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महंगी एंटीबायोटिक के नाम पर बेची जा रही चॉक
Mon, 28 Jan 2019 07:17 PM IST
राजेश सैनी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखीमपुर खीरी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखीमपुर खीरी
Published by: राजेश सैनी
Updated Mon, 28 Jan 2019 07:17 PM IST
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दवा (सांकेतिक तस्वीर)
महंगी एंटीबायोटिक दवाओं के नाम पर चॉक (खड़िया) बेची जा रही है। हिमाचल प्रदेश के सोलन स्थित जीएनबी मेडिका लैब में बनी टैबलेट पावरमाक्स सीवी 625 का नमूना लैब जांच में फेल हुआ है, जिसमें पोटेशियम क्लेवनेट साल्ट की मात्रा 125 एमजी के सापेक्ष 0.029 एमजी मिली है जो नगण्य है। इसी में दूसरा साल्ट एमॉक्सीसिलीन 500 एमजी के सापेक्ष 87 एमजी पाया गया है। ड्रग इंस्पेक्टर ने बैच नंबर टीए 18-01 की पावरमाक्स टैबलेट की बिक्री पर रोक लगाई है और गोला की संबंधित मेडिकल एजेंसी के पास उपलब्ध करीब 1200 टैबलेट को गाजियाबाद की फर्म को वापस करा दिया है।
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ड्रग इंस्पेक्टर सुनील कुमार रावत ने गोला गोकर्णनाथ स्थित राजेश मेडिकल एजेंसी से अगस्त 2018 में तीन दवाओं के नमूने लिए थे, जिसकी जनवरी में रिपोर्ट आई है। इसमें टैबलेट पावरमाक्स सीवी 625 एंटीबायोटिक दवा में साल्ट पोटेशियम क्लैवनेट की मात्रा नगण्य मिली है। ड्रग इंस्पेक्टर ने उस बैच की दवा की बिक्री प्रतिबंधित कर दी है। पूछताछ में राजेश मेडिकल एजेंसी ने बताया है कि यह दवा गाजियाबाद की फर्म विजिटा लाइफ साइंस से खरीदी गई थी, जबकि इसकी निर्माता कंपनी हिमाचल प्रदेश के सोलन स्थित जीएनबी मेडिका लैब है। छह गोलियों के पैक की कीमत (एमआरपी) 109 रुपये है, जो प्रति टैबलेट 18 रुपये है। जीवनरक्षक दवाओं में शुमार इस टैबलेट की खराब गुणवत्ता के चलते ड्रग इंस्पेक्टर ने राजेश मेडिकल एजेंसी के पास उपलब्ध स्टॉक 1200 टेबलेट को वापस कराया है।
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विशेष न्यायालय में दर्ज होगा मामला
दवा में गड़बड़ी करके मरीजों को चूना लगाने के साथ ही उनके जीवन से खिलवाड़ किए जाने का मामला बेहद संगीन है। लिहाजा दोषी फर्म और दोषी व्यक्ति के खिलाफ विशेष न्यायालय में वाद दायर कराया जाएगा। ड्रग इंस्पेक्टर सुनील कुमार रावत ने बताया कि औषधि एवं सौंदर्य प्रसाधन सामग्री अधिनियम के तहत लखनऊ के विशेष न्यायालय में वाद दायर कराया जाएगा। मुकदमे में निर्माता जीएनबी मेडिका लैब सोलन हिमाचल प्रदेश को मुख्य रूप से पार्टी बनाया जाएगा, क्योंकि उसने अपने जवाब में दवा को अपनी कंपनी का होना स्वीकार कर लिया है। इसके अलावा संबंधित फर्मों को भी रिपोर्ट में शामिल किया जाएगा।
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दवा निर्माता कंपनी से जवाब मिलने के बाद मामले की विवेचना की जा रही है, जिसके बाद दोषी फर्म के खिलाफ सक्षम न्यायालय में वाद दायर किया जाएगा। अभी उस बैच की दवा बिक्री पर रोक लगाई गई है। कुल कितनी टैबलेट उस बैच में बनीं, इसकी जांच टीम निर्माता कंपनी जाकर करेगी। - सुनील कुमार रावत, ड्रग इंस्पेक्टर