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Chhath Puja: नहाय खाय के साथ छठ पूजा आज से, महिलाएं रखेंगी 36 घंटे का निर्जला व्रत, बरेली में यहां होंगे आयोजन

Mon, 04 Nov 2024 02:11 PM IST
मुकेश कुमार संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली Published by: मुकेश कुमार Updated Mon, 04 Nov 2024 02:11 PM IST
सार

Chhath Puja 2024: भगवान सूर्य और छठी मैया को समर्पित महापर्व छठ पूजा का शुभारंभ मंगलवार को नहाय खाय के साथ होगी। बरेली में भी कई जगह छठ पूजा का आयोजन होता है। 

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Chhath Puja 2024 with Nahai Khay starts tomorrow
Chhath Puja 2024 - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

सूर्य उपासना के महापर्व छठ की शुरुआत पांच नवंबर को नहाय-खाय से होगी। भगवान सूर्य और छठी मैया को समर्पित महापर्व छठ हर वर्ष कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी को मनाया जाता है। इस बार यह पूजा पांच नवंबर से शुरू होगी, जो आठ नवंबर को अर्घ्य देने के साथ समाप्त होगी। बरेली में भी इसे लेकर तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। 

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छठ पूजा पर महिलाएं बच्चों के स्वास्थ्य, सफलता और दीर्घायु के लिए 36 घंटे उपवास करती हैं। उत्सव के अवसर पर शहर में तमाम जगहों पर दिनभर महिलाएं तैयारियों में जुटी रहीं। छठ पूजा के लिए कैंट स्थित धोपेश्वर नाथ मंदिर के सरोवर में विशेष तैयारियां चल रही हैं। छठ पूजा के लिए रोशनी और साफ-सफाई कराई जा रही है। 
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रुहेलखंड विश्वविद्यालय में होता है आयोजन 
इज्जतनगर स्थित शिव पार्वती मंदिर में भी साफ-सफाई की जा रही है। इसके साथ रंगाई-पुताई का कार्य भी जारी है। मंदिर को सुंदर और रंग बिरंगी रोशनियों से सजाने का काम भी चल रहा है। रुहेलखंड विश्वविद्यालय में भी छठ पूजा की तैयारियां जोरों पर हैं। तालाब की साफ-सफाई का कार्य चल रहा है और मंदिर की मनमोहक फूलों और झालरों से सजावट की जा रही है।

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Chhath Puja 2024 with Nahai Khay starts tomorrow
रुहेलखंड विश्वविद्यालय स्थित मंदिर परिसर में छठ पूजा के लिए तैयारियां करते लोग - फोटो : अमर उजाला

इस अवसर पर शहर में लोगों की ओर से घरों में विधि विधान पूर्वक पूजा अर्चना की जाती है। कॉलोनी में एक घर में ही छठ पूजा का आयोजन किया जाता है, जिसमें आसपास के लोग एकत्रित होते हैं और सूर्य भगवान को अर्घ्य देते हैं। लोग घरों में टब में जल रखकर पूजा करते हैं। वह इसे आम की पत्तियों, फूलों और रंग बिरंगी लाइटों से सजाते हैं और विधि विधान के साथ पूजा करते हैं। 

छठ पूजा का मुहूर्त
ज्योतिषाचार्य कृष्ण के. शर्मा के अनुसार हर साल छठ पूजा दिवाली से छह दिन बाद की जाती है, इस वर्ष कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि सात नवंबर की देर रात 12 बजकर 41 मिनट पर शुरू होगी और इसका समापन आठ नवंबर की देर रात 12 बजकर 34 मिनट पर होगा। ऐसे में सात नवंबर, बृहस्पतिवार के दिन ही संध्याकाल का अर्घ्य दिया जाएगा और सुबह का अर्घ्य अगले दिन आठ नवंबर को दिया जाएगा।

इसलिए होती है छठ पूजा
छठ पूजा का वर्णन ब्रह्मवैवर्त पुराण में मिलता है। कथा के अनुसार जब राजा मनु के पुत्र प्रियव्रत को कोई संतान नहीं हुई तो महर्षि कश्यप के कहने पर उन्होंने महायज्ञ किया। परिणामस्वरूप रानी गर्भवती हुई। मगर दुर्भाग्यवश बच्चे का देहांत गर्भ में ही हो गया। अजन्में शिशु की मौत की खबर सुनकर प्रजा शोक में डूब गई। इसी समय आसमान में छठी मइया प्रकट हुईं। राजा प्रियव्रत की प्रार्थना से उन्होंने बच्चे को जीवित कर दिया। मान्यता है कि तभी से यह त्योहार मनाया जाता है।

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