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डायरिया से मासूम की मौत, जूझ रहे हैं कई और
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बरेली। तपते मौसम में जरा सी लापरवाही बच्चों की जान पर भारी पड़ रही है। शनिवार को गंभीर हालत में जिला अस्पताल लाई गई एक बच्ची की घंटे भर के ही अंदर सांसें थम गईं। चिकित्सकों के मुताबिक बच्ची दो दिन से सीवियर डायरिया की चपेट में थी। समय से इलाज मिलता तो उसकी जान बच सकती थी। जिला अस्पताल के बच्चा वार्ड में भर्ती 19 बच्चों में से 15 डायरिया पीड़ित हैं। इनमें कई की हालत गंभीर है।
कैंट परगवां में रहने वाले सोनू की सात वर्षीय बेटी अनुष्का की दो दिन पहले शाम को अचानक तबियत बिगड़ने लगी। उल्टी और दस्त शुरू होने पर उन्होंने पास के एक मेडिकल स्टोर से दवाएं लीं। 24 घंटे बाद तबियत सुधार होने के बजाय और बिगड़ने लगी। बच्ची को दौरा भी पड़ने लगा और बेहोशी छाने लगी। शनिवार को परिजन उसे लेकर जिला अस्पताल के बच्चा वार्ड पहुंचे।
यहां उसे तत्काल भर्ती कर इलाज शुरू किया गया। जांच के लिए सैंपल लिया गया तो पता चला कि बच्ची सीवियर डायरिया से पीड़ित है। बेहतर इलाज की कवायद शुरू हुई पर बच्ची ने करीब घंटे भर बाद ही दम तोड़ दिया। मौत की खबर सुनते ही वार्ड में उसके परिवार के लोग बदहवास हो गए।
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बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. करमेंद्र ने बताया कि बच्ची की तबियत बेहद खराब थी। बचने की उम्मीद कम थी फिर भी जो बेहतर इलाज तत्काल मुहैया कराया जा सकता था, वह किया गया। उन्होंने बताया कि अगर बच्चे की तबियत बिगड़े और दवा के सेवन के बावजूद 24 घंटे के भीतर सुधार न हो तो परिजनों तत्काल विशेषज्ञ चिकित्सक के पास जाना चाहिए। सामान्य डायरिया में इलाज किया जा सकता है लेकिन सीवियर डायरिया में जिंदगी बचने की उम्मीद कम रहती है।
लगातार भर्ती हो रहे हैं डायरिया पीड़ित बच्चे
जिला अस्पताल के बच्चा वार्ड में डायरिया से पीड़ित बच्चों की तादाद कम नहीं हो रही है। करीब 15 दिन पहले वार्ड में जहां 13 बच्चे डायरिया से पीड़ित होकर भर्ती थे, वहीं अब यह तादाद 19 तक पहुंच चुकी है। वार्ड इंचार्ज के मुताबिक बेतहाशा गर्मी में बच्चों की निगरानी में जरा सी लापरवाही उन्हें गंभीर बीमार बना रही है। जो बच्चे अब तक भर्ती हुए हैं, उनमें से ज्यादातर उल्टी, दस्त की चपेट में आए थे। हालांकि, अब तक सभी स्वस्थ होकर घर लौट रहे हैं। लोगों से अपील की है कि वह बच्चों की तबियत खराब होने पर चिकि त्सक से परामर्श लेकर दवाएं दें।
डायरिया से बचाव के सामान्य उपाय
डॉ. करमेंद्र के मुताबिक पारा 41 डिग्री सेल्सियस के पास जा पहुंचा है। तापमान में उतार-चढ़ाव का सीधा असर शरीर पर पड़ता है। बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बेहद कम होती है, इसलिए वह आसानी से बीमारी से चपेट में आ जाते हैं। लिहाजा उनकी निगरानी जरूरी है। बच्चे सुबह 11 बजे से शाम चार बजे तक धूप के सीधे संपर्क में न रहें। घर से बाहर जाएं तो सिर ढके रहें और पानी की बोतल साथ रखें। आइसक्रीम, कोल्ड ड्रिंक, फास्ट फू ड से दूर रहें। घर पर पका ताजा भोजन ही खाएं। पानी का सेवन कई बार रुक रुक कर करना बेहतर है।
अभिभावक ध्यान दें ताकि न हो देरी
छह माह तक के बच्चों को केवल स्तनपान कराएं। छह माह बाद पर्याप्त संपूरक आहार दें। साबुन से हाथ धोकर ही बच्चे खाना खाएं। सभी टीके लगवाएं। दस्त होने पर जिंक के साथ ओआरएस दें। पांच से ज्यादा दस्त होने पर स्वास्थ्य केंद्र पर ले जाएं। एंटीबॉयोटिक चिकित्सक के परामर्श से दें। ध्यान दें कि बच्चा खाना बंद न करे। गंभीर हालत में दस्त या खूनी दस्त के साथ कई बार उल्टी हो। 102 डिग्री या अधिक बुखार बना रहे। बच्चा सुस्त, चिड़चिड़ा, दर्द में दिखे, मुंह सूखना, रोने पर आंसू का न निकलना, पेशाब न होना भावशून्य होना आदि गंभीर लक्षण हैं।
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कैंट परगवां में रहने वाले सोनू की सात वर्षीय बेटी अनुष्का की दो दिन पहले शाम को अचानक तबियत बिगड़ने लगी। उल्टी और दस्त शुरू होने पर उन्होंने पास के एक मेडिकल स्टोर से दवाएं लीं। 24 घंटे बाद तबियत सुधार होने के बजाय और बिगड़ने लगी। बच्ची को दौरा भी पड़ने लगा और बेहोशी छाने लगी। शनिवार को परिजन उसे लेकर जिला अस्पताल के बच्चा वार्ड पहुंचे।
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यहां उसे तत्काल भर्ती कर इलाज शुरू किया गया। जांच के लिए सैंपल लिया गया तो पता चला कि बच्ची सीवियर डायरिया से पीड़ित है। बेहतर इलाज की कवायद शुरू हुई पर बच्ची ने करीब घंटे भर बाद ही दम तोड़ दिया। मौत की खबर सुनते ही वार्ड में उसके परिवार के लोग बदहवास हो गए।
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बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. करमेंद्र ने बताया कि बच्ची की तबियत बेहद खराब थी। बचने की उम्मीद कम थी फिर भी जो बेहतर इलाज तत्काल मुहैया कराया जा सकता था, वह किया गया। उन्होंने बताया कि अगर बच्चे की तबियत बिगड़े और दवा के सेवन के बावजूद 24 घंटे के भीतर सुधार न हो तो परिजनों तत्काल विशेषज्ञ चिकित्सक के पास जाना चाहिए। सामान्य डायरिया में इलाज किया जा सकता है लेकिन सीवियर डायरिया में जिंदगी बचने की उम्मीद कम रहती है।
लगातार भर्ती हो रहे हैं डायरिया पीड़ित बच्चे
जिला अस्पताल के बच्चा वार्ड में डायरिया से पीड़ित बच्चों की तादाद कम नहीं हो रही है। करीब 15 दिन पहले वार्ड में जहां 13 बच्चे डायरिया से पीड़ित होकर भर्ती थे, वहीं अब यह तादाद 19 तक पहुंच चुकी है। वार्ड इंचार्ज के मुताबिक बेतहाशा गर्मी में बच्चों की निगरानी में जरा सी लापरवाही उन्हें गंभीर बीमार बना रही है। जो बच्चे अब तक भर्ती हुए हैं, उनमें से ज्यादातर उल्टी, दस्त की चपेट में आए थे। हालांकि, अब तक सभी स्वस्थ होकर घर लौट रहे हैं। लोगों से अपील की है कि वह बच्चों की तबियत खराब होने पर चिकि त्सक से परामर्श लेकर दवाएं दें।
डायरिया से बचाव के सामान्य उपाय
डॉ. करमेंद्र के मुताबिक पारा 41 डिग्री सेल्सियस के पास जा पहुंचा है। तापमान में उतार-चढ़ाव का सीधा असर शरीर पर पड़ता है। बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बेहद कम होती है, इसलिए वह आसानी से बीमारी से चपेट में आ जाते हैं। लिहाजा उनकी निगरानी जरूरी है। बच्चे सुबह 11 बजे से शाम चार बजे तक धूप के सीधे संपर्क में न रहें। घर से बाहर जाएं तो सिर ढके रहें और पानी की बोतल साथ रखें। आइसक्रीम, कोल्ड ड्रिंक, फास्ट फू ड से दूर रहें। घर पर पका ताजा भोजन ही खाएं। पानी का सेवन कई बार रुक रुक कर करना बेहतर है।
अभिभावक ध्यान दें ताकि न हो देरी
छह माह तक के बच्चों को केवल स्तनपान कराएं। छह माह बाद पर्याप्त संपूरक आहार दें। साबुन से हाथ धोकर ही बच्चे खाना खाएं। सभी टीके लगवाएं। दस्त होने पर जिंक के साथ ओआरएस दें। पांच से ज्यादा दस्त होने पर स्वास्थ्य केंद्र पर ले जाएं। एंटीबॉयोटिक चिकित्सक के परामर्श से दें। ध्यान दें कि बच्चा खाना बंद न करे। गंभीर हालत में दस्त या खूनी दस्त के साथ कई बार उल्टी हो। 102 डिग्री या अधिक बुखार बना रहे। बच्चा सुस्त, चिड़चिड़ा, दर्द में दिखे, मुंह सूखना, रोने पर आंसू का न निकलना, पेशाब न होना भावशून्य होना आदि गंभीर लक्षण हैं।