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Chhath Puja 2025: नहाय खाय के साथ छठ पूजा कल से, बरेली में भी बिखरेगी आस्था के महापर्व की छटा

Fri, 24 Oct 2025 07:40 AM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली Published by: बरेली ब्यूरो Updated Fri, 24 Oct 2025 07:40 AM IST
सार

 भगवान सूर्य और छठी मैया को समर्पित महापर्व छठ हर वर्ष कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी को मनाया जाता है। इस बार यह पूजा 25 से शुरू होगी, जो 28 अक्तूबर को अर्घ्य देने के साथ समाप्त होगी।

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Chhath Puja with Nahai Khay starts tomorrow
Chhath Puja 2025 - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

सूर्य उपासना के महापर्व छठ की शुरुआत 25 अक्तूबर को नहाय-खाय से होगी। भगवान सूर्य और छठी मैया को समर्पित महापर्व छठ हर वर्ष कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी को मनाया जाता है। इस बार यह पूजा 25 से शुरू होगी, जो 28 अक्तूबर को अर्घ्य देने के साथ समाप्त होगी। इस दौरान महिलाएं बच्चों के स्वास्थ्य, सफलता और दीर्घायु के लिए 36 घंटे उपवास करती हैं। उत्सव के अवसर पर शहर में तमाम जगहों पर दिनभर महिलाएं तैयारियों में जुटी रहीं।

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छठ पूजा के लिए कैंट स्थित धोपेश्वर नाथ मंदिर के सरोवर में विशेष तैयारियां चल रही हैं। छठ पूजा के लिए रोशनी और साफ- सफाई कराई जा रही है। इज्जतनगर स्थित शिव पार्वती मंदिर में भी साफ-सफाई की जा रही है। इसके साथ रंगाई-पुताई का कार्य भी जारी है। 
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रुहेलखंड विश्वविद्यालय में भी छठ पूजा की तैयारियां जोरों पर हैं। तालाब की साफ-सफाई का कार्य चल रहा है और मंदिर की मनमोहक फूलों और झालरों से सजावट की जा रही है। इस अवसर पर शहर में लोगों की ओर से घरों में विधि-विधान पूर्वक पूजा अर्चना की जाती है। कॉलोनी में एक घर में ही छठ पूजा का आयोजन किया जाता है, जिसमें आसपास के लोग एकत्रित होते हैं और सूर्य भगवान को अर्घ्य देते हैं। 

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पहला दिन नहाय-खाय
नहाय-खाय शनिवार को होगा। इस दिन श्रद्धालुओं की ओर से साफ सफाई कर नदी में स्नान के बाद नए वस्त्र धारण कर शाकाहारी भोजन ग्रहण किया जाएगा। इस दिन व्रती के भोजन ग्रहण करने के बाद ही घर के बाकी सदस्य भोजन ग्रहण करते हैं।

दूसरा दिन खरना
खरना तिथि खरना छठ पूजा का दूसरा दिन होता है। खरना के दिन व्रती एक समय मीठा भोजन करते हैं। इस दिन गुड़ से बनी चावल की खीर खाई जाती है। इसके उपरांत 36 घंटे का निर्जला व्रत भी प्रारंभ हो जाता है।

तीसरा दिन संध्या अर्घ्य
छठ पूजा का विशेष दिन होता है, इस दिन डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है और सूरज की विधिवत पूजा की जाती है। रात में छठी मैया के मंगल गीतों का गायन किया जाता है और इस व्रत की कथा सुनी जाती है। अर्घ्य के लिए ठेकुआ, चावल के लड्डू जैसी कई मिठाइयां बनाई जाती है। मिठाइयों और फलों को रखकर टोकरी या सूप में सजाया जाता है।

चौथा दिन सुबह का अर्घ्य
छठ पूजा का आखिरी दिन होता है, इस दिन व्रती महिलाएं सूर्योदय से पहले नदी-तालाबों के घाटों पर पहुंचती हैं और उगते हुए सूर्य को कच्चे दूध में गंगा जल मिलाकर अर्घ्य देती हैं। इस दिन व्रत का पारण होता है, इसके साथ ही छठ पूजा का समापन होता है।
 
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