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तापमान के साथ बढ़े डायरिया से मुर्झाए बच्चे
बरेली।
Updated Tue, 16 May 2017 01:52 AM IST
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Children with diarrhea increased with temperature
- फोटो : बरेली, अमर उजाला
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गर्मी के मौसम में बीमारियां बढ़ रही हैं। पानी की कमी के कारण सबसे ज्यादा बच्चों को डायरिया सता रहा है। बुखार भी लोगों को खूब हो रहा है। जिला अस्पताल में बढ़ती मरीजों की संख्या को देखते हुए डायरिया और डेंगू का वार्ड बना दिया गया है। इनमें दवाइयां भी उपलब्ध कराते हुए एक डॉक्टर की भी तैनाती कर दी गई है।
जिला अस्पताल की इमरजेंसी में सोमवार दोपहर तक 74 रोगी इलाज कराने पहुंचे। इनमें से 24 मरीज डायरिया के थे। शेष बुखार और अन्य बीमारियों के थे। जिन्हें भर्ती कर इलाज शुरू कर दिया गया। मलूकपुर की रहने वाली रुजमा ने बताया कि उसके दो साल के बेटे जीशान की दो दिन पहले तबियत खराब हुई। उल्टी दस्त आए तो वह उसे जिला अस्पताल लेकर आई। वहीं इसी मोहल्ले की फराह ने भी बताया कि उसका एक साल का बेटा आरिफ डायरिया से पीड़ित हैं। स्थानीय डॉक्टर को दिखाने पर जब कोई फायदा नहीं हुआ तो वह उसका इलाज कराने के लिए जिला अस्पताल लेकर आई है। डॉक्टर ने दोनों बच्चों को भर्ती कर इलाज शुरू कर दिया। उधर, प्राइवेट अस्पतालों में भी डायरिया और बुखार के मरीज बढ़ गए हैं। शहर के प्रमुख प्राइवेट अस्पतालों में भी सोमवार को मरीजों की भीड़ देखी गई।
इमरजेंसी के एक बेड पर भर्ती हैं दो मरीज
इमरजेंसी में पुरुष और महिला वार्ड है। महिला वार्ड में इस समय मरम्मत कार्य चल रहा है। इसलिए इस वार्ड के मरीज भी पुरुष वार्ड में ही शिफ्ट किए गए हैं। ऐसे में बेड कम पड़ने से एक बेड पर दो दो मरीज लेटाए जा रहे हैं। बच्चों का इलाज भी एक ही बेड पर किया जा रहा है।
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बचाव
डायरिया से बचाव के लिए स्वच्छता बहुत जरूरी है।
खाना खाने से पहले हाथ जरूर धोएं।
खुली और बाहरी चीजें खाने से परहेज करें।
घर में खाना ढक कर रखें।
ओआरएस का घोल लेते रहें। हल्का खाना खाएं।
पानी खूब पिएं। तबियत बिगड़ने पर तुरंत डॉक्टर से सलाह लें।
लक्षण
- पानी की कमी से चिड़चिड़ाहट होने के बाद डायरिया होता है
- उल्टी दस्त के साथ कमजोरी आ जाती है और चेहरा मुरझा जाता है।
- समय पर इलाज न कराने पर मरीज को खतरा बढ़ जाता है।
बीमारी बढ़ती देख एलपी कर खरीदी हैं दवाइयां
जिला अस्पताल में अब दवाइयों की कोई कमी नहीं हैं। बुखार से निपटने के लिए पैरासिटामाल टैबलेट और डायरिया को देखते हुए आईबी फ्लूड आदि दवाइयां एलपी से खरीद ली गई हैं। डेंगू वार्ड के साथ ही 10 बेड का डायरिया वार्ड भी बना दिया गया है। इसमें एक की भी ड्यूटी लगाई जा रही है, जो भर्ती मरीजों की देखरेख कर रहे हैं।
डॉ.केएस गुप्ता, सीएमएस
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जिला अस्पताल की इमरजेंसी में सोमवार दोपहर तक 74 रोगी इलाज कराने पहुंचे। इनमें से 24 मरीज डायरिया के थे। शेष बुखार और अन्य बीमारियों के थे। जिन्हें भर्ती कर इलाज शुरू कर दिया गया। मलूकपुर की रहने वाली रुजमा ने बताया कि उसके दो साल के बेटे जीशान की दो दिन पहले तबियत खराब हुई। उल्टी दस्त आए तो वह उसे जिला अस्पताल लेकर आई। वहीं इसी मोहल्ले की फराह ने भी बताया कि उसका एक साल का बेटा आरिफ डायरिया से पीड़ित हैं। स्थानीय डॉक्टर को दिखाने पर जब कोई फायदा नहीं हुआ तो वह उसका इलाज कराने के लिए जिला अस्पताल लेकर आई है। डॉक्टर ने दोनों बच्चों को भर्ती कर इलाज शुरू कर दिया। उधर, प्राइवेट अस्पतालों में भी डायरिया और बुखार के मरीज बढ़ गए हैं। शहर के प्रमुख प्राइवेट अस्पतालों में भी सोमवार को मरीजों की भीड़ देखी गई।
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इमरजेंसी के एक बेड पर भर्ती हैं दो मरीज
इमरजेंसी में पुरुष और महिला वार्ड है। महिला वार्ड में इस समय मरम्मत कार्य चल रहा है। इसलिए इस वार्ड के मरीज भी पुरुष वार्ड में ही शिफ्ट किए गए हैं। ऐसे में बेड कम पड़ने से एक बेड पर दो दो मरीज लेटाए जा रहे हैं। बच्चों का इलाज भी एक ही बेड पर किया जा रहा है।
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बचाव
डायरिया से बचाव के लिए स्वच्छता बहुत जरूरी है।
खाना खाने से पहले हाथ जरूर धोएं।
खुली और बाहरी चीजें खाने से परहेज करें।
घर में खाना ढक कर रखें।
ओआरएस का घोल लेते रहें। हल्का खाना खाएं।
पानी खूब पिएं। तबियत बिगड़ने पर तुरंत डॉक्टर से सलाह लें।
लक्षण
- पानी की कमी से चिड़चिड़ाहट होने के बाद डायरिया होता है
- उल्टी दस्त के साथ कमजोरी आ जाती है और चेहरा मुरझा जाता है।
- समय पर इलाज न कराने पर मरीज को खतरा बढ़ जाता है।
बीमारी बढ़ती देख एलपी कर खरीदी हैं दवाइयां
जिला अस्पताल में अब दवाइयों की कोई कमी नहीं हैं। बुखार से निपटने के लिए पैरासिटामाल टैबलेट और डायरिया को देखते हुए आईबी फ्लूड आदि दवाइयां एलपी से खरीद ली गई हैं। डेंगू वार्ड के साथ ही 10 बेड का डायरिया वार्ड भी बना दिया गया है। इसमें एक की भी ड्यूटी लगाई जा रही है, जो भर्ती मरीजों की देखरेख कर रहे हैं।
डॉ.केएस गुप्ता, सीएमएस