युनिस्ट नेता ने कहा कि वह इस मामले में तह तक गईं हैं। जिससे वह दावे के साथ कह सकती हैं कि उत्तर प्रदेश की सरकार, प्रशासन और जितनी भी एजेंसियां हैं वह प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से आरोपी चिन्मयानंद को बचाने का काम कर रहीं हैं। उन्होंने कहा कि छात्रा की तहरीर पर रिपोर्ट दर्ज नहीं हुई। पीड़िता की ओर से वकील सुप्रीम कोर्ट में बचाव के लिए गए। आज वहीं सुप्रीम कोर्ट के आदेश का बहाना लेकर 376 की रिपोर्ट दर्ज नहीं की जा रही है। सुभाषिनी अली ने एसआईटी से कहा है कि आप दुष्कर्म और फिरौती के केस को एक ही नजरिये से कैसे देख सकते हैं। एक एफआईआर है, जिसमें उसके पिता कह रहे हैं कि उन्हें शक है कि बेटी के साथ दुष्कर्म हुआ है और वह पीड़िता भी सामने है। उसके बयान के आधार पर भी दुष्कर्म का मामला दर्ज नहीं किया और दूसरी तरफ जो फिरौती का मामला है, उसको आप बराबर नजरिये से देख रहे हैं। उस लड़की को हतोत्साहित कर रहे हैं। उसे जेल में डाल दिया। उन्होंने कहा कि देश में दुष्कर्म के जो आंकड़े हैं, उनमें प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से वीआईपी लोगों का सहारा है या वह लोग खुद इसमें कहीं न कहीं शामिल हैं।
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पहले सेंगर ने अब चिन्मयानंद की हरकतों से बदनाम हुआ प्रदेश
कम्युनिस्ट वृंदा करात ने कहा कि पिछले एक साल में प्रदेश में दो ऐसी घटनाएं हुई हैं जिसने देश भर में प्रदेश को बदनाम करने का काम किया है। इसमें एक मामला भारतीय जनता पार्टी के उन्नाव के कुलदीप सेंगर का है जो कि अब मामला सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है और इसके तुरंत बाद दूसरा मामला चिन्मयानंद का है। जिससे प्रदेश की छवि पूरे देश में खराब हुई है।
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हर स्तर पर लड़ी जाएगी कानूनी लड़ाई
सुभाषिनी अली ने कहा कि आरोपी के पास राजनैतिक और आर्थिक ताकत है और दूसरी तरफ जो पीड़िता है। दोनों में काफी अंतर है। ऐसे मामलों में शिकायत दर्ज कराने में बड़ी हिम्मत जुटानी पड़ती है। उन्होंने कहा कि छात्रा को न्याय दिलाने के लिए हर स्तर पर कानूनी लड़ाई लड़ी जाएगी।
चुप्पी साधे है भाजपा संगठन
चिन्मयानंद प्रकरण को लेकर गुरुवार से भाजपा पर हमला तेज हो गया है। वाम नेताओं ने तो सरकार पर आरोप लगाया ही। कांग्रेस नेताओं ने भी बयान जारी किए। लेकिन भाजपा संगठन इस पर कुछ बोलने को तैयार नहीं। भाजपा जिलाध्यक्ष राकेश मिश्रा ने कोई भी प्रतिक्रिया देने से इंकार कर दिया।
सुभाषिनी अली और वृंदा करात ने कहा कि दुष्कर्म पीड़िता के साक्ष्य उसके हॉस्टल वाले कमरे में बंद थे, जिसमें वह कैमरे वाला चश्मा जिससे वीडियो क्लिप तैयार की गई, वह गायब है, जबकि हॉस्टल के कमरे को एसआईटी की निगरानी में सील किया गया था। उन्होंने कहा कि इससे साबित होता है कि साक्ष्य को हटाने या नष्ट करने का काम कॉलेज प्रशासन की ओर से किया गया होगा। आरोप लगाया कि एसआईटी ने इस तरह का कोई आरोप कॉलेज प्रशासन पर नहीं लगाया जबकि यह एक गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है। उन्होंने कहा कि एसआईटी ने हॉस्टल के कमरे से गायब होने वाले साक्ष्यों में एक तरह से पीड़िता को ही दोषी मान लिया। उन्होंने एसआईटी से कहा कि साक्ष्य गायब करने पर कॉलेज प्रशासन पर रिपोर्ट दर्ज होनी चाहिए थी लेकिन ऐसा नहीं किया गया। ब्यूरो