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Bareilly News: जनगणना में बगैर नेटवर्क के भी ऑफलाइन सुरक्षित रहेगा डाटा
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जनगणना करते समय जब कर्मचारी मोबाइल से गणना करेंगे तो उन्हें नेटवर्क की समस्या से नहीं जूझना पड़ेगा। बगैर नेटवर्क के भी उनका डाटा ऑफलाइन सुरक्षित रहेगा।
जनगणना में पहली बार ऐसा सिस्टम तैयार किया गया है, जिसमें मोबाइल फोन में केवल डाटा एंट्री का माध्यम होगा। उसमें स्थायी स्टोरेज नहीं रहेगा। यानी कर्मचारी जैसे ही किसी परिवार का विवरण एप पर भरेंगे, नेटवर्क उपलब्ध होने पर जानकारी सर्वर पर भेज दी जाएगी। इसके बाद मोबाइल पर उसकी कॉपी नहीं रहेगी। अधिकारियों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में डाटा चोरी और साइबर ठगी के मामलों में बढ़ोतरी के बाद सुरक्षा व्यवस्था को प्राथमिकता दी गई है। इसी कारण नो लोकल स्टोरेज व्यवस्था अपनाई है, ताकि किसी उपकरण के गुम होने या गलत हाथों में जाने पर नागरिकों की निजी जानकारी न मिल सके।
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प्रत्येक जनगणना कर्मी को औसतन 200 परिवारों का दायित्व सौंपा
जनगणना के पहले चरण में मकानों की सूची, भवन की स्थिति और बुनियादी सुविधाओं का विवरण जुटाया जाएगा। दूसरे चरण में परिवार के सदस्यों, शिक्षा, रोजगार, सामाजिक व आर्थिक स्थिति समेत अन्य निर्धारित सूचनाएं ली जाएंगी। प्रशिक्षण कार्यक्रमों में प्रत्येक जनगणना कर्मी को औसतन 200 परिवारों का दायित्व सौंपा है। उन्हें रोजाना करीब 20 परिवारों की एंट्री का लक्ष्य बताया गया है। इसके लिए मोबाइल एप संचालन, पहचान सत्यापन, लोकेशन टैगिंग और डेटा अपलोड की प्रक्रिया समझाई जा रही है। इस प्रक्रिया के दौरान किस कर्मचारी ने कितने घरों का सर्वे किया, कितनी प्रविष्टियां लंबित हैं और कौन सा क्षेत्र स्तर पर ऑनलाइन देखी जा सकेगी।
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वर्जन ...
इस बार जनगणना पूरी तरह डिजिटल तरीके से हो रही है। प्रगणकों को भी इसी को ध्यान में रखते हुए प्रशिक्षण दिया जा रहा है। पांच मई के बाद व्यक्ति स्वयं भी अपना विवरण पोर्टल पर भर सकता है। जनगणना के दौरान बगैर नेटवर्क के ऑफलाइन भी डाटा सेव रहेगा, ऑनलाइन होने पर जानकारी सीधे साॅफ्टवेयर में चली जाएंगी।
- संतोष सिंह, जिला जनगणना अधिकारी
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जनगणना में पहली बार ऐसा सिस्टम तैयार किया गया है, जिसमें मोबाइल फोन में केवल डाटा एंट्री का माध्यम होगा। उसमें स्थायी स्टोरेज नहीं रहेगा। यानी कर्मचारी जैसे ही किसी परिवार का विवरण एप पर भरेंगे, नेटवर्क उपलब्ध होने पर जानकारी सर्वर पर भेज दी जाएगी। इसके बाद मोबाइल पर उसकी कॉपी नहीं रहेगी। अधिकारियों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में डाटा चोरी और साइबर ठगी के मामलों में बढ़ोतरी के बाद सुरक्षा व्यवस्था को प्राथमिकता दी गई है। इसी कारण नो लोकल स्टोरेज व्यवस्था अपनाई है, ताकि किसी उपकरण के गुम होने या गलत हाथों में जाने पर नागरिकों की निजी जानकारी न मिल सके।
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प्रत्येक जनगणना कर्मी को औसतन 200 परिवारों का दायित्व सौंपा
जनगणना के पहले चरण में मकानों की सूची, भवन की स्थिति और बुनियादी सुविधाओं का विवरण जुटाया जाएगा। दूसरे चरण में परिवार के सदस्यों, शिक्षा, रोजगार, सामाजिक व आर्थिक स्थिति समेत अन्य निर्धारित सूचनाएं ली जाएंगी। प्रशिक्षण कार्यक्रमों में प्रत्येक जनगणना कर्मी को औसतन 200 परिवारों का दायित्व सौंपा है। उन्हें रोजाना करीब 20 परिवारों की एंट्री का लक्ष्य बताया गया है। इसके लिए मोबाइल एप संचालन, पहचान सत्यापन, लोकेशन टैगिंग और डेटा अपलोड की प्रक्रिया समझाई जा रही है। इस प्रक्रिया के दौरान किस कर्मचारी ने कितने घरों का सर्वे किया, कितनी प्रविष्टियां लंबित हैं और कौन सा क्षेत्र स्तर पर ऑनलाइन देखी जा सकेगी।
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इस बार जनगणना पूरी तरह डिजिटल तरीके से हो रही है। प्रगणकों को भी इसी को ध्यान में रखते हुए प्रशिक्षण दिया जा रहा है। पांच मई के बाद व्यक्ति स्वयं भी अपना विवरण पोर्टल पर भर सकता है। जनगणना के दौरान बगैर नेटवर्क के ऑफलाइन भी डाटा सेव रहेगा, ऑनलाइन होने पर जानकारी सीधे साॅफ्टवेयर में चली जाएंगी।
- संतोष सिंह, जिला जनगणना अधिकारी