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रिफाइनरी के अवशेष में 80 फीसदी प्रोटीन से सेहतमंद होंगी मुर्गिंयां
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आईवीआरआई
- फोटो : आईवीआरआई
शोध के लिए सीएआरआई और इंडियन ऑयल के बीच एमओयूू पर हुए दस्तखत
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बरेली। रिफाइनरी में गैस से एथेनाल बनने के बाद जो ठोस अवशेष बचता है, उसमें 80 प्रतिशत तक प्रोटीन होता है। इसका इस्तेमाल अगर कुक्कुट पालन में किया जाए तो मुर्गी पालन के लिए प्रोटीन का एक सस्ता और बड़ा स्रोत मिल जाएगा। इसे लेकर केंद्रीय पक्षी अनुसंधान संस्थान (सीएआरआई) और इंडियन ऑयल कार्पोरेशन फरीदाबाद के बीच गुरुवार को एक समझौता ज्ञापन यानी एमओयू पर हस्ताक्षर हुए हैं।
वैज्ञानिकों का मानना है कि रिफाइनरी अपशिष्ट गैसों से एथेनाल में परिवर्तित होने के बाद जो अवशेष बचता है, उस जैविक पदार्थ में करीब 80 प्रतिशत प्रोटीन होता है। इसे लेकर शोध होना है कि इस प्रोटीन का इस्तेमाल कुक्कुट आहार में एक सस्ते स्रोत के रूप में किया जा सकता है। इसकी उपयोगिता की संभावनाओं का पता लगाने के लिए शोध शुरू हो गया है। उल्लेखनीय है कि अभी मुर्गी दाने के लिए कुक्कुट आहार में प्रोटीन की लागत सर्वाधिक है। अगर ये शोध सफल रहा तो इंडियन ऑयल कंपनी की रिफाइनरी से इस इस सस्ते प्रोटीन का उत्पादन कुक्कुट आहार के तौर पर हो सकता है। संस्थान के निदेशक डॉ. संजीव कुमार ने बताया कि इस परियोजना की अवधि एक वर्ष की होगी। निदेशक के साथ शैलेंद्र कुमार शर्मा, कार्यकारी निदेशक (टीपीएफ) आईओसी, ने समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। समझौता ज्ञापन का आदान-प्रदान वीडियो कॉन्फ्रेसिंग के माध्यम से किया गया। आईसीएआर-सीएआरआई की परियोजना टीम में डॉ. जे.जे. रोकाड़े, परियोजना के प्रमुख अन्वेषक, अपने सह प्रमुख अन्वेषकों डॉ. जगबीर सिंह त्यागी, डॉ. संदीप सरन, डॉ. प्रमोद कुमार त्यागी डॉ. गोपी एम. के साथ उपस्थित थे। आईओसी की ओर से डॉ. एस.एस.वी. रामाकुमार, निदेशक, अनुसंधान एवं विकास, जीएस कपूर, आलोक कपूर, आलोक शर्मा तथा डॉ. मोहाना राव के साथ-साथ अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
वैज्ञानिकों का मानना है कि रिफाइनरी अपशिष्ट गैसों से एथेनाल में परिवर्तित होने के बाद जो अवशेष बचता है, उस जैविक पदार्थ में करीब 80 प्रतिशत प्रोटीन होता है। इसे लेकर शोध होना है कि इस प्रोटीन का इस्तेमाल कुक्कुट आहार में एक सस्ते स्रोत के रूप में किया जा सकता है। इसकी उपयोगिता की संभावनाओं का पता लगाने के लिए शोध शुरू हो गया है। उल्लेखनीय है कि अभी मुर्गी दाने के लिए कुक्कुट आहार में प्रोटीन की लागत सर्वाधिक है। अगर ये शोध सफल रहा तो इंडियन ऑयल कंपनी की रिफाइनरी से इस इस सस्ते प्रोटीन का उत्पादन कुक्कुट आहार के तौर पर हो सकता है। संस्थान के निदेशक डॉ. संजीव कुमार ने बताया कि इस परियोजना की अवधि एक वर्ष की होगी। निदेशक के साथ शैलेंद्र कुमार शर्मा, कार्यकारी निदेशक (टीपीएफ) आईओसी, ने समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। समझौता ज्ञापन का आदान-प्रदान वीडियो कॉन्फ्रेसिंग के माध्यम से किया गया। आईसीएआर-सीएआरआई की परियोजना टीम में डॉ. जे.जे. रोकाड़े, परियोजना के प्रमुख अन्वेषक, अपने सह प्रमुख अन्वेषकों डॉ. जगबीर सिंह त्यागी, डॉ. संदीप सरन, डॉ. प्रमोद कुमार त्यागी डॉ. गोपी एम. के साथ उपस्थित थे। आईओसी की ओर से डॉ. एस.एस.वी. रामाकुमार, निदेशक, अनुसंधान एवं विकास, जीएस कपूर, आलोक कपूर, आलोक शर्मा तथा डॉ. मोहाना राव के साथ-साथ अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
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